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धनीपुर हवाई पट्टी
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आशीष श्रीवास्तव, अमर उजाला, अलीगढ़।
मिनी एयरपोर्ट में तब्दील होने जा रही धनीपुर हवाई पट्टी के विस्तारीकरण के लिए अधिग्रहीत की गई भूमि पर हदबंदी के लिए बाउंड्रीवाल एवं टावरों का निर्माण चल रहा है। अधिग्रहीत की गई भूमि के समतलीकरण का काम भी साथ साथ चल रहा है। लेकिन रनवे का काम अब तक शुरू नहीं किया गया है।
दरअसल हवाई पट्टी की मिट्टी का अब तक परीक्षण नहीं हो सका है। नागरिक उड्डयन मंत्रालय ने प्लानिंग टीम ने परीक्षण की जिम्मेदारी आईटीआई बनारस एवं एएमयू की लैब को दी है। इनकी रिपोर्ट के आधार पर ही रनवे का निर्माण शुरू हो सकेगा।
क्यों जरूरी है स्वाइल परीक्षण
धनीपुर हवाई पट्टी पर तैनात टैकभनीशियन शिशिर श्रीवास्तव ने बताया कि नेशनल हाइवे अथारिटी नए एयरपोर्ट और उसके रनवे के निर्माण से पूर्व मिट्टी का परीक्षण कराती है। देखा जाता है कि कही मिट्टी रेतीली अथवा भुरभुरी तो नहीं है। इसकी संघटन क्षमता कितनी है। यानि कि जमती है या नहीं।
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इसके लिए विभागीय टीम करीब पांच-छह फुट गहराई में मिट्टी खोदती है। इसके बाद इसका परीक्षण होता है। परीक्षण के बाद यह सुनिश्चित किया जाता है कि यह मिट्टी एयरक्राफ्ट का वजन झेलने में सक्षम है अथवा नहीं।
करीब 10890 किलो का होता है एयरक्राफ्ट
सामान्य हवाई जहाज के यूं तो केटेगरी के हिसाब से वजन होते हैं। लेकिन धनीपुर मिनी एयरपोर्ट से शुरू होने जा रही लखनऊ-अलीगढ़ सेवा के लिए 24 सीटर जेट स्ट्रीम एयरक्राफ्ट को संचालित करने की बात कही जा रही है। इसका वजन करीब 10890 किलोग्राम होता है। बताते चलें अब तक हवाई पट्टी पर 5700 किलोग्राम तक के हल्के विमान एवं हैलीकाप्टर ही उतर सकते थे।
चार तरह से पड़ता है रनवे पर वजन
रनवे पर एयरक्राफ्ट का वजन चार तरीके से पड़ता है। जेट स्ट्रीम एयरक्राफ्ट के मामले में देखें तो इसका मैक्सिमम टेक आफ वेट करीब 10890 किलोग्राम होता है।
लैंड होने के बाद इसका वजन 10570 किलोग्राम रह जाता है। जबकि टेक आफ रन के समय एयरक्राफ्ट का वजन 1493 किलोग्राम रह जाता है। जब विमान रनवे को छूता है तब उसका वजन 826 किलोग्राम होता है।
- नेशनल हाइवे अथारिटी की टीम रनवे निर्माण के लिए मिट्टी का परीक्षण करा रही है। इसकी जिम्मेदारी आईआईटी बनारस एवं एएमयू लैब को दी गई है। इनकी रिपोर्ट के आधार पर ही रनवे का निर्माण होगा।
एसएस अग्रवाल, वैमानिक अधिकारी
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मिनी एयरपोर्ट में तब्दील होने जा रही धनीपुर हवाई पट्टी के विस्तारीकरण के लिए अधिग्रहीत की गई भूमि पर हदबंदी के लिए बाउंड्रीवाल एवं टावरों का निर्माण चल रहा है। अधिग्रहीत की गई भूमि के समतलीकरण का काम भी साथ साथ चल रहा है। लेकिन रनवे का काम अब तक शुरू नहीं किया गया है।
दरअसल हवाई पट्टी की मिट्टी का अब तक परीक्षण नहीं हो सका है। नागरिक उड्डयन मंत्रालय ने प्लानिंग टीम ने परीक्षण की जिम्मेदारी आईटीआई बनारस एवं एएमयू की लैब को दी है। इनकी रिपोर्ट के आधार पर ही रनवे का निर्माण शुरू हो सकेगा।
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क्यों जरूरी है स्वाइल परीक्षण
धनीपुर हवाई पट्टी पर तैनात टैकभनीशियन शिशिर श्रीवास्तव ने बताया कि नेशनल हाइवे अथारिटी नए एयरपोर्ट और उसके रनवे के निर्माण से पूर्व मिट्टी का परीक्षण कराती है। देखा जाता है कि कही मिट्टी रेतीली अथवा भुरभुरी तो नहीं है। इसकी संघटन क्षमता कितनी है। यानि कि जमती है या नहीं।
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इसके लिए विभागीय टीम करीब पांच-छह फुट गहराई में मिट्टी खोदती है। इसके बाद इसका परीक्षण होता है। परीक्षण के बाद यह सुनिश्चित किया जाता है कि यह मिट्टी एयरक्राफ्ट का वजन झेलने में सक्षम है अथवा नहीं।
करीब 10890 किलो का होता है एयरक्राफ्ट
सामान्य हवाई जहाज के यूं तो केटेगरी के हिसाब से वजन होते हैं। लेकिन धनीपुर मिनी एयरपोर्ट से शुरू होने जा रही लखनऊ-अलीगढ़ सेवा के लिए 24 सीटर जेट स्ट्रीम एयरक्राफ्ट को संचालित करने की बात कही जा रही है। इसका वजन करीब 10890 किलोग्राम होता है। बताते चलें अब तक हवाई पट्टी पर 5700 किलोग्राम तक के हल्के विमान एवं हैलीकाप्टर ही उतर सकते थे।
चार तरह से पड़ता है रनवे पर वजन
रनवे पर एयरक्राफ्ट का वजन चार तरीके से पड़ता है। जेट स्ट्रीम एयरक्राफ्ट के मामले में देखें तो इसका मैक्सिमम टेक आफ वेट करीब 10890 किलोग्राम होता है।
लैंड होने के बाद इसका वजन 10570 किलोग्राम रह जाता है। जबकि टेक आफ रन के समय एयरक्राफ्ट का वजन 1493 किलोग्राम रह जाता है। जब विमान रनवे को छूता है तब उसका वजन 826 किलोग्राम होता है।
- नेशनल हाइवे अथारिटी की टीम रनवे निर्माण के लिए मिट्टी का परीक्षण करा रही है। इसकी जिम्मेदारी आईआईटी बनारस एवं एएमयू लैब को दी गई है। इनकी रिपोर्ट के आधार पर ही रनवे का निर्माण होगा।
एसएस अग्रवाल, वैमानिक अधिकारी