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असहिष्णुता की ओर जा रहा देश: मुफ्ती जाहिद
Updated Tue, 08 May 2018 02:52 AM IST
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न्यूज डेस्क, अमर उजाला, अलीगढ़।
अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी (एएमयू) के छात्रसंघ भवन में पाकिस्तान जनक मोहम्मद अली जिन्ना की तस्वीर को लेकर हुए विवाद के बीच सुन्नी थियोलॉजी विभाग के प्रोफेसर डॉ. मुफ्ती मोहम्मद जाहिद खान ने कहा कि एएमयू में जिन्ना की तस्वीर नहीं होनी चाहिए। वहीं, असहिष्णुता की ओर देश जा रहा है।
मुफ्ती जाहिद ने कहा कि समस्या का समाधान ताकत और बल से नहीं, बल्कि संवाद से होना चाहिए। उन्होंने कहा कि असहिष्णुता को रोकने की जरूरत है। जिन्ना की तस्वीर एएमयू के छात्रसंघ भवन में वर्ष 1938 में लगी थी, जब वह राष्ट्रवादी नेता थे।
यह बात अलग है कि बाद में जिन्ना हिंदू-मुस्लिम दंगे का चैंपियन हो गया। मुफ्ती ने कहा कि उनकी राय में एएमयू से जिन्ना की तस्वीर हटनी चाहिए। जिन्ना के पक्ष में कोई नहीं है। सिर्फ झूठा प्रचार किया जा रहा है। जिस तरह से जिन्ना कत्लेआम कराने का दोषी है, वैसे ही महारानी विक्टोरिया, जार्ज पंचम भी कत्लेआम कराने का भी दोषी हैं। इनके स्टैच्यू और नाम को खत्म कर देना चाहिए।
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देश में कुछ न कुछ ऐसी घटनाएं हो जाती हैं, जिससे देश असहिष्णुता की ओर जाने लगता है, यह सिलसिला काफी अरसे से चल रहा है। इसलिए अब सहिष्णुता की फसल लहलहानी होगी। अब इसकी बहुत ही जरूरत है। देश की खूबसूरती यह है कि यहां हर धर्म, हर जाति, हर भाषा को मानने वाले लोग रह रहे हैं। जैसे बाग में हर तरह के फूल होते हैं।
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अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी (एएमयू) के छात्रसंघ भवन में पाकिस्तान जनक मोहम्मद अली जिन्ना की तस्वीर को लेकर हुए विवाद के बीच सुन्नी थियोलॉजी विभाग के प्रोफेसर डॉ. मुफ्ती मोहम्मद जाहिद खान ने कहा कि एएमयू में जिन्ना की तस्वीर नहीं होनी चाहिए। वहीं, असहिष्णुता की ओर देश जा रहा है।
मुफ्ती जाहिद ने कहा कि समस्या का समाधान ताकत और बल से नहीं, बल्कि संवाद से होना चाहिए। उन्होंने कहा कि असहिष्णुता को रोकने की जरूरत है। जिन्ना की तस्वीर एएमयू के छात्रसंघ भवन में वर्ष 1938 में लगी थी, जब वह राष्ट्रवादी नेता थे।
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यह बात अलग है कि बाद में जिन्ना हिंदू-मुस्लिम दंगे का चैंपियन हो गया। मुफ्ती ने कहा कि उनकी राय में एएमयू से जिन्ना की तस्वीर हटनी चाहिए। जिन्ना के पक्ष में कोई नहीं है। सिर्फ झूठा प्रचार किया जा रहा है। जिस तरह से जिन्ना कत्लेआम कराने का दोषी है, वैसे ही महारानी विक्टोरिया, जार्ज पंचम भी कत्लेआम कराने का भी दोषी हैं। इनके स्टैच्यू और नाम को खत्म कर देना चाहिए।
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देश में कुछ न कुछ ऐसी घटनाएं हो जाती हैं, जिससे देश असहिष्णुता की ओर जाने लगता है, यह सिलसिला काफी अरसे से चल रहा है। इसलिए अब सहिष्णुता की फसल लहलहानी होगी। अब इसकी बहुत ही जरूरत है। देश की खूबसूरती यह है कि यहां हर धर्म, हर जाति, हर भाषा को मानने वाले लोग रह रहे हैं। जैसे बाग में हर तरह के फूल होते हैं।