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पिछले साल एएमयू छात्रों ने किये थे रिकार्ड मतदान
Updated Mon, 22 Oct 2018 01:40 AM IST
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डेस्क न्यूज, अमर उजाला, अलीगढ़
अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय छात्र संघ चुनाव में पिछले साल रिकार्ड मतदान (75 प्रतिशत) हुआ था। करीब 18 हजार मतदाताओं में से 13 हजार से अधिक छात्र-छात्राओं ने मतदान किया था। सर्वाधिक 92 प्रतिशत मतदान यूनानी फैकल्टी में हुआ था।
पिछले साल अध्यक्ष पद पर मशकूर अहमद उस्मानी, ठाकुर अजय सिंह एवं अबू बकर के बीच मुकाबला था। बरौली के भाजपा विधायक ठाकुर दलवीर सिंह के पौत्र ठाकुर अजय सिंह के मैदान में मजबूती से कूदने से छात्र संघ चुनाव बेहद दिलचस्प हो गया था। यहीं कारण रहा कि छात्रों ने जमकर मतदान किया था। 14 मतदान केंद्रों पर करीब 75 प्रतिशत मतदान हुए थे, जो रिकार्ड है। करीब 18 हजार में से 13 हजार से अधिक छात्र-छात्राओं ने मतदान किया था। यूनानी मेडिसन फैकल्टी में सर्वाधिक 92 प्रतिशत मतदान हुए थे। धर्मशास्त्र एवं कृषि संकाय में 89 प्रतिशत मतदान हुआ था। सबसे कम करीब 64 प्रतिशत मतदान मेडिसन फैकल्टी में हुआ था। अब देखना दिलचस्प है कि एएमयू छात्र पिछले साल का रिकार्ड इस बार तोड़ पाते हैं या नहीं। हालांकि इस बार भी कैंपस चुनावी रंग में रंगने लगा है और प्रत्याशियों की शेरवानी खूंटी से उतर गए हैं। परंपरागत शेरवानी पोशी का कार्यक्रम भी एक-दो दिन में शुरू हो जाएगा।
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अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय छात्र संघ चुनाव में पिछले साल रिकार्ड मतदान (75 प्रतिशत) हुआ था। करीब 18 हजार मतदाताओं में से 13 हजार से अधिक छात्र-छात्राओं ने मतदान किया था। सर्वाधिक 92 प्रतिशत मतदान यूनानी फैकल्टी में हुआ था।
पिछले साल अध्यक्ष पद पर मशकूर अहमद उस्मानी, ठाकुर अजय सिंह एवं अबू बकर के बीच मुकाबला था। बरौली के भाजपा विधायक ठाकुर दलवीर सिंह के पौत्र ठाकुर अजय सिंह के मैदान में मजबूती से कूदने से छात्र संघ चुनाव बेहद दिलचस्प हो गया था। यहीं कारण रहा कि छात्रों ने जमकर मतदान किया था। 14 मतदान केंद्रों पर करीब 75 प्रतिशत मतदान हुए थे, जो रिकार्ड है। करीब 18 हजार में से 13 हजार से अधिक छात्र-छात्राओं ने मतदान किया था। यूनानी मेडिसन फैकल्टी में सर्वाधिक 92 प्रतिशत मतदान हुए थे। धर्मशास्त्र एवं कृषि संकाय में 89 प्रतिशत मतदान हुआ था। सबसे कम करीब 64 प्रतिशत मतदान मेडिसन फैकल्टी में हुआ था। अब देखना दिलचस्प है कि एएमयू छात्र पिछले साल का रिकार्ड इस बार तोड़ पाते हैं या नहीं। हालांकि इस बार भी कैंपस चुनावी रंग में रंगने लगा है और प्रत्याशियों की शेरवानी खूंटी से उतर गए हैं। परंपरागत शेरवानी पोशी का कार्यक्रम भी एक-दो दिन में शुरू हो जाएगा।
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