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ओडीएफ घोषित जिले में 1875 परिवारों को शौचालय की दरकार
Wed, 16 Feb 2022 01:55 AM IST
अलीगढ़ ब्यूरो
अमर उजाला/अलीगढ़
अमर उजाला/अलीगढ़
Published by: अलीगढ़ ब्यूरो
Updated Wed, 16 Feb 2022 01:55 AM IST
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आशीष श्रीवास्तव
ओडीएफ घोषित जिले में नवसृजित 1875 परिवारों को शौचालय की दरकार है। यह आंकड़ा ओडीएफ प्लस योजना में आए आवेदन और सर्वे में सामने आया है, जिसमें से शासन स्तर से 500 नवसृजित परिवारों के लिए व्यक्तिगत शौचालय निर्माण के लिए अनुमोदन हो चुका है। जल्द ही लाभार्थियों के खाते में प्रथम किस्त भेजी जाएगी। शेष के लिए 1375 के लिए विधानसभा चुनाव परिणाम आने के बाद मंजूरी मिलने की उम्मीद है।
स्वच्छ भारत मिशन के पहले चरण में 189753 परिवारों को 1200 रुपये प्रति शौचालय के हिसाब से दो किस्तों में धनराशि आवंटित की गई थी। इस धनराशि से लोगों ने शौचालयों का निर्माण कराया था। इसके बाद ‘कोई भी नहीं छूटा’ योजना में 32911 शौचालयों के निर्माण के लिए धनराशि आवंटित की गई थी। इनके अलावा, 42806 परिवारों को भी शौचालय का लाभ दिलाया गया। द्वितीय चरण में 3176 शौचालय बने। इस तरह वर्ष 2014 से अब तक कुल 278758 व्यक्तिगत शौचालयों का निर्माण कराया जा चुका है। इस पर 33 करोड़ 45 लाख 9 हजार 600 रुपये खर्च हो चुके हैं। इसके बाद ओडीएफ प्लस में 1875 नए परिवारों के आवेदन पहुंचे हैं। जिनमें से 500 को मंजूरी मिली है।
दो अक्तूबर 2018 को ओडीएफ घोषित हुआ था जिला
जिला दो अक्तूबर 2018 को ओडीएफ यानि खुले में शौच से मुक्त जिला घोषित हुआ था। उस समय तक स्वच्छ भारत मिशन में 265473 व्यक्तिगत शौचालयों का निर्माण हो चुका था।
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वर्ष 2019 से शुरू हुए ओडीएफ प्लस अभियान में मात्र एक गांव संतृप्त
वर्ष 2019 में जिले में ओडीएफ प्लस अभियान शुरू हुआ। इसके तहत ओडीएफ स्थायित्व, नवसृजित परिवारों को शौचालय, अक्रियाशील शौचालयों की मरम्मत कर पुन: सुचारू कराने, ठोस व दृव्य अपशिष्ट प्रबंधन जैसे काम होने हैं। जिले में अब तक टप्पल की ग्राम पंचायत भरतपुर को ओडीएफ प्लस घोषित किया जा चुका है। 104 ग्राम पंचायतों में काम चल रहा है।
ओडीएफ प्लस योजना में शासन से नवसृजित परिवारों के लिए 500 व्यक्तिगत शौचालय निर्माण का लक्ष्य मिला था। इसके लिए ओडीएफ क्लीनिक के माध्यम से 1875 आवेदन आए। इनमें से 500 लोगों के शौचालयों का अनुमोदन हो चुका है। लाभार्थियों के खाते में प्रथम किस्त के छह हजार रुपये भेजे जाएंगे। शेष बचे 1375 परिवारों को चुनाव प्रक्रिया व आचार संहिता हटने का इंतजार करना होगा।
- धनंजय जायसवाल, जिला पंचायत राज अधिकारी
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ओडीएफ घोषित जिले में नवसृजित 1875 परिवारों को शौचालय की दरकार है। यह आंकड़ा ओडीएफ प्लस योजना में आए आवेदन और सर्वे में सामने आया है, जिसमें से शासन स्तर से 500 नवसृजित परिवारों के लिए व्यक्तिगत शौचालय निर्माण के लिए अनुमोदन हो चुका है। जल्द ही लाभार्थियों के खाते में प्रथम किस्त भेजी जाएगी। शेष के लिए 1375 के लिए विधानसभा चुनाव परिणाम आने के बाद मंजूरी मिलने की उम्मीद है।
स्वच्छ भारत मिशन के पहले चरण में 189753 परिवारों को 1200 रुपये प्रति शौचालय के हिसाब से दो किस्तों में धनराशि आवंटित की गई थी। इस धनराशि से लोगों ने शौचालयों का निर्माण कराया था। इसके बाद ‘कोई भी नहीं छूटा’ योजना में 32911 शौचालयों के निर्माण के लिए धनराशि आवंटित की गई थी। इनके अलावा, 42806 परिवारों को भी शौचालय का लाभ दिलाया गया। द्वितीय चरण में 3176 शौचालय बने। इस तरह वर्ष 2014 से अब तक कुल 278758 व्यक्तिगत शौचालयों का निर्माण कराया जा चुका है। इस पर 33 करोड़ 45 लाख 9 हजार 600 रुपये खर्च हो चुके हैं। इसके बाद ओडीएफ प्लस में 1875 नए परिवारों के आवेदन पहुंचे हैं। जिनमें से 500 को मंजूरी मिली है।
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दो अक्तूबर 2018 को ओडीएफ घोषित हुआ था जिला
जिला दो अक्तूबर 2018 को ओडीएफ यानि खुले में शौच से मुक्त जिला घोषित हुआ था। उस समय तक स्वच्छ भारत मिशन में 265473 व्यक्तिगत शौचालयों का निर्माण हो चुका था।
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वर्ष 2019 से शुरू हुए ओडीएफ प्लस अभियान में मात्र एक गांव संतृप्त
वर्ष 2019 में जिले में ओडीएफ प्लस अभियान शुरू हुआ। इसके तहत ओडीएफ स्थायित्व, नवसृजित परिवारों को शौचालय, अक्रियाशील शौचालयों की मरम्मत कर पुन: सुचारू कराने, ठोस व दृव्य अपशिष्ट प्रबंधन जैसे काम होने हैं। जिले में अब तक टप्पल की ग्राम पंचायत भरतपुर को ओडीएफ प्लस घोषित किया जा चुका है। 104 ग्राम पंचायतों में काम चल रहा है।
ओडीएफ प्लस योजना में शासन से नवसृजित परिवारों के लिए 500 व्यक्तिगत शौचालय निर्माण का लक्ष्य मिला था। इसके लिए ओडीएफ क्लीनिक के माध्यम से 1875 आवेदन आए। इनमें से 500 लोगों के शौचालयों का अनुमोदन हो चुका है। लाभार्थियों के खाते में प्रथम किस्त के छह हजार रुपये भेजे जाएंगे। शेष बचे 1375 परिवारों को चुनाव प्रक्रिया व आचार संहिता हटने का इंतजार करना होगा।
- धनंजय जायसवाल, जिला पंचायत राज अधिकारी