Aligarh: आगरा के युवक को 65 हजार में बेची लापता छात्रा, खरीदार-विक्रेता सहित 5 दबोचे, एक आरोपी फरार
पुलिस के अनुसार इस मामले में ईएमयू ट्रेन से किशोरी महिला मंजू संग बरहन तक गई। इसके बाद वहां से दूसरे वाहन में गई। उसी सीसीटीवी की मदद से पहले महिला की पहचान शुरू की गई। बाद में अन्य आरोपियों तक पहुंचा जा सका।
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अलीगढ़ महानगर के गांधीपार्क इलाके से तीन माह पहले लापता हुई नाबालिग छात्रा को आगरा के युवक को 65 हजार रुपये में बेच दिया गया था। वह युवक संग शादी कर पत्नी की तरह रह रही थी। पुलिस ने छात्रा को तलाशते हुए उसे खरीदने व बेचने में शामिल रहे कुल पांच लोग दबोच लिए हैं। एक आरोपी अभी फरार है। वहीं मेडिकल परीक्षण व बयान की प्रक्रिया के बाद किशोरी को परिवार के सुपुर्द कर दिया गया है।
घटनाक्र1 मई का है। नोएडा में मजदूरी करने वाले दंपती के बच्चे यहां गांधीपार्क इलाके के घर में रहते थे। उनकी करीब 17 वर्षीय बेटी रोजाना की तरह स्कूल के लिए निकली। मगर वापस नहीं आई। जब किशोरी के भाई ने मां को यह वाकया बताया तो परिजन नोएडा से यहां आए। मामले में मुकदमा दर्ज कराया गया। शुरुआती जांच में परिवार के शक के आधार पर किशोरी की कुछ सहेलियों व कुछ युवकों से पूछताछ हुई। काफी प्रयास के बाद भी कोई सुराग नहीं मिला। इस पर मां-बाप ने सीएम पोर्टल तक पर शिकायत की। आत्मदाह तक की धमकी दे दी। इसके बाद पुलिस ने सर्विलांस व सीसीटीवी का सहारा लिया।
इसी प्रयास में पुलिस ने 4 अगस्त को आगरा डौकी क्षेत्र के विसहरी हाल सुशील नगर यमुना ब्रिज आगरा के पुनीत उर्फ निक्की को दबोच लिया। छात्रा भी उसके घर से ही मिली। पूछताछ में पुनीत ने बताया कि उसने किशोरी को 65 हजार रुपये में खरीदा है। इसके बाद दोनों ने शादी की है। तब से दोनों पति-पत्नी के रूप में रह रहे हैं। बाद में किशोरी व पुनीत को अलीगढ़ लाया गया। मेडिकल परीक्षण व बयान आदि की प्रक्रिया पूरी कराई गई। इसके साथ ही पुलिस ने पुनीत से पूछताछ के आधार पर उसे बेचने के आरोपों में शामिल हाथरस सादाबाद के कछपुरा की मंजू, आगरा बरहन के बांधनू के बालकांत शर्मा, बरहन मझउआ के प्रमोद, उसकी मां रामबेटी व एक अन्य गिरीश के नाम उजागर किए। जिनमें से गिरीश को छोड़कर अन्य सभी को दबोच लिया गया। सभी 7 अगस्त को जेल भेज दिए गए। वहीं, मुकदमे में पाक्सो व दुष्कर्म की धारा बढ़ाई गई है।
मामले में तीन माह के प्रयास के बाद सफलता मिली है। किशोरी को परिजनों के सुपुर्द कर दिया गया है।-मृगांक शेखर पाठक, एसपी सिटी
किशोरी ने ये स्वीकारा पूछताछ में
थाना पुलिस के अनुसार किशोरी ने पूछताछ व अपने बयानों में स्वीकारा है कि वह घटना वाले दिन सुबह स्कूल गई थी। वहां से अपने दोस्तों संग घूमते हुए घर पहुंची। मगर घर पर ताला लगा मिला। फिर वापस घूमने निकल आई। तभी स्टेशन पहुंच गई। वहां अचानक से उसे मंजू नाम की महिला मिल गई। जहां उसने बातों में खुद को अनाथ बता दिया। बस मंजू उसे अपने साथ ले गई। बाद में उसको बेच दिया।
पहले भी इस धंधे में शामिल रहा यह गिरोह
पुलिस पूछताछ में मंजू ने स्वीकारा कि वह टीबी मरीज है। घटना वाले दिन इसी के उपचार के लिए अलीगढ़ आई थी। तभी स्टेशन पर उसकी किशोरी से मुलाकात हो गई। वह उसे अनाथ बताने पर अपने साथ ले गई। यहां से वह उसे सीधे प्रमोद के घर लेकर पहुंची। जहां एक माह पांच दिन तक उसके घर पर रखा। प्रमोद व अन्य आरोपियों की मदद से ही उसको बेचना तय किया गया। हालांकि पहले 85 हजार में बेचना तय हुआ। मगर पुनीत ने 65 हजार रुपये ही दिए। पकड़े गए आरोपियों से 12 हजार 600 रुपये बरामद किए गए। आरोपियों के विषय में उजागर हुआ है कि ये पहले भी इस तरह के धंधे में शामिल रहे हैं। पूर्व में इसी तरह एक बच्चे को आगरा में बेच चुके हैं। पुलिस उसके विषय में जानकारी जुटा रही है। मंजू, प्रमोद व बालकांत ने स्वीकारा है कि जिनके पास बच्चे नहीं होते या जिनकी शादियां नहीं होतीं, उनको इसी तरह से मानव तस्करी कर बच्चे व युवतियां लाकर बेचते हैं। मगर पहली बार पकड़े गए हैं।
स्टेशनों के सीसीटीवी ने खोला राज
पुलिस के अनुसार इस मामले में ईएमयू ट्रेन से किशोरी महिला मंजू संग बरहन तक गई। इसके बाद वहां से दूसरे वाहन में गई। उसी सीसीटीवी की मदद से पहले महिला की पहचान शुरू की गई। बाद में अन्य आरोपियों तक पहुंचा जा सका।