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45 साल पुरानी खाई, मुश्किल से पटेगी भाई
अमर उजाला/ ब्यूरो
Updated Sun, 24 Jul 2016 02:17 AM IST
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45 साल पुरानी खाई, मुश्किल से पटेगी भाई
- फोटो : महीपाल सिंह
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बाबरी मंडी इलाका कई बार दंगों की भेंट चढ़ चुका है। 45 वर्ष पहले 1971 में यहां पहली बार दंगा हुआ और उसके बाद से लगातार कई बार दंगाें की चोट खाई। तकरीबन 12 बार यहां पर चारो ओर से घेर कर हमला किया गया। जिसमें 50 लोग गंभीर रूप से घायल हुए तो पुलिस कर्मियों सहित तीन की मौत हो गई। कुछ घायलों ने बाद में अस्पताल में दम तोड़ दिया।
2006 में दंगों के दौरान ही यहां के हिंदुवादी नेता राजू समोसे वाले की गोली मार कर हत्या कर दी गई। बल्वाइयाें ने यहां कई बार पुलिस और पीएसी को भी निशाना बनाया। तेजाब की बोतल, ईंट, पत्थर फेंकना यहां आम बात है तो पथराव के दौरान ही हवाई फायरिंग भी खूब होती है।
इतना सब कुछ होने के बाद भी यहां पुलिस की सुरक्षा की स्थायी व्यवस्था नहीं हो पाई है और पूरा इलाका एक अदद पुलिस चौकी का इंतजार कर रहा है। पार्षद दिनेश वार्ष्णेय ने बताया कि गुजरे पांच साल में महिलाओं और बेटियों पर छीटाकशीं, छेड़छाड़ की घटनाएं बढ़ी है। क्योंकि बाबरी मंडी आने वाले सभी रास्ते घनी मुसलिम बस्तियों के बीच हैं। यहां के स्थानीय गोपाल वार्ष्णेय ने बताया कि अब रात में रिश्तेदार यहां आने से डरते हैं। पहले ऐसा नहीं था।
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2006 में दंगों के दौरान ही यहां के हिंदुवादी नेता राजू समोसे वाले की गोली मार कर हत्या कर दी गई। बल्वाइयाें ने यहां कई बार पुलिस और पीएसी को भी निशाना बनाया। तेजाब की बोतल, ईंट, पत्थर फेंकना यहां आम बात है तो पथराव के दौरान ही हवाई फायरिंग भी खूब होती है।
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इतना सब कुछ होने के बाद भी यहां पुलिस की सुरक्षा की स्थायी व्यवस्था नहीं हो पाई है और पूरा इलाका एक अदद पुलिस चौकी का इंतजार कर रहा है। पार्षद दिनेश वार्ष्णेय ने बताया कि गुजरे पांच साल में महिलाओं और बेटियों पर छीटाकशीं, छेड़छाड़ की घटनाएं बढ़ी है। क्योंकि बाबरी मंडी आने वाले सभी रास्ते घनी मुसलिम बस्तियों के बीच हैं। यहां के स्थानीय गोपाल वार्ष्णेय ने बताया कि अब रात में रिश्तेदार यहां आने से डरते हैं। पहले ऐसा नहीं था।
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