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अलीगढ़ : सुमद्र में डूबते जहाज में 21 घंटे तक फंसी रही 16 लोगों की जान
Sat, 19 Jun 2021 12:09 AM IST
अलीगढ़ ब्यूरो
राजा तिवारी, अलीगढ़
राजा तिवारी, अलीगढ़
Published by: अलीगढ़ ब्यूरो
Updated Sat, 19 Jun 2021 12:09 AM IST
सार
जहाज पर कार्यरत चीफ इंजीनियर संतोष कुमार अत्री अपने बेटे इंजीनियर विक्रम सिंह को वो खतरनाक मंजर बयां करते हुए अब भी रो पड़ते हैं।
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चीफ इंजीनियर संतोष कुमार अत्री के साथ खड़े सभी चालक दल के सदस्य।
- फोटो : amar ujala
विस्तार
महाराष्ट्र के रायगढ़ स्थित रेवदांडा बंदरगाह से तीन किमी दूरी पर डूबे एमवी मंगलम जहाज पर सवार चालक दल के 16 सदस्यों की जान 21 घंटे तक आफत में रही। जहाज पर कार्यरत चीफ इंजीनियर संतोष कुमार अत्री अपने बेटे इंजीनियर विक्रम सिंह को वो खतरनाक मंजर बयां करते हुए अब भी रो पड़ते हैं।
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अलीगढ़ जिले के जट्टारी के उसरह गांव के रहने वाले चीफ इंजीनियर से शुक्रवार को अमर उजाला ने बातचीत की तो उन्होंने पूरा वाकया बताया। बोले.. ऐसा लग रहा था कि कोई नहीं बच पाएगा, 30 फुट तक ऊंची लहरों के तूफान में फंसा जहाज इधर उधर हिचकोले खा रहा था। स्टील के सामान से भरा जहाज भारी था, इसलिए उसके डूबने का डर बहुत था। इस बीच कोलकाता निवासी कप्तान एस देवनाथ और उन्होंने मिलकर योजना बनाई और रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू होने तक डटे रहे। चालक दल का हौसला बढ़ाया। बाद में नौसेना ने रेस्क्यू कर सभी को बचा लिया।
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संतोष कुमार अत्री ने बताया कि चालक दल के कुल 16 सदस्यों के साथ साथ मुंबई से स्टील का रॉ मैटेरियल (लौह अयस्क) लादकर सालाव जेट्टी रेवदांडा के लिए रवाना हुए थे। रायगढ़ स्थित रेवदांडा बंदरगाह से लगभग तीन किलोमीटर दूर बुधवार शाम साढ़े पांच बजे मौसम खराब होने की वजह से जहाज डगमगाने लगा। ऊंची-ऊंची लहरें उठने लगीं। जहाज का एंकर समुद्र में डालकर उसको कंट्रोल करने की कोशिश की गई। लहरों का दबाव इतना ज्यादा था कि कार्गो के कवर टूट गए। तीन घंटे तक मशक्कत के बाद कोई राहत नहीं मिली तो कोस्टगार्ड को सूचना दी गई।
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जहां से जवाब मिला कि वो लोग सुबह बचाने आएंगे। रात के तीन-चार बज चुके थे, सभी की आंखों से नींद उड़ चुकी थी। सभी घबरा गए कि आगे क्या होगा, बच पाएंगे या नहीं..? बृहस्पतिवार की सुबह कोस्टगार्ड को फिर सूचना दी गई। दोपहर तक दूसरा जहाज आया। इस दौरान बचाव दल का एक सदस्य जहाज से गिर गया। उसे बचाकर जहाज वापस चला गया। उनके मना करने पर हेलीकॉप्टर आए। लेकिन जहाज तक पहुंचने के लिए उनको भी मशक्कत करनी पड़ी। दोपहर दो बजे के करीब चालक दल को हेलीकाप्टर की मदद से बचा लिया गया। इसके बाद सभी रेवदांडा बंदरगाह पहुंचे। यहां स्वास्थ्य विभाग, पुलिस, प्रशासन और कोस्टगार्ड की टीम मौके पर थी। सुरक्षित लौटने पर सभी के स्वास्थ्य और कोविड की जांच हुई।
इंजन रूम तक नहीं पहुंचा था पानी
चीफ इंजीनियर संतोष कुमार अत्री ने बताया कि खराब मौसम और 25 से 30 फीट ऊंची लहरों का दबाव इतना था कि कार्गो में पानी भर गया। हैज में पानी भर गया। लोहे के मजबूत कवर टूट गए। केवल इंजन रूम तक पानी नहीं पहुंचा था। सभी लोग वहीं पर आ गए। यहीं से कप्तान एस देवनाथ के साथ जहाज को कंट्रोल करने की भरपूर कोशिश की गई, लेकिन निराशा ही हाथ लगी।
जट्टारी के उसरह गांव के हैं चीफ इंजीनियर
चीफ इंजीनियर संतोष कुमार अत्री जट्टारी के उसरह गांव के मूल निवासी है। परिवार अब खेरेश्वर मंदिर के पास जलालपुर की मेघ बिहार कालोनी में रहता है। संतोष कुमार की इंटर तक की पढ़ाई जट्टारी के पटेल स्मारक इंटर कालेज से हुई है। 21 अगस्त 1959 को जन्मे संतोष कुमार अत्री ने 1976 में दसवीं तथा 1978 में 12वीं कक्षा पास की। 1979 में इंडियन नेवी को ज्वाइन किया और साथ ही मरीन इंजीनियरिंग डिप्लोमा और मैकेनिकल की डिग्री प्राप्त की। 1994 में नेवी से रिटायर्ड हुए। इसी साल अगस्त महीने में मर्चेंट नेवी में इंजीनियर पद पर ज्वाइन किया।
फोन पर बात करते करते रो पड़े थे चीफ इंजीनियर
एमवी मंगलम जहाज के चीफ इंजीनियर संतोष ने बुधवार शाम साढ़े पांच बजे अपने परिवार से संपर्क किया था। उस वक्त वह परेशान थे। वह अपने बेटे इंजीनियर विक्रम सिंह से बात कर रहे थे। वहां का हाल बताया तो परिजन भी परेशान हो गए। भारतीय तटरक्षक दल ने जब उन्हें शुक्रवार दोपहर में सुरक्षित बाहर निकाला तो परिवार से बात करते-करते रो पड़े। भाजपा युवा मोर्चा के लोधा मंडल अध्यक्ष इंजीनियर विक्रम सिंह ने बताया कि जब पिताजी ने बताया कि बेटा जिंदगी बच गई है। फोन पर भावुक आवाज सुनकर उनके भी आंसू आ गए।