{"_id":"5999e9b74f1c1beb258b47c6","slug":"21503259063-aligarh-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"ऐसा लगा कि मां की गोद में आ गया","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
ऐसा लगा कि मां की गोद में आ गया
Updated Mon, 21 Aug 2017 01:27 AM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
ऐसा लगा कि मां की गोद में आ गया
ब्यूरो, अमर उजाला अलीगढ़।
अलीगढ़। ‘दिल्ली एयरपोर्ट पर अपने वतन की हवा जब जिस्म से टकराईं, तब दिल और दिमाग को सुकून पहुंचा। ऐसा लगा कि वह मां की गोद में आ गए हों’। ये कहना है दुर्गेश का, जो सऊदी अरब में फंसे थे। अलीगढ़ पहुंचते ही मददगार रूपेश पाठक के घर पहुंचे, जिनकी वतन वापसी कराने में अहम भूमिका रही। उनकी मां के पैर छूकर आशीर्वाद लिया और धन्यवाद दिया।
रविवार को दिल्ली से अलीगढ़ पहुंचे दुर्गेश सबसे पहले सऊदी अरब से भारत भिजवाने में अहम भूमिका निभाने वाले रूपेश पाठक के सेंटर प्वाइंट स्थित घर पहुंचे। यहां उनकी मां के पैर छूकर आशीर्वाद लिया। एवज में मां ने टीका करके शगुन में 501 रुपये भी दिए। अमर उजाला से बातचीत करते हुए दुर्गेश ने कहा कि वे वतन की मिट्टी को नमन करते हैं। किसी को भी सऊदी अरब न जाने की नसीहत भी देते हैं। उन्होंने कहा कि गुजरे छह महीने उन्हें डराते हैं।
भला हो, बनारस के महताब का, जिन्होंने तीन महीने अपने पास रखा। महताब ने उन्हें बनारस आने की दावत भी दी। इसलिए मैं उनसे मिलने जरूर जाऊंगा। अपने देश जैसी कोई जगह नहीं है। इस गुलशन में तरह-तरह के फूल खिले हैं। कहा कि उनकी वतन वापसी का श्रेय अमर उजाला, राहुल, सौरभ और रूपेश पाठक को जाता है, जिनकी मदद से आज वह अपने माता-पिता के साथ हैं। उन्होंने भारतीय दूतावास के क्रियाकलाप पर भी सवाल खड़े किए हैं। उन्होंने कहा कि अरब क्या अब देश से बाहर कहीं भी नहीं जाएंगे। छह महीने उसने घुट-घुट कर काटे हैं। स्वदेश लौटे भाई को देख बहनों की आंखें खुशी से नम हो गईं। वह अपनी बीमार मां को भी अस्पताल देखने पहुंचे।
विज्ञापन
विज्ञापन
ब्यूरो, अमर उजाला अलीगढ़।
अलीगढ़। ‘दिल्ली एयरपोर्ट पर अपने वतन की हवा जब जिस्म से टकराईं, तब दिल और दिमाग को सुकून पहुंचा। ऐसा लगा कि वह मां की गोद में आ गए हों’। ये कहना है दुर्गेश का, जो सऊदी अरब में फंसे थे। अलीगढ़ पहुंचते ही मददगार रूपेश पाठक के घर पहुंचे, जिनकी वतन वापसी कराने में अहम भूमिका रही। उनकी मां के पैर छूकर आशीर्वाद लिया और धन्यवाद दिया।
रविवार को दिल्ली से अलीगढ़ पहुंचे दुर्गेश सबसे पहले सऊदी अरब से भारत भिजवाने में अहम भूमिका निभाने वाले रूपेश पाठक के सेंटर प्वाइंट स्थित घर पहुंचे। यहां उनकी मां के पैर छूकर आशीर्वाद लिया। एवज में मां ने टीका करके शगुन में 501 रुपये भी दिए। अमर उजाला से बातचीत करते हुए दुर्गेश ने कहा कि वे वतन की मिट्टी को नमन करते हैं। किसी को भी सऊदी अरब न जाने की नसीहत भी देते हैं। उन्होंने कहा कि गुजरे छह महीने उन्हें डराते हैं।
विज्ञापन
भला हो, बनारस के महताब का, जिन्होंने तीन महीने अपने पास रखा। महताब ने उन्हें बनारस आने की दावत भी दी। इसलिए मैं उनसे मिलने जरूर जाऊंगा। अपने देश जैसी कोई जगह नहीं है। इस गुलशन में तरह-तरह के फूल खिले हैं। कहा कि उनकी वतन वापसी का श्रेय अमर उजाला, राहुल, सौरभ और रूपेश पाठक को जाता है, जिनकी मदद से आज वह अपने माता-पिता के साथ हैं। उन्होंने भारतीय दूतावास के क्रियाकलाप पर भी सवाल खड़े किए हैं। उन्होंने कहा कि अरब क्या अब देश से बाहर कहीं भी नहीं जाएंगे। छह महीने उसने घुट-घुट कर काटे हैं। स्वदेश लौटे भाई को देख बहनों की आंखें खुशी से नम हो गईं। वह अपनी बीमार मां को भी अस्पताल देखने पहुंचे।
विज्ञापन