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अलीगढ़ के कई कस्बे बारूद के ढेर पर बैठे
Updated Sat, 14 Oct 2017 01:43 AM IST
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बारूद के ढेर पर बैठे अलीगढ़ के कई कस्बे
ब्यूरो, अमर उजाला, गभाना/चंडौस/ गोंडा/ अतरौली (अलीगढ़)।
जनपद के कई कस्बे और गांव बारूद के ढेर पर बैठे हैं। दीपावली पर खतरा अधिक बढ़ गया। घनी आबादी के बीच न सिर्फ पटाखे बन रहे हैं बल्कि असुरक्षित तरीके से रिहायशी बस्तियों के बीच बारूद, गंधक और पोटाश की डंपिंग पटाखा बनाने वालों ने कर रखी है।
गुरुवार को जलाली का विस्फोट सबके सामने है। इस एक परिवार में तीन हादसों में आठ जाने जा चुकी हैं। इसके अलावा कई कस्बों में पहले भी विस्फोट हो चुके हैं। जानें जा चुकी हैं, लेकिन किसी भी घटना से पुलिस-प्रशासन ने कोई सबक नहीं लिया।
गभाना प्रतिनिधि के अनुसार कस्बे में मात्र में तीन लाइसेंसधारक हैं, जिन्हें आतिशबाजी का सामान तैयार करने की अनुमति मिली है। लेकिन पुलिस-प्रशासन की अनदेखी से रिहायशी इलाकों में तमाम लोग अवैध रूप से पटाखे तैयार कर रहे हैं। हालांकि एसडीएम विनीत उपाध्याय व इंस्पेक्टर श्रीप्रकाश चंद्र यादव का दावा है कि घनी आबादी में किसी भी कीमत पर पटाखा बनने एवं डंपिंग नहीं करने दी जाएगी। ऐसे लोग चिन्हित किए जाएंगे। कार्रवाई होगी।
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2008 में गोंडा में दो बेटियों की गई थी जान
गोंडा। दीपावली पर घनी आबादी के बीच पटाखे बनाने और बारूद की डंपिंग का खामियाजा गोंडा भी भुगत चुका है। पांच अक्तूबर 2008 को केनरा बैंक के समीप कुंदन ठेकेदार के मकान में जोरदार विस्फोट हुआ था। कुंदन की दो बेटियों ज्योति और मनीषा की इसमें जान चली गई थी। धमाका इतना जबर्दस्त था कि आसपास की दुकानें क्षतिग्रस्त हो गई थीं। कार्यवाहक थाना प्रभारी प्रदीप मलिक के अनुसार थाना क्षेत्र में चार लाइसेंस आतिशबाज हैं, जिनमें कुंदन सिंह, सत्यपाल सिंह के नाम गोंडा, बालकिशन के नाम मगदा व नाहर सिंह के नाम मुरवार में लाइसेंस है। नाहर सिंह आतिशबाजी के सामान की दुकान थाना इगलास क्षेत्र में संचालित करते हैं। आबादी में आतिशबाजी निर्माण पर पूर्ण रूप से प्रतिबंध लगाया जाएगा।
चंडौस में आठ साल पहले हुआ था विस्फोट
चंडौस। कस्बे के कसेरू मोड़ पर वर्ष 2006 में आतिशबाजी के सामान की बंद दुकान में विस्फोट हुआ था, जिसमें पड़ोसी युवक की जान चली गई थी। टंकी मुहल्ला निवासी गोविंद की दुकान में शाम के करीब सात बजे विस्फोट हुआ था। वह कुछ देर पहले ही दुकान बंद कर घर गया था। इस विस्फोट में पड़ोस में रहने वाले गांव सुदेशपुर निवासी होशियार खां के 25 वर्षीय पुत्र वाहिद अली की जान चली गई थी। चार माह पहले ही वाहिद की शादी हुई थी। चंडौस में चार लोगों के पास ही लाइसेंस हैं। यह भी कस्बे में ही आतिशबाजी का सामान तैयार करते हैं। कोतवाल राजीव यादव के अनुसार बगैर लाइसेंस पटाखे आदि बनाने वालों पर सख्त कार्रवाई होगी।
अतरौली क्षेत्र में भी जा चुकी कई जानें
अतरौली। आतिशबाजी का सामान तैयार करने का लाइसेंस क्षेत्र में किसी के पास नहीं है। चुनिंदा लोगों के पास महज बिक्री का लाइसेंस है, इसके बावजूद अतरौली, काजिमाबाद समेत कई जगहों पर अवैध रूप से आतिशबाजी का सामान बड़े पैमाने पर तैयार हो रहा है। 12 अगस्त 2017 को जमालगढ़ी निवासी लियाकत के घर में आतिशबाजी का सामान तैयार करते समय विस्फोट हुआ था। इसमें उनके मकान की छत उड़ गई थी और पत्नी नगीना गंभीर रूप से घायल हो गई थीं। 26 सितंबर 2016 को अतरौली के मुहल्ला पीरबहादुर में अब्दुल अजीत के यहां आतिशबाजी के सामान में विस्फोट हुआ था। इसमें उनकी पुत्रवधू अफसाना व बेटी सनम की मौत हो गई थी।
आबादी से बाहर बिकेगी आतिशबाजी
अतरौली। दीपावली पर आतिशबाजी आबादी से बाहर बिकेगी। शहर या गांव के अंदर आतिशबाजी बेचते हुए पाए जाने पर कार्रवाई की जाएगी। एफएसओ नन्नूमल शर्मा ने बताया कि अतरौली क्षेत्र में गत वर्ष 30 लोगों को दीपावली पर अतिशबाजी बेचने का लाइसेंस दिया गया था। इस साल अभी तक कोई लाइसेंस नहीं बना है। प्राप्त आवेदनों पर मौके पर जांच की जा रही है। आतिशबाजी बनाने के लाइसेंस पर डीएम के आदेश पर रोक लगी हुई है। स्थाई आतिशबाजी बेचने के लिए जमालगढ़ी, काजिमाबाद, डुकरिया वाली प्याऊ व अतरौली कस्बा सहित करीब आधा दर्जन लोगों के पास लाइसेंस हैं। दीपावली पर आतिशबाजी बेचने के स्थान पर कस्बे में फायर सर्विस की गाड़ी उपलब्ध रहेगी।
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ब्यूरो, अमर उजाला, गभाना/चंडौस/ गोंडा/ अतरौली (अलीगढ़)।
जनपद के कई कस्बे और गांव बारूद के ढेर पर बैठे हैं। दीपावली पर खतरा अधिक बढ़ गया। घनी आबादी के बीच न सिर्फ पटाखे बन रहे हैं बल्कि असुरक्षित तरीके से रिहायशी बस्तियों के बीच बारूद, गंधक और पोटाश की डंपिंग पटाखा बनाने वालों ने कर रखी है।
गुरुवार को जलाली का विस्फोट सबके सामने है। इस एक परिवार में तीन हादसों में आठ जाने जा चुकी हैं। इसके अलावा कई कस्बों में पहले भी विस्फोट हो चुके हैं। जानें जा चुकी हैं, लेकिन किसी भी घटना से पुलिस-प्रशासन ने कोई सबक नहीं लिया।
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गभाना प्रतिनिधि के अनुसार कस्बे में मात्र में तीन लाइसेंसधारक हैं, जिन्हें आतिशबाजी का सामान तैयार करने की अनुमति मिली है। लेकिन पुलिस-प्रशासन की अनदेखी से रिहायशी इलाकों में तमाम लोग अवैध रूप से पटाखे तैयार कर रहे हैं। हालांकि एसडीएम विनीत उपाध्याय व इंस्पेक्टर श्रीप्रकाश चंद्र यादव का दावा है कि घनी आबादी में किसी भी कीमत पर पटाखा बनने एवं डंपिंग नहीं करने दी जाएगी। ऐसे लोग चिन्हित किए जाएंगे। कार्रवाई होगी।
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2008 में गोंडा में दो बेटियों की गई थी जान
गोंडा। दीपावली पर घनी आबादी के बीच पटाखे बनाने और बारूद की डंपिंग का खामियाजा गोंडा भी भुगत चुका है। पांच अक्तूबर 2008 को केनरा बैंक के समीप कुंदन ठेकेदार के मकान में जोरदार विस्फोट हुआ था। कुंदन की दो बेटियों ज्योति और मनीषा की इसमें जान चली गई थी। धमाका इतना जबर्दस्त था कि आसपास की दुकानें क्षतिग्रस्त हो गई थीं। कार्यवाहक थाना प्रभारी प्रदीप मलिक के अनुसार थाना क्षेत्र में चार लाइसेंस आतिशबाज हैं, जिनमें कुंदन सिंह, सत्यपाल सिंह के नाम गोंडा, बालकिशन के नाम मगदा व नाहर सिंह के नाम मुरवार में लाइसेंस है। नाहर सिंह आतिशबाजी के सामान की दुकान थाना इगलास क्षेत्र में संचालित करते हैं। आबादी में आतिशबाजी निर्माण पर पूर्ण रूप से प्रतिबंध लगाया जाएगा।
चंडौस में आठ साल पहले हुआ था विस्फोट
चंडौस। कस्बे के कसेरू मोड़ पर वर्ष 2006 में आतिशबाजी के सामान की बंद दुकान में विस्फोट हुआ था, जिसमें पड़ोसी युवक की जान चली गई थी। टंकी मुहल्ला निवासी गोविंद की दुकान में शाम के करीब सात बजे विस्फोट हुआ था। वह कुछ देर पहले ही दुकान बंद कर घर गया था। इस विस्फोट में पड़ोस में रहने वाले गांव सुदेशपुर निवासी होशियार खां के 25 वर्षीय पुत्र वाहिद अली की जान चली गई थी। चार माह पहले ही वाहिद की शादी हुई थी। चंडौस में चार लोगों के पास ही लाइसेंस हैं। यह भी कस्बे में ही आतिशबाजी का सामान तैयार करते हैं। कोतवाल राजीव यादव के अनुसार बगैर लाइसेंस पटाखे आदि बनाने वालों पर सख्त कार्रवाई होगी।
अतरौली क्षेत्र में भी जा चुकी कई जानें
अतरौली। आतिशबाजी का सामान तैयार करने का लाइसेंस क्षेत्र में किसी के पास नहीं है। चुनिंदा लोगों के पास महज बिक्री का लाइसेंस है, इसके बावजूद अतरौली, काजिमाबाद समेत कई जगहों पर अवैध रूप से आतिशबाजी का सामान बड़े पैमाने पर तैयार हो रहा है। 12 अगस्त 2017 को जमालगढ़ी निवासी लियाकत के घर में आतिशबाजी का सामान तैयार करते समय विस्फोट हुआ था। इसमें उनके मकान की छत उड़ गई थी और पत्नी नगीना गंभीर रूप से घायल हो गई थीं। 26 सितंबर 2016 को अतरौली के मुहल्ला पीरबहादुर में अब्दुल अजीत के यहां आतिशबाजी के सामान में विस्फोट हुआ था। इसमें उनकी पुत्रवधू अफसाना व बेटी सनम की मौत हो गई थी।
आबादी से बाहर बिकेगी आतिशबाजी
अतरौली। दीपावली पर आतिशबाजी आबादी से बाहर बिकेगी। शहर या गांव के अंदर आतिशबाजी बेचते हुए पाए जाने पर कार्रवाई की जाएगी। एफएसओ नन्नूमल शर्मा ने बताया कि अतरौली क्षेत्र में गत वर्ष 30 लोगों को दीपावली पर अतिशबाजी बेचने का लाइसेंस दिया गया था। इस साल अभी तक कोई लाइसेंस नहीं बना है। प्राप्त आवेदनों पर मौके पर जांच की जा रही है। आतिशबाजी बनाने के लाइसेंस पर डीएम के आदेश पर रोक लगी हुई है। स्थाई आतिशबाजी बेचने के लिए जमालगढ़ी, काजिमाबाद, डुकरिया वाली प्याऊ व अतरौली कस्बा सहित करीब आधा दर्जन लोगों के पास लाइसेंस हैं। दीपावली पर आतिशबाजी बेचने के स्थान पर कस्बे में फायर सर्विस की गाड़ी उपलब्ध रहेगी।