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विधि संस्थाओं की वृद्धि से सुदृढ़ होगी विधि शिक्षा प्रणाली : न्यायमूर्ति उपाध्याय
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न्यूज डेस्क, अमर उजाला, अलीगढ़।
इलाहाबाद हाईकोर्ट के न्यायमूर्ति देवेंद्र कुमार उपाध्याय ने कहा कि कुछ वर्षों में विधि शिक्षा के क्षेत्र में बड़े बदलाव आए हैं और देश में विधि संस्थाओं की संख्या में भारी वृद्धि हुई है। इससे विधि शिक्षा प्रणाली सुदृढ़ होगी और नई समस्याओं का सामना करने में सक्षम होंगे।
शनिवार को उन्होंने अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी के विधि संकाय के तत्वावधान में सर सैयद एवं सुराना एंड सुराना नेशनल क्रिमनल लॉ मूट कोर्ट प्रतियोगिता 2019 बतौर मुख्य अतिथि शिरकत की। न्यायमूर्ति उपाध्याय ने वकीलों का आह्वान करते हुए कहा कि वह समाज के साथ अपने संबंधों को अधिकाधिक व्यवहारिक बनाएं और लोगों की कानूनी समस्याओं में व्यक्तिगत दिलचस्पी लेकर उनकी सहायता करें। सह कुलपति प्रो. एमएच बेग ने कहा कि विद्यार्थियों को केस की प्रस्तुति व संबंधित लोगों के बयान के दस्तावेजीकरण के क्षेत्र में बहुत कुछ सीखने को मिलेगा।
मानद अतिथि इलाहाबाद हाई कोर्ट में अतिरिक्त सरकारी वकील व एएमयू के पूर्व छात्र सैयद अली मुर्तजा ने कहा कि भारत में मूट कोर्ट की परंपरा 1981 में बार कौंसिल ऑफ इंडिया द्वारा मूट कोर्ट की स्थापना के साथ प्रारंभ हुई थी। इस अवसर पर सुराना एंड सुराना इंटरनेशनल अटार्नीज के शैक्षणिक प्रकोष्ठ के अध्यक्ष डॉ. एस रवीचंद्रन व लॉ सोसाइटी के इंचार्ज प्रो. मोहम्मद तारिक, विधि संकाय के अधिष्ठाता प्रो. जहीरउद्दीन, विधि विभाग के अध्यक्ष प्रो. जावेद तालिब, मूट सोसायटी के सचिव शहबाज अख्तर, सुमैया नोमानी, आतिफ जावेद, तसलीम काबूसा आदि मौजूद रहे।
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इलाहाबाद हाईकोर्ट के न्यायमूर्ति देवेंद्र कुमार उपाध्याय ने कहा कि कुछ वर्षों में विधि शिक्षा के क्षेत्र में बड़े बदलाव आए हैं और देश में विधि संस्थाओं की संख्या में भारी वृद्धि हुई है। इससे विधि शिक्षा प्रणाली सुदृढ़ होगी और नई समस्याओं का सामना करने में सक्षम होंगे।
शनिवार को उन्होंने अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी के विधि संकाय के तत्वावधान में सर सैयद एवं सुराना एंड सुराना नेशनल क्रिमनल लॉ मूट कोर्ट प्रतियोगिता 2019 बतौर मुख्य अतिथि शिरकत की। न्यायमूर्ति उपाध्याय ने वकीलों का आह्वान करते हुए कहा कि वह समाज के साथ अपने संबंधों को अधिकाधिक व्यवहारिक बनाएं और लोगों की कानूनी समस्याओं में व्यक्तिगत दिलचस्पी लेकर उनकी सहायता करें। सह कुलपति प्रो. एमएच बेग ने कहा कि विद्यार्थियों को केस की प्रस्तुति व संबंधित लोगों के बयान के दस्तावेजीकरण के क्षेत्र में बहुत कुछ सीखने को मिलेगा।
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मानद अतिथि इलाहाबाद हाई कोर्ट में अतिरिक्त सरकारी वकील व एएमयू के पूर्व छात्र सैयद अली मुर्तजा ने कहा कि भारत में मूट कोर्ट की परंपरा 1981 में बार कौंसिल ऑफ इंडिया द्वारा मूट कोर्ट की स्थापना के साथ प्रारंभ हुई थी। इस अवसर पर सुराना एंड सुराना इंटरनेशनल अटार्नीज के शैक्षणिक प्रकोष्ठ के अध्यक्ष डॉ. एस रवीचंद्रन व लॉ सोसाइटी के इंचार्ज प्रो. मोहम्मद तारिक, विधि संकाय के अधिष्ठाता प्रो. जहीरउद्दीन, विधि विभाग के अध्यक्ष प्रो. जावेद तालिब, मूट सोसायटी के सचिव शहबाज अख्तर, सुमैया नोमानी, आतिफ जावेद, तसलीम काबूसा आदि मौजूद रहे।
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