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गंदे नाले के जहर से सींची जा रही हैं हरी सब्जियां
Updated Tue, 13 Nov 2018 01:37 AM IST
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न्यूज डेस्क, दीपक शर्मा, अलीगढ़।
शहर के सब्जी बाजार में रखी हरी सब्जियां आपको भले ही ताजा और सेहत से भरपूर दिखाई दे रही हों लेकिन हकीकत इसके विपरीत है। शहर के मथुरा रोड सहित कई अन्य हिस्सों में इन हरी सब्जियों को उगाने में शहर के नालों में गंदा और जहरीला पानी इस्तेमाल हो रहा है। जिससे इन सब्जियों के अंदर भी जहरीले तत्व विकसित हो गए हैं। रामघाट रोड, बन्ना देवी पर मैलरोज बाईपास, खैर रोड आदि पर भी यही स्थिति है।
डाक्टरों के मुताबिक यह सब्जियां धीमा जहर हैं और स्वास्थ्य के लिए, खास तौर से बच्चों के लिए यह गंभीर खतरा हैं। स्थानीय पार्षद संजय शर्मा ने इस मुद्दे को नगर निगम के समक्ष रखा, लेकिन इस समस्या की ओर कोई ध्यान नहीं दिया गया है। शहर में करीब 90 किलोमीटर लंबाई के छोटे बड़े नाले प्रमुख रूप से मथुरा रोड की ओर ड्रेन होते हैं।
मथुरा रोड तक पहुंचते पहुंचते इन नालों में शहर की आबादी के गंदे पानी के साथ साथ फैक्ट्रियों, कारखानों का केमिकल युक्त पानी भी मिल जाता है। जिससे यह पानी जहरीला हो जाता है। इसमें जलीय जीवन की संभावना ही खत्म हो जाती है।
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यहां पर सब्जी उत्पादक नाले के किनारे पर ही पंपिंग सेट रख कर उस जहरीले पानी से सब्जियों की सिंचाई करते हैं। कई महीनों तक लगातार ऐसे पानी से सिंचाई होने से, सब्जियों के अंदर भी वह विषाक्त तत्व विकसित होने लगते हैं।
मैंने लगातार इस विषय को नगर निगम में उठाया, लेकिन इस ओर कोई ध्यान नहीं दिया गया। जन स्वास्थ्य को गंभीर खतरा है।
- संजय शर्मा, स्थानीय पार्षद
अगर कुछ लोग ऐसा कर रहे हैं तो यह गंभीर विषय है, मैं स्वयं मौके पर जाकर इस मामले की छानबीन करूंगा और जो भी कार्यवाही प्रावधान में है करूंगा।
- डॉ. शिव कुमार, नगर स्वास्थ्य अधिकारी
ऐसी सब्जियां खाने के खतरे (जैसा डॉ. प्रदीप बंसल ने बताया)
- सबसे पहले त्वचा रोग, एलर्जी, खुजली, लाल लाल रैशेज हो सकते हैं
- लंबे समय बाद किडनी बुरी तरह प्रभावित, बच्चों को नुकसान ज्यादा
- लीवर फंक्शन प्रभावित हो सकते हैं, लीवर से जुड़ी अन्य समस्याएं
- खाने की की नली में समस्या, आंतों से जुड़ी बीमारियां हो सकती हैं
रिटायर शिक्षक ने कुछ वर्ष पहले उठाया था प्रकरण
कुछ वर्ष पहले मैलरोज बाईपास के बिहारी कालोनी में रहने वाले रिटायर शिक्षक चौधरी रनवीर सिंह ने यह प्रकरण उठाया था। वहां पर नाले के पानी से सिंचाई और इस्तेमाल किए जाने वाले कीटनाशक युक्त हवा कालोनी में रहने वाले लोगों को ही प्रभावित कर रही थी।
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शहर के सब्जी बाजार में रखी हरी सब्जियां आपको भले ही ताजा और सेहत से भरपूर दिखाई दे रही हों लेकिन हकीकत इसके विपरीत है। शहर के मथुरा रोड सहित कई अन्य हिस्सों में इन हरी सब्जियों को उगाने में शहर के नालों में गंदा और जहरीला पानी इस्तेमाल हो रहा है। जिससे इन सब्जियों के अंदर भी जहरीले तत्व विकसित हो गए हैं। रामघाट रोड, बन्ना देवी पर मैलरोज बाईपास, खैर रोड आदि पर भी यही स्थिति है।
डाक्टरों के मुताबिक यह सब्जियां धीमा जहर हैं और स्वास्थ्य के लिए, खास तौर से बच्चों के लिए यह गंभीर खतरा हैं। स्थानीय पार्षद संजय शर्मा ने इस मुद्दे को नगर निगम के समक्ष रखा, लेकिन इस समस्या की ओर कोई ध्यान नहीं दिया गया है। शहर में करीब 90 किलोमीटर लंबाई के छोटे बड़े नाले प्रमुख रूप से मथुरा रोड की ओर ड्रेन होते हैं।
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मथुरा रोड तक पहुंचते पहुंचते इन नालों में शहर की आबादी के गंदे पानी के साथ साथ फैक्ट्रियों, कारखानों का केमिकल युक्त पानी भी मिल जाता है। जिससे यह पानी जहरीला हो जाता है। इसमें जलीय जीवन की संभावना ही खत्म हो जाती है।
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यहां पर सब्जी उत्पादक नाले के किनारे पर ही पंपिंग सेट रख कर उस जहरीले पानी से सब्जियों की सिंचाई करते हैं। कई महीनों तक लगातार ऐसे पानी से सिंचाई होने से, सब्जियों के अंदर भी वह विषाक्त तत्व विकसित होने लगते हैं।
मैंने लगातार इस विषय को नगर निगम में उठाया, लेकिन इस ओर कोई ध्यान नहीं दिया गया। जन स्वास्थ्य को गंभीर खतरा है।
- संजय शर्मा, स्थानीय पार्षद
अगर कुछ लोग ऐसा कर रहे हैं तो यह गंभीर विषय है, मैं स्वयं मौके पर जाकर इस मामले की छानबीन करूंगा और जो भी कार्यवाही प्रावधान में है करूंगा।
- डॉ. शिव कुमार, नगर स्वास्थ्य अधिकारी
ऐसी सब्जियां खाने के खतरे (जैसा डॉ. प्रदीप बंसल ने बताया)
- सबसे पहले त्वचा रोग, एलर्जी, खुजली, लाल लाल रैशेज हो सकते हैं
- लंबे समय बाद किडनी बुरी तरह प्रभावित, बच्चों को नुकसान ज्यादा
- लीवर फंक्शन प्रभावित हो सकते हैं, लीवर से जुड़ी अन्य समस्याएं
- खाने की की नली में समस्या, आंतों से जुड़ी बीमारियां हो सकती हैं
रिटायर शिक्षक ने कुछ वर्ष पहले उठाया था प्रकरण
कुछ वर्ष पहले मैलरोज बाईपास के बिहारी कालोनी में रहने वाले रिटायर शिक्षक चौधरी रनवीर सिंह ने यह प्रकरण उठाया था। वहां पर नाले के पानी से सिंचाई और इस्तेमाल किए जाने वाले कीटनाशक युक्त हवा कालोनी में रहने वाले लोगों को ही प्रभावित कर रही थी।