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मोदी के नाम पर दोबारा जीते सतीश-Cordination
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न्यूज डेस्क, कौशल कुमार ओझा, अलीगढ़।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नाम के सहारे सतीश गौतम दोबारा संसद में पहुंच गए हैं। इस शानदार जीत में उनका सरल स्वभाव एवं करीब 12 हजार लोगों को संसद भ्रमण कराना मददगार साबित हुआ है। अलीगढ़ में डिफेंस कॉरिडोर मीट का आयोजन कराकर क्षेत्रीय जनता के दिलोदिमाग पर अच्छा प्रभाव छोड़ा था, जिसका लाभ उन्हें मिला। एएमयू में आरक्षण एवं जिन्ना का मुद्दा उठाने का असर राष्ट्रीय स्तर पर हुआ।
सतीश गौतम की राह में कम कांटे नहीं थे। 2014 में टिकट मिलने के बाद उनका जमकर विरोध हुआ था। यह अलग बात है कि उस समय उनके सिर पर उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री कल्याण सिंह का हाथ था। 2019 में स्थितियां बदल गई थीं।
राज पैलेस उन्हें प्रत्याशी बनाए जाने के विरोध में था। इसके अतिरिक्त टिकट के दूसरे दावेदार भी उनकी राह में रोड़े अटका रहे थे। कल्याण सिंह से राजनीतिक ककहरा सीखने वाले सतीश गौतम का देखते-देखते राजनीतिक कद बढ़ गया और मतदाताओं के बीच संदेश गया कि सतीश गौतम अब राजनीति के मंजे हुए खिलाड़ी हो गए हैं। चुनाव प्रचार के दौरान सतीश गौतम ने बिना लाग लपेट मोदी को प्रधानमंत्री बनाने के लिए वोट मांगे।
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केंद्रीय मंत्रियों एवं पार्टी के नेताओं से अपनी निकटता का अहसास कराकर मतदाताओं को आकर्षित किया। लोकसभा क्षेत्र के करीब 12 हजार लोगों को उन्होंने अपने व्यक्तिगत प्रयास से संसद भ्रमण कराया। चुनाव के दौरान इसका व्यापक असर देखा गया। सांसद निधि की पाई-पाई खर्च कर जनता के बीच लोकप्रियता हासिल की। वह प्रदेश के चंद सांसदों में शुमार हैं, जिन्होंने अपनी निधि के पैसे को समय से खर्च कर दिया।
सपा-बसपा गठबंधन के बाद लोकसभा चुनाव बेहद दिलचस्प हो गया था। गठबंधन द्वारा अजीत बालियान को प्रत्याशी बनाए जाने के बाद भाजपा का जाट वोट खिसकने की अटकलेें लोग लगा रहे थे। सतीश को भितरघातियों से भी खतरा था, लेकिन मोदी करंट के कारण भाजपा प्रत्याशी को लाभ मिला और वोट बिखरने से बच गया। लोकसभा क्षेत्र में वोटों का प्रतिशत बढ़ने का लाभ भी भाजपा प्रत्याशी को मिला।
भाजपा के प्रदेश कार्यकारिणी सदस्य एवं उनके मुख्य चुनाव अभिकर्ता संदीप चाणक्य कहते हैं कि दोबारा सांसद बनाने में सतीश गौतम का सरल स्वभाव एवं बेदाग छवि सबसे अधिक मददगार साबित हुई। पार्टी नेता एवं कार्यकर्ता उनके बेड रूम तक आसानी से चले जाते हैं। उन्होंने सांसद रहते हुए क्षेत्र की समस्याओं को उचित स्थान तक (केंद्र एवं प्रदेश सरकार) पहुंचाया और उसमें से कई का निराकरण कराया।
अलीगढ़ जंक्शन पर कानपुर शताब्दी एवं हमसफर का ठहराव, ईएमयू का संचालन, स्टेशन का सौंदर्यीकरण, नए प्लेटफार्म का निर्माण, दिव्यांग एवं बुजुर्गों के लिए स्टेशन पर लिफ्ट आदि कुछ ऐसे जनकल्याणकारी कार्य हैं, जिसे लोग सालों याद रखेंगे।
भाजपा के जिला प्रवक्ता डॉ. निशित शर्मा कहते हैं कि सतीश गौतम लोकप्रिय नेता हैं। मोदी फैक्टर इनकी जीत का