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अलीगढ़ में भूलने की बीमारी के शिकार वृद्धों की मदद का आह्वान
Updated Thu, 21 Sep 2017 02:27 AM IST
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भूलने की बीमारी के शिकार बुजुर्गों की करें मदद
ब्यूरो, अमर उजाला, अलीगढ़।
एएमयू के जेएन मेडिकल कॉलेज के मानसिक रोग विभाग के अध्यक्ष प्रो. एसए आजमी ने कहा कि बुजुर्गों में अल्जाइमर्स डिमेंशिया अशक्त बनाने के अग्रणी कारणों में से एक है। सन 2050 तक विश्व की लगभग 80 प्रतिशत आबादी विकास शील देशों में निवास करेगी। ऐसे में सरकारी एवं गैर सरकारी क्षेत्रों से जागरूकता अभियान में तेजी लाने की आवश्यकता है।
विश्व अल्जायमर्स दिवस पर प्रो. आजमी ने कहा कि अल्जायमर्स रोग एक प्रकार का डिमेंशिया (मनोभ्रंश) रोग है। सरल भाषा में यह कहा जाता है कि यह भूलने वाली बीमारी है। धीरे धीरे यह इतना बढ़ जाता है कि रोगी अपने दिन प्रति दिन के क्रिया कलापों को भी नहीं कर पाता है।
प्रो. आजमी ने कहा कि 60 वर्ष उम्र के लोगों में यह 0.5 से 0.7 प्रतिशत के हिसाब से व्याप्त है तथा प्रत्येक पांच वर्ष उम्र बढ़ने पर इसकी व्यापकता दोगुने के हिसाब से बढ़ती जाती है। प्रो. आजमी ने कहा कि जहां तक इसके इलाज का सवाल है तो औषधियों के साथ-साथ गैर औषधिक विधि का इलाज प्रयोग में लाया जाता है।
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गैर औषधि बातें जैसे रोगी को डांटना मारना नहीं चाहिए। अमर्यादित टिप्पणी बिल्कुल नहीं करनी चाहिए, बल्कि आदर के साथ ऐसे रोगियों का इलाज एवं देख भाल करनी चाहिए। उन्होंने कहा कि अल्जायमर्स दिवस की सार्थकता इसमें है कि लोग ऐसे रोगियों की स्वयं मदद करें और दूसरे को भी इसके लिए प्रेरित करें।
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ब्यूरो, अमर उजाला, अलीगढ़।
एएमयू के जेएन मेडिकल कॉलेज के मानसिक रोग विभाग के अध्यक्ष प्रो. एसए आजमी ने कहा कि बुजुर्गों में अल्जाइमर्स डिमेंशिया अशक्त बनाने के अग्रणी कारणों में से एक है। सन 2050 तक विश्व की लगभग 80 प्रतिशत आबादी विकास शील देशों में निवास करेगी। ऐसे में सरकारी एवं गैर सरकारी क्षेत्रों से जागरूकता अभियान में तेजी लाने की आवश्यकता है।
विश्व अल्जायमर्स दिवस पर प्रो. आजमी ने कहा कि अल्जायमर्स रोग एक प्रकार का डिमेंशिया (मनोभ्रंश) रोग है। सरल भाषा में यह कहा जाता है कि यह भूलने वाली बीमारी है। धीरे धीरे यह इतना बढ़ जाता है कि रोगी अपने दिन प्रति दिन के क्रिया कलापों को भी नहीं कर पाता है।
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प्रो. आजमी ने कहा कि 60 वर्ष उम्र के लोगों में यह 0.5 से 0.7 प्रतिशत के हिसाब से व्याप्त है तथा प्रत्येक पांच वर्ष उम्र बढ़ने पर इसकी व्यापकता दोगुने के हिसाब से बढ़ती जाती है। प्रो. आजमी ने कहा कि जहां तक इसके इलाज का सवाल है तो औषधियों के साथ-साथ गैर औषधिक विधि का इलाज प्रयोग में लाया जाता है।
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गैर औषधि बातें जैसे रोगी को डांटना मारना नहीं चाहिए। अमर्यादित टिप्पणी बिल्कुल नहीं करनी चाहिए, बल्कि आदर के साथ ऐसे रोगियों का इलाज एवं देख भाल करनी चाहिए। उन्होंने कहा कि अल्जायमर्स दिवस की सार्थकता इसमें है कि लोग ऐसे रोगियों की स्वयं मदद करें और दूसरे को भी इसके लिए प्रेरित करें।