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साक्ष्यों के अभाव में हत्या मामले के पांच आरोपी बरी
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क्राइम न्यूज, अमर उजाला अलीगढ़।
थाना इगलास के गांव अलहेदा में चार वर्ष पूर्व हुई एक हत्या के मामले में पांच आरोपियों को कोर्ट ने साक्ष्यों के अभाव में बरी कर दिया है। फास्ट ट्रैक कोर्ट प्रथम के जज अभिनितम उपाध्याय ने आरोपियों को मामले से बरी करने का फैसला सुनाया।
अधिवक्ता वीरपाल सिंह जादौन ने बताया कि 27 फरवरी 2015 को इगलास के गांव अलहेदा निवासी राजेंद्र सिंह की गांव सिमरदड़ी में दुकान पर दाढ़ी बनवाने के दौरान गोली मारकर हत्या की गई थी। मृतक के बेटे वादी करन पाल ने इस मामले में अलहेदा निवासी सोहनपाल, ब्रजपाल, सुनील और क्वार्सी निवासी विनोद कुमार, प्रवेश कुमार सहित दो अज्ञात लोगों पर हत्या का मुकदमा दर्ज कराया था।
वादी के अनुसार नामजदों ने उसके पिता पर 2015 से पहले भी हमला किया था। उस समय पेट में गोली लगी थी। उस समय उनकी जान बचा ली गई थी। पुलिस की ओर से चार्जशीट दाखिल करने के बाद मामले फास्ट ट्रैक कोर्ट में पहुंचा।
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यहां सुनवाई के दौरान दोनों पक्षों की ओर से गवाह और सुबूत पेश किए गए। आरोपी पक्ष के अधिवक्ता वीरपाल जादौन के अनुसार फास्ट ट्रैक कोर्ट प्रथम ने सुनवाई के दौरान वादी पक्ष की ओर से ठोस सुबूत पेश नहीं करने पर साक्ष्यों के अभाव में सभी आरोपियों को मामले से बरी कर दिया है।
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थाना इगलास के गांव अलहेदा में चार वर्ष पूर्व हुई एक हत्या के मामले में पांच आरोपियों को कोर्ट ने साक्ष्यों के अभाव में बरी कर दिया है। फास्ट ट्रैक कोर्ट प्रथम के जज अभिनितम उपाध्याय ने आरोपियों को मामले से बरी करने का फैसला सुनाया।
अधिवक्ता वीरपाल सिंह जादौन ने बताया कि 27 फरवरी 2015 को इगलास के गांव अलहेदा निवासी राजेंद्र सिंह की गांव सिमरदड़ी में दुकान पर दाढ़ी बनवाने के दौरान गोली मारकर हत्या की गई थी। मृतक के बेटे वादी करन पाल ने इस मामले में अलहेदा निवासी सोहनपाल, ब्रजपाल, सुनील और क्वार्सी निवासी विनोद कुमार, प्रवेश कुमार सहित दो अज्ञात लोगों पर हत्या का मुकदमा दर्ज कराया था।
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वादी के अनुसार नामजदों ने उसके पिता पर 2015 से पहले भी हमला किया था। उस समय पेट में गोली लगी थी। उस समय उनकी जान बचा ली गई थी। पुलिस की ओर से चार्जशीट दाखिल करने के बाद मामले फास्ट ट्रैक कोर्ट में पहुंचा।
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यहां सुनवाई के दौरान दोनों पक्षों की ओर से गवाह और सुबूत पेश किए गए। आरोपी पक्ष के अधिवक्ता वीरपाल जादौन के अनुसार फास्ट ट्रैक कोर्ट प्रथम ने सुनवाई के दौरान वादी पक्ष की ओर से ठोस सुबूत पेश नहीं करने पर साक्ष्यों के अभाव में सभी आरोपियों को मामले से बरी कर दिया है।