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स्मार्ट सिटी पर उठे सवाल, सफाई कर्मियों में भी उबाल
Updated Mon, 25 Jun 2018 01:44 AM IST
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न्यूज डेस्क, अमर उजाला, अलीगढ़।
स्मार्ट सिटी को लेकर आ रही रैंकिंग और दावों पर एक ओर जहां शहर के लोग और संस्थाएं सवाल उठा रही हैं तो वहीं सफाई कर्मचारी नेताओं ने भी इसमें श्रेय न मिलने पर कड़ा आक्रोश व्यक्त किया है।
उद्योग व्यापार संगठन के प्रदेश युवा अध्यक्ष अनुराग गुप्ता ने कहा कि स्मार्ट सिटी के खोखले आंकड़ों के देखते हुए निर्णय लिया गया है कि सड़कों पर फैलाई जा रही सिल्ट को ध्यान में रखते हुए नगर निगम द्वारा एनजीटी की अवमानना किए जाने पर अब अदालत का दरवाजा दोबारा से खटखटाया जाएगा।
उन्होंने कहा कि नगर आयुक्त के पदभार ग्रहण करते ही एनजीटी (नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल) के आदेश की प्रतिलिपि व उनके द्वारा वहां दिए गए शपथ पत्र की प्रतिलिपि उपलब्ध करा दी थी। लेकिन आज भी लगातार सिल्ट सड़क पर फैलाई जा रही है । एक तरफ नगर आयुक्त स्मार्ट सिटी रैकिंग के नाम पर सरकार से प्रशस्तिपत्र लेकर आ रहे हैं दूसरी तरफ अलीगढ़ की जनता नाले से निकली जा सिल्ट से परेशान है। संगठन ने निर्णय लिया है कि 10 जुलाई को एनजीटी में अवमानना किए जाने की याचिका दी जाएगी।
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दूसरी ओर स्मार्ट सिटी की रैंकिंग में सफाई कर्मचारियों को श्रेय नहीं मिलने पर नगर सफाई मजदूर संघ के पूर्व अध्यक्ष प्रदीप भंडारी और सफाई कर्मचारी नेता आनंद शास्त्री ने रोष व्यक्त किया है। प्रदीप भंडारी ने कहा है कि पूर्व नगर आयुक्त संतोष कुमार शर्मा और वर्तमान नगर आयुक्त सत्य प्रकाश पटेल को जो सम्मान भारत के प्रधानमंत्री ने दिया है, उसमें सफाई कर्मचारियों का भी बड़ा योगदान है। लेकिन फिर भी दुर्भाग्य है कि सफाई कर्मचारियों की पीठ थपथपाने के बजाय अधिकारी उनको ही हड़का रहे हैं।
यह स्थिति इसलिए पैदा हुई है क्योंकि सफाई कर्मचारियों का प्रतिनिधित्व करने वाला मौजूदा नेतृत्व मौन है। नहीं तो इस दोपहरी में या हाड़ कंपकपाती ठंड में वर्षों से मेहनत कर अलीगढ़ को देश में 12 वां स्थान और प्रदेश में दूसरा स्थान दिलाने बाले सफाई कर्मचारियों पर कोई अधिकारी इस तरह उंगली नही उठाता। उन्होंने कहा कि क्या बड़े अधिकारियों को मालूम है कि संविदा पर या ठेके पर काम करने वाले सफाई कर्मचारियों को वेतन कौन सी तारीख को मिलता है। वेतन मिला भी है या नहीं मिला है।
सफाई कर्मचारियों पर रौब झाड़ने वाले कुछ पार्षद, अधिकारी या जनप्रतिनिधि इनको समय से वेतन दिलवाए जाने की क्यों नहीं सोचते हैं। सफाई कर्मचारियों की मेहनत के दम पर स्मार्ट सिटी का दर्जा मिलने के बाद भी उन्हें इस उपलब्धि में हिस्सा नहीं मिला है। सफाई कर्मचारी इस बात को भूलेंगे नहीं।
