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अलीगढ़... उपभोक्ताओं को पता नहीं, हर माह उठ रहा उसके नाम से राशन
Updated Tue, 08 May 2018 02:52 AM IST
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न्यूज डेस्क, अमर उजाला, अलीगढ़।
उपभोक्ता को पता नहीं और हर माह उसके नाम से हो रहा है राशन का उठान। इधर बेचारा उपभोक्ता या तो पूर्ति विभाग के दफ्तरों के चक्कर लगा रहा है, दलाल की चौखट पर दस्तक दे रहा है या फिर कार्ड न बनने की निराशा में हाथ झाड़कर घर बैठ गया है। इसके लिए जिम्मेदार है प्राक्सी सिस्टम। मूलत: ई पाश मशीनों की तकनीकी खामी से उपभोक्ताओं को बचाने और शत प्रतिशत वितरण सुनिश्चित करने के लिए लागू हुआ यह नियम, कालाबाजारी में लिप्त राशन डीलरों का लूट खसोट का हथियार बन गया है। इसका खुलासा हुआ प्राक्सी के टाप ट्रेन राशन डीलरों की इन दिनों चल रही जांच में।
यह है मामला
प्राक्सी सिस्टम उन उपभोक्ताओं के लिए शुरू हुआ था, जिन लोगों को ई पाश मशीन की तकनीकी गड़बड़ मसलन वह किसी उपभोक्ता का अंगूठे का निशान मान्य नहीं कर रही है, या फिर तकनीकी समस्या के चलते काम ही नहीं कर रही है, उन्हें राशन वितरण सुनिश्चित करना। इसके लिए हर माह 25 से 30 तारीख तक इस व्यवस्था के तहत राशन दिये जाने की व्यवस्था है, लेकिन डीलर उपभोक्ताओं की अज्ञानता का फायदा उठाकर इस सिस्टम के माध्यम से न केवल उनके नाम से राशन उठा रहे हैं, बल्कि इसे हर माह खुर्द बुर्द भी कर रहे हैं। बताते चलें कि शहरी क्षेत्र की 271 राशन की दुकानों पर करीब 1.48 लाख उपभोक्ता हैं। इनमें से करीब सात आठ हजार उपभोक्ताओं का राशन प्राक्सी सिस्टम से निकल रहा है।
हैरानी की बात खुद ऑनलाइन आवेदन किया और भूल गए
हैरानी की बात यह है कि प्राक्सी के माध्यम से छले जा रहे उपभोक्ताओं में से ज्यादातर संख्या उन लोगों की है जिन लोगों ने कामन सर्विस सेंटरों अथवा स्वयं के संसाधनों से राशन कार्ड के लिए खुद आवेदन किया। लापरवाही का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि आवेदन करने के बाद उन्होंने जन सुविधा केंद्र पर यह तक पता करने की कोशिश नहीं की कि राशन कार्ड बना है अथवा नहीं। कई अज्ञानता वश दलालों के पास जाते रहे और फिर थक हार कर घर बैठ गए।
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प्राक्सी के सत्यापन में सामने आ रहा है कि कार्डों का दुरुपयोग कर कुछ डीलर उपभोक्ताओं का राशन खुर्द बुर्द कर रहे हैं, लेकिन ज्यादातर मामलों में पाया गया है कि कई उपभोक्ता अज्ञानतावश अथवा लापरवाही के कारण आवेदन करके अपना कार्ड तक लेना भूल गए हैं। सत्यापन अभी चल रहा है। पूरा होने के बाद कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी। - नीरज सिंह, जिला पूर्ति अधिकारी।
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उपभोक्ता को पता नहीं और हर माह उसके नाम से हो रहा है राशन का उठान। इधर बेचारा उपभोक्ता या तो पूर्ति विभाग के दफ्तरों के चक्कर लगा रहा है, दलाल की चौखट पर दस्तक दे रहा है या फिर कार्ड न बनने की निराशा में हाथ झाड़कर घर बैठ गया है। इसके लिए जिम्मेदार है प्राक्सी सिस्टम। मूलत: ई पाश मशीनों की तकनीकी खामी से उपभोक्ताओं को बचाने और शत प्रतिशत वितरण सुनिश्चित करने के लिए लागू हुआ यह नियम, कालाबाजारी में लिप्त राशन डीलरों का लूट खसोट का हथियार बन गया है। इसका खुलासा हुआ प्राक्सी के टाप ट्रेन राशन डीलरों की इन दिनों चल रही जांच में।
यह है मामला
प्राक्सी सिस्टम उन उपभोक्ताओं के लिए शुरू हुआ था, जिन लोगों को ई पाश मशीन की तकनीकी गड़बड़ मसलन वह किसी उपभोक्ता का अंगूठे का निशान मान्य नहीं कर रही है, या फिर तकनीकी समस्या के चलते काम ही नहीं कर रही है, उन्हें राशन वितरण सुनिश्चित करना। इसके लिए हर माह 25 से 30 तारीख तक इस व्यवस्था के तहत राशन दिये जाने की व्यवस्था है, लेकिन डीलर उपभोक्ताओं की अज्ञानता का फायदा उठाकर इस सिस्टम के माध्यम से न केवल उनके नाम से राशन उठा रहे हैं, बल्कि इसे हर माह खुर्द बुर्द भी कर रहे हैं। बताते चलें कि शहरी क्षेत्र की 271 राशन की दुकानों पर करीब 1.48 लाख उपभोक्ता हैं। इनमें से करीब सात आठ हजार उपभोक्ताओं का राशन प्राक्सी सिस्टम से निकल रहा है।
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हैरानी की बात खुद ऑनलाइन आवेदन किया और भूल गए
हैरानी की बात यह है कि प्राक्सी के माध्यम से छले जा रहे उपभोक्ताओं में से ज्यादातर संख्या उन लोगों की है जिन लोगों ने कामन सर्विस सेंटरों अथवा स्वयं के संसाधनों से राशन कार्ड के लिए खुद आवेदन किया। लापरवाही का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि आवेदन करने के बाद उन्होंने जन सुविधा केंद्र पर यह तक पता करने की कोशिश नहीं की कि राशन कार्ड बना है अथवा नहीं। कई अज्ञानता वश दलालों के पास जाते रहे और फिर थक हार कर घर बैठ गए।
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प्राक्सी के सत्यापन में सामने आ रहा है कि कार्डों का दुरुपयोग कर कुछ डीलर उपभोक्ताओं का राशन खुर्द बुर्द कर रहे हैं, लेकिन ज्यादातर मामलों में पाया गया है कि कई उपभोक्ता अज्ञानतावश अथवा लापरवाही के कारण आवेदन करके अपना कार्ड तक लेना भूल गए हैं। सत्यापन अभी चल रहा है। पूरा होने के बाद कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी। - नीरज सिंह, जिला पूर्ति अधिकारी।