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तीसरी आंख से परीक्षा केंद्रों पर रखी जाएगी नजर

Thu, 21 Dec 2017 01:53 AM IST
Updated Thu, 21 Dec 2017 01:53 AM IST
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तीसरी आंख से परीक्षा केंद्रों पर रखी जाएगी नजर
तीसरी आंख से परीक्षा केंद्रों पर रखी जाएगी नजर
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ब्यूरो,अमर उजाला, अलीगढ़।

परीक्षा केंद्रों की लिस्ट फाइनल होने के बाद यूपी बोर्ड परीक्षा की तैयारियां भी तेज होे गई हैं। जल्द ही परीक्षा केंद्र प्रभारियों की बैठक बुलाकर उन्हें निर्देशित किया जाएगा। वहीं परीक्षा केंद्रों पर सीधी नजर रखने के लिए इस बार ब्राडबैंड कैमरों का सहारा लिया जाएगा। इसे लेकर भी तैयारी की जा रही है।

जिले में 240 विद्यालयों को परीक्षा केंद्र बनाया गया है। इस बार यहां 1.86 लाख विद्यालय परीक्षा केंद्र बने हैं। लिस्ट परिषद से फाइनल होने के बाद अब तैयारियां और तेज हो गई हैं। केंद्र बने विद्यालयों की सूची अपलोड हो गई है।
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उल्लेखनीय है कि इससे पूर्व यह लिस्ट यहां से जिला परीक्षा समिति ने भेजी थी। इस समिति की संस्तुति के बाद ही परिषद ने इन सभी विद्यालयों को परीक्षा केंद्र बनाने का निर्णय लिया है। डीआईओएस डॉ.धर्मेंद्र शर्मा का कहना है कि अगले एक-दो दिन में परीक्षा केंद्र प्रभारियों की बैठक बुलाकर उन्हें परीक्षा को लेकर आवश्यक निर्देश दिए जाएंगे। इधर, यह योजना भी बनाई जा रही है कि इस बार ब्राडबैंड कैमरे से सभी परीक्षा केंद्रों पर नजर रखी जाए।
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इसके लिए सभी परीक्षा केंद्रों के सीसीटीवी कैमरों को नेट से जोड़ने की तैयारी की जा रही है। इसका कंट्रोल रूम नौरंगीलाल जीआईसी में बनेगा। वहीं से सभी परीक्षा केंद्रों पर नजर रखी जाएगी। विद्यालय के प्रधानाचार्य शीलेंद्र कुमार का कहना है कि कोड तो हर परीक्षा केंद्र का होगा ही। जैसे ही किसी विद्यालय के बारे में शिकायत मिलेगी। वैसे ही, ब्राडबैंड कैमरे से वहां की स्थिति पता कर ली जाएगी और फुटेज सामने आ जाएंगे। उनका कहना है कि इससे नकल रोकने में मदद मिलेगी। हर परीक्षा केंद्र पर सीसीटीवी कैमरे लगाने का आदेश दिया ही जा चुका है।

तो डिबार विद्यालय बन गया है परीक्षा केंद्र?
इस साल यूपी बोर्ड परीक्षा में 50 विद्यालयों को डिबार घोषित किया गया है। कुछ विद्यालयों के प्रधानाचार्य भी गड़बड़ी के आरोप के चलते परीक्षा कार्य से विरत रहेंगे। वहीं, गभाना के एक वित्त पोषित विद्यालय को इस बार परीक्षा कें द्र बना दिया है। यह वर्ष 2015 में पांच साल के लिए डिबार घोषित किया था।

हालांकि डीआईओएस डॉ. धर्मेंद्र शर्मा का कहना है कि यह विद्यालय अब डिबार की लिस्ट में नहीं है। वहीं कुछ ऐसे विद्यालय केंद्र बनाए गए हैं, जोकि मानकों पर खरे नहीं उतर रहे। इन्हें लेकर जो आख्याएं दी गई हैं। वह भी अलग-अलग हैं। किसी में विद्यालयों को संसाधन युक्त दिखाया गया है तो किसी में विद्यालयों को संसाधन विहीन दिखाया गया है। डीआईओएस का कहना है कि शासन की मंशा के अनुरूप ही काम होंगे। परीक्षा नकल विहीन कराई जाएंगी।
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