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स्मार्ट सिटी को लेकर आ रही रैंकिंग और दावों पर एक ओर जहां शहर के लोग और संस्थाएं सवाल उठा रही हैं तो वहीं सफाई कर्मचारी नेताओं ने भी इसमें श्रेय न मिलने पर कड़ा आक्रोश व्यक्त किया है।
उद्योग व्यापार संगठन के प्रदेश युवा अध्यक्ष अनुराग गुप्ता ने कहा कि स्मार्ट सिटी के खोखले आंकड़ों के देखते हुए निर्णय लिया गया है कि सड़कों पर फैलाई जा रही सिल्ट को ध्यान में रखते हुए नगर निगम द्वारा एनजीटी की अवमानना किए जाने पर अब अदालत का दरवाजा दोबारा से खटखटाया जाएगा।
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उन्होंने कहा कि नगर आयुक्त के पदभार ग्रहण करते ही एनजीटी (नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल) के आदेश की प्रतिलिपि व उनके द्वारा वहां दिए गए शपथ पत्र की प्रतिलिपि उपलब्ध करा दी थी। लेकिन आज भी लगातार सिल्ट सड़क पर फैलाई जा रही है । एक तरफ नगर आयुक्त स्मार्ट सिटी रैकिंग के नाम पर सरकार से प्रशस्तिपत्र लेकर आ रहे हैं दूसरी तरफ अलीगढ़ की जनता नाले से निकली जा सिल्ट से परेशान है। संगठन ने निर्णय लिया है कि 10 जुलाई को एनजीटी में अवमानना किए जाने की याचिका दी जाएगी।
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दूसरी ओर स्मार्ट सिटी की रैंकिंग में सफाई कर्मचारियों को श्रेय नहीं मिलने पर नगर सफाई मजदूर संघ के पूर्व अध्यक्ष प्रदीप भंडारी और सफाई कर्मचारी नेता आनंद शास्त्री ने रोष व्यक्त किया है। प्रदीप भंडारी ने कहा है कि पूर्व नगर आयुक्त संतोष कुमार शर्मा और वर्तमान नगर आयुक्त सत्य प्रकाश पटेल को जो सम्मान भारत के प्रधानमंत्री ने दिया है, उसमें सफाई कर्मचारियों का भी बड़ा योगदान है। लेकिन फिर भी दुर्भाग्य है कि सफाई कर्मचारियों की पीठ थपथपाने के बजाय अधिकारी उनको ही हड़का रहे हैं।
यह स्थिति इसलिए पैदा हुई है क्योंकि सफाई कर्मचारियों का प्रतिनिधित्व करने वाला मौजूदा नेतृत्व मौन है। नहीं तो इस दोपहरी में या हाड़ कंपकपाती ठंड में वर्षों से मेहनत कर अलीगढ़ को देश में 12 वां स्थान और प्रदेश में दूसरा स्थान दिलाने बाले सफाई कर्मचारियों पर कोई अधिकारी इस तरह उंगली नही उठाता। उन्होंने कहा कि क्या बड़े अधिकारियों को मालूम है कि संविदा पर या ठेके पर काम करने वाले सफाई कर्मचारियों को वेतन कौन सी तारीख को मिलता है। वेतन मिला भी है या नहीं मिला है।
सफाई कर्मचारियों पर रौब झाड़ने वाले कुछ पार्षद, अधिकारी या जनप्रतिनिधि इनको समय से वेतन दिलवाए जाने की क्यों नहीं सोचते हैं। सफाई कर्मचारियों की मेहनत के दम पर स्मार्ट सिटी का दर्जा मिलने के बाद भी उन्हें इस उपलब्धि में हिस्सा नहीं मिला है। सफाई कर्मचारी इस बात को भूलेंगे नहीं।