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फूटेगा गुबार, सामने है संगठन और ‘सरकार’-Cordination

Wed, 06 Feb 2019 01:56 AM IST
Aligarh Bureau अलीगढ़ ब्यूरो
Updated Wed, 06 Feb 2019 01:56 AM IST
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फूटेगा गुबार, सामने है संगठन और ‘सरकार’-Cordination
अभिषेक शर्मा, अमर उजाला, अलीगढ़।
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लोकसभा चुनाव की घोषणा से ऐन पहले ताला नगरी में बुधवार को भाजपा राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह व प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की मौजूदगी में हो रहा बूथ सम्मेलन स्थानीय भाजपा नेताओं व कार्यकर्ताओं को बहुत उम्मीदें बंधा रहा है।

लंबे समय से हो रही स्वयं की उपेक्षा के साथ ही वह जिले और महानगर की उन समस्याओं को भी दोनों नेताओं के सामने रखने की तैयारी कर रहे हैं, जिनके समाधान का जनता इंतजार कर रही है। क्योंकि चुनाव से पहले इसकी जरूरत भी महसूस हो रही है और यह मौका भी मुफीद है। संगठन और सरकार दोनों से ही यहां मुलाकात जो होने वाली है।
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कुछ महीनों से लगातार एक के बाद एक ऐसी घटनाएं हो रही हैं, जिससे जनता में संदेश जा रहा है कि सत्ताधारी दल के नेताओं की ही उपेक्षा हो रही है। ऐसे में कार्यकर्ता का मनोबल टूटा हुआ है। यही कारण है कि कुछ दिन पहले जब भाजपा के पूर्व प्रदेश मंत्री राजेंद्र वार्ष्णेय चीफ के खिलाफ प्रशासन ने कार्यवाही की और जब वह जेल से छूट कर आए, तो उन्हें प्रशासनिक दमन के प्रतीक के रूप में देखा गया।
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इसके बाद थाना सासनी गेट में संघ के नेताओं के साथ घटना घटित हो गई। इससे पहले इस जिले के सुविख्यात सालाना जलसे नुमाइश के उद्घाटन से सत्ताधारी विधायकों की दूरी जग जाहिर है। इसी बीच कुछ दिन पहले विधायक संजीव राजा ने बयान भी दिया था कि जो कुछ हो रहा है उसे उचित समय पर, उचित मंच पर उचित तर्कों के रखा जाएगा। अगर स्थितियों का विश्लेषण करें तो समझ सकते हैं कि वह उचित समय अब यही है।


इसके अलावा जिले और शहर की वह समस्याएं जिनके हल की जनता अपेक्षा करती है, उनका मुद्दा भी रखा जाए, जिससे सरकार की जनता के बीच में साख बने।

यह रखे जा सकते हैं मुद्दे
- दावा किया जा रहा है कि शहर और गांव में बड़े हिस्से को ओडीएफ (खुले में शौच से मुक्त) किया जा चुका है। लेकिन हकीकत कुछ और है।
- दावा है कि आवारा गायों के लिए पर्याप्त गोशालाएं तैयार कर ली गई हैं। लेकिन हकीकत यह है कि गोशालाएं कहीं वीरान तो कहीं ओवरलोडेड हैं। यहां चारा तक नहीं है।

- स्थिति यह हो जाती है कि सरकारी अस्पतालों में कुत्ता काटने के बाद लगाए जाने वाले एंटी रैबीज इंजेक्शन महीनों तक उपलब्ध नहीं होते।
- स्मार्ट सिटी बनाने के लिए तोड़फोड़ की गई है लेकिन कहीं कहीं मानक ही बदल गए हैं। निर्माण भी बेहद धीमा है। शहर बमबारी का शिकार लगता है।
- कूड़े के निस्तारण की समस्या का प्रभावी समाधान नहीं हो पाया है। अंडर ग्राउंड कूड़ेदान फेल साबित हुए हैं।
- दीन दयाल उपाध्याय ग्राम ज्योति योजना के तहत बिजली कनेक्शन नि:शुल्क देने का प्रावधान किया है। लेकिन बिना हित साधे कनेक्शन नहीं और बिल भी मनमाना। इससे जनता में अलोकप्रियता।
- शासन की योजनाओं का जमीनी स्तर पर प्रभावी क्रियान्वयन नहीं होने से उसका पूरा लाभ जनता को नहीं मिल पाना।
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