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अलीगढ़ जंक्शन पर खुलेगा चाइल्ड लाइन का कार्यालय
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अलीगढ़ न्यूज डेस्क, अमर उजाला, अलीगढ़
रेलवे जंक्शन पर अकेले घूमने वाले बच्चों पर अब 24 घंटे चाइल्ड हेल्प लाइन की टीम की निगाह रहेगी। जल्द ही मुख्य प्रवेश द्वार के पास बने टिकट घर के पास उसका कार्यालय बनकर तैयार होने वाला है। स्टेशन अधीक्षक की ओर से इस संबंध में उच्चाधिकारियों को पत्र भेजा गया है।
माना जा रहा है कि एक से डेढ़ सप्ताह में प्रस्ताव को मंजूरी मिल जाएगी। फिलहाल जंक्शन पर लावारिस मिलने वाले बच्चों के संबंध में विवरण जुटाने के लिए रजिस्टर तैयार कर लिया गया है। इसमें एक दर्जन से अधिक प्वाइंट हैं। इन सभी प्वाइंटों पर लावारिस हालत में मिलने वाले बच्चों से पूछताछ कर उनके घर-परिजनों का पता लगाया जाएगा।
जंक्शन के प्लेटफार्म पर आए दिन जीआरपी और आरपीएफ के सामने लावारिस बच्चों के मिलने के मामले सामने आते हैं। बच्चों के मिलने के बाद सबसे बड़ी समस्या पूछताछ के बाद उन्हें रखने के लिए स्थान की होती है। बच्चे पुलिस को देखकर डरे नहीं इसलिए उन्हें थाने पर नहीं रखा जाता।
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बच्चों को उड़ान सोसाइटी के अधीन कर दिया जाता है। मगर, इस प्रक्रिया में काफी समय लगने से जीआरपी और आरपीएफ का अधिक समय खराब होता है। इससे निजात पाने के लिए स्टेशन अधीक्षक डीके गौतम ने एक प्रस्ताव तैयार किया है।
डीके गौतम के मुताबिक चाइल्ड लाइन की टीम का कार्यालय जंक्शन पर ही स्थापित करने के लिए उच्चाधिकारियों को प्रस्ताव भेज दिया है। वहां से मंजूरी मिलते ही कार्यालय की स्थापना करा दी जाएगी। जहां चाइल्ड लाइन की टीम 24 घंटे रहेगी। प्रस्ताव को मंजूरी मिलने के बाद चाइल्ड हेल्प लाइन की जिम्मेदारी किसी एनजीओ को दे दी जाएगी।
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रेलवे जंक्शन पर अकेले घूमने वाले बच्चों पर अब 24 घंटे चाइल्ड हेल्प लाइन की टीम की निगाह रहेगी। जल्द ही मुख्य प्रवेश द्वार के पास बने टिकट घर के पास उसका कार्यालय बनकर तैयार होने वाला है। स्टेशन अधीक्षक की ओर से इस संबंध में उच्चाधिकारियों को पत्र भेजा गया है।
माना जा रहा है कि एक से डेढ़ सप्ताह में प्रस्ताव को मंजूरी मिल जाएगी। फिलहाल जंक्शन पर लावारिस मिलने वाले बच्चों के संबंध में विवरण जुटाने के लिए रजिस्टर तैयार कर लिया गया है। इसमें एक दर्जन से अधिक प्वाइंट हैं। इन सभी प्वाइंटों पर लावारिस हालत में मिलने वाले बच्चों से पूछताछ कर उनके घर-परिजनों का पता लगाया जाएगा।
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जंक्शन के प्लेटफार्म पर आए दिन जीआरपी और आरपीएफ के सामने लावारिस बच्चों के मिलने के मामले सामने आते हैं। बच्चों के मिलने के बाद सबसे बड़ी समस्या पूछताछ के बाद उन्हें रखने के लिए स्थान की होती है। बच्चे पुलिस को देखकर डरे नहीं इसलिए उन्हें थाने पर नहीं रखा जाता।
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बच्चों को उड़ान सोसाइटी के अधीन कर दिया जाता है। मगर, इस प्रक्रिया में काफी समय लगने से जीआरपी और आरपीएफ का अधिक समय खराब होता है। इससे निजात पाने के लिए स्टेशन अधीक्षक डीके गौतम ने एक प्रस्ताव तैयार किया है।
डीके गौतम के मुताबिक चाइल्ड लाइन की टीम का कार्यालय जंक्शन पर ही स्थापित करने के लिए उच्चाधिकारियों को प्रस्ताव भेज दिया है। वहां से मंजूरी मिलते ही कार्यालय की स्थापना करा दी जाएगी। जहां चाइल्ड लाइन की टीम 24 घंटे रहेगी। प्रस्ताव को मंजूरी मिलने के बाद चाइल्ड हेल्प लाइन की जिम्मेदारी किसी एनजीओ को दे दी जाएगी।