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अलीगढ़ : 228 गांवों को बनाया जाएगा ओडीएफ प्लस
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डीएम सेल्वा कुमारी जे ने कहा कि शहरों जैसी सुविधाएं गांव में दिए जाने का प्रयास जारी है। गंदगी हटाकर गांवों को साफ बनाने पर काम किया जा रहा है। अब गांवों को ओडीएफ के बाद ओडीएफ प्लस बनाने काम शुरू कर दिया गया है। जनपद के 228 गांवों को सॉलिड लिक्विड वेस्ट मैनेजमेंट के तहत ओडीएफ प्लस गांव बनाया जाएगा।
बुधवार को पंचायत राज विभाग के तत्वावधान में शहर के एक होटल में आयोजित कार्यशाला में डीएम ने निर्देश दिया कि गांवों में नालियां बनाई जाएं और उनके जरिए पानी तालाबों तक ले जाया जाए। इससे गांवों में पानी इधर-उधर एकत्र नहीं होगा। जल से जनित रोग भी नहीं फैलेंगे।
सीडीओ अंकित खंडेलवाल ने बताया कि कूड़े के निकलने के स्थान से ही गीले और सूखे कूड़े को अलग कर देने की जागरुकता लोगों में विकसित करनी होगी। मेरा कूड़ा, मेरी जिम्मेदारी के बारे में लोगाें को समझाना होगा। डीपीआरओ धनंजय जायसवाल ने बताया कि स्वच्छ भारत मिशन फेस-2 का मकसद वर्ष 2024 तक ग्रामों में अपशिष्ट प्रबंधन की गतिविधियों को बढ़ावा देकर पर्यावरणीय स्वच्छता प्रदान करना है, ताकि ग्रामीण आबादी का जीवन स्तर बेहतर हो सके। गांवों को ओडीएफ बनाने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। 40 टीमों का गठन कर पांच-पांच गांव आवंटित किए जाएंगे।
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कार्यशाला में ब्लैक वाटर, ग्रे वाटर, बायोडिग्रेडेबल, नॉन बायोडिग्रेडेबल वेस्ट मैनेजमेंट, लीच पिट, सोक पिट, मैजिक पिट के बारे में बताया गया।
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बुधवार को पंचायत राज विभाग के तत्वावधान में शहर के एक होटल में आयोजित कार्यशाला में डीएम ने निर्देश दिया कि गांवों में नालियां बनाई जाएं और उनके जरिए पानी तालाबों तक ले जाया जाए। इससे गांवों में पानी इधर-उधर एकत्र नहीं होगा। जल से जनित रोग भी नहीं फैलेंगे।
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सीडीओ अंकित खंडेलवाल ने बताया कि कूड़े के निकलने के स्थान से ही गीले और सूखे कूड़े को अलग कर देने की जागरुकता लोगों में विकसित करनी होगी। मेरा कूड़ा, मेरी जिम्मेदारी के बारे में लोगाें को समझाना होगा। डीपीआरओ धनंजय जायसवाल ने बताया कि स्वच्छ भारत मिशन फेस-2 का मकसद वर्ष 2024 तक ग्रामों में अपशिष्ट प्रबंधन की गतिविधियों को बढ़ावा देकर पर्यावरणीय स्वच्छता प्रदान करना है, ताकि ग्रामीण आबादी का जीवन स्तर बेहतर हो सके। गांवों को ओडीएफ बनाने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। 40 टीमों का गठन कर पांच-पांच गांव आवंटित किए जाएंगे।
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कार्यशाला में ब्लैक वाटर, ग्रे वाटर, बायोडिग्रेडेबल, नॉन बायोडिग्रेडेबल वेस्ट मैनेजमेंट, लीच पिट, सोक पिट, मैजिक पिट के बारे में बताया गया।