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Aligarh News: नियमों के फेर में अटका 200 करोड़ का निवेश
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यूपी को गारमेंट्स और टेक्सटाइल का गढ़ बनाने के दावों के बीच देश की जानी-मानी कंपनियां अलीगढ़ या मंडल में 200 करोड़ का निवेश करने की तैयारी में है, लेकिन यह मेगा प्रोजेक्ट धरातल पर उतरेगा या नहीं, इस पर अभी संशय बना हुआ है। कंपनी ने साफ कह दिया है कि अगर सरकार ने उनके कुछ बुनियादी सवालों और शर्तों पर लिखित गारंटी नहीं दी, तो वे इस निवेश से कदम पीछे खींच सकते हैं।
कंपनियों के प्रबंधन ने यूपी के हथकरघा एवं वस्त्रोद्योग विभाग के कमिश्नर को एक पत्र लिखकर नीतिगत नियमों (टेक्सटाइल नीति-2022) पर स्पष्टीकरण मांगा है। यूपी सरकार की नीति के तहत 200 करोड़ रुपये तक के निवेश पर भारी पूंजीगत सब्सिडी मिलती है, लेकिन इसके लिए एक शर्त है कि कम से कम 500 लोगों को रोजगार देना होगा। कंपनी इसी 500 की संख्या को लेकर उलझन में है।
कंपनियों का कहना है कि आधुनिक दौर में कोई भी बड़ी इंडस्ट्री पूरी तरह सीधे पेरोल पर काम नहीं करती। कंपनी ने पूछा है कि क्या थर्ड-पार्टी कांट्रैक्टर या एजेंसी के जरिये रखे गए कर्मचारी भी इस 500 की गिनती में शामिल होंगे? कंपनी ने इसे अपना सबसे नाजुक बिंदु बताया है।
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कंपनी का कहना है कि हाईटेक प्लांट को चलाने के लिए शुरुआत में बाहर के राज्यों से अनुभवी इंजीनियर और ऑपरेटर लाने ही होंगे। क्या सरकार उन्हें इस 500 की गिनती में जगह देगी या सिर्फ यूपी के मूल निवासियों को ही गिना जाएगा।
कंपनी की मांग है कि फैक्टरी शुरू होते ही तुरंत 500 लोग भर्ती करना नामुमकिन है। ट्रेनिंग और भर्ती के लिए उन्हें 12 से 18 महीने की मोहलत दी जाए।
डूब सकता है एक बड़ा मौका :
यह सिर्फ एक फैक्टरी का मामला नहीं है। कंपनी जो प्लांट लगाने जा रही है, वह एक फीडर उद्योग होगा, जो अन्य कपड़ा फैक्टरियों को कच्चा माल और कपड़ा सप्लाई करेगा। कंपनी का दावा है कि उनका यह प्लांट यूपी में एक उत्प्रेरक का काम करेगा, जिसे देखकर देश-विदेश की कई अन्य गारमेंट्स इकाइयां भी यूपी की तरफ आकर्षित होंगी और हजारों नए रोजगार पैदा होंगे।
कंपनी कुछ प्रावधानों में रियायत मांग रही है। एमओयू के समय ही इन पर विचार होता है। यह शासन स्तर का मामला है, वहीं से कंपनी प्रबंधन को राहत मिल सकती है। इनवेस्ट यूपी के तहत उद्यमी प्रदेश में निवेश के लिए आ रहे हैं इसी क्रम में टेक्सटाइल कंपनी भी आई है।
- एसपी यादव, महाप्रबंधक, जिला उद्योग केंद्र
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कंपनियों के प्रबंधन ने यूपी के हथकरघा एवं वस्त्रोद्योग विभाग के कमिश्नर को एक पत्र लिखकर नीतिगत नियमों (टेक्सटाइल नीति-2022) पर स्पष्टीकरण मांगा है। यूपी सरकार की नीति के तहत 200 करोड़ रुपये तक के निवेश पर भारी पूंजीगत सब्सिडी मिलती है, लेकिन इसके लिए एक शर्त है कि कम से कम 500 लोगों को रोजगार देना होगा। कंपनी इसी 500 की संख्या को लेकर उलझन में है।
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कंपनियों का कहना है कि आधुनिक दौर में कोई भी बड़ी इंडस्ट्री पूरी तरह सीधे पेरोल पर काम नहीं करती। कंपनी ने पूछा है कि क्या थर्ड-पार्टी कांट्रैक्टर या एजेंसी के जरिये रखे गए कर्मचारी भी इस 500 की गिनती में शामिल होंगे? कंपनी ने इसे अपना सबसे नाजुक बिंदु बताया है।
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कंपनी का कहना है कि हाईटेक प्लांट को चलाने के लिए शुरुआत में बाहर के राज्यों से अनुभवी इंजीनियर और ऑपरेटर लाने ही होंगे। क्या सरकार उन्हें इस 500 की गिनती में जगह देगी या सिर्फ यूपी के मूल निवासियों को ही गिना जाएगा।
कंपनी की मांग है कि फैक्टरी शुरू होते ही तुरंत 500 लोग भर्ती करना नामुमकिन है। ट्रेनिंग और भर्ती के लिए उन्हें 12 से 18 महीने की मोहलत दी जाए।
डूब सकता है एक बड़ा मौका :
यह सिर्फ एक फैक्टरी का मामला नहीं है। कंपनी जो प्लांट लगाने जा रही है, वह एक फीडर उद्योग होगा, जो अन्य कपड़ा फैक्टरियों को कच्चा माल और कपड़ा सप्लाई करेगा। कंपनी का दावा है कि उनका यह प्लांट यूपी में एक उत्प्रेरक का काम करेगा, जिसे देखकर देश-विदेश की कई अन्य गारमेंट्स इकाइयां भी यूपी की तरफ आकर्षित होंगी और हजारों नए रोजगार पैदा होंगे।
कंपनी कुछ प्रावधानों में रियायत मांग रही है। एमओयू के समय ही इन पर विचार होता है। यह शासन स्तर का मामला है, वहीं से कंपनी प्रबंधन को राहत मिल सकती है। इनवेस्ट यूपी के तहत उद्यमी प्रदेश में निवेश के लिए आ रहे हैं इसी क्रम में टेक्सटाइल कंपनी भी आई है।
- एसपी यादव, महाप्रबंधक, जिला उद्योग केंद्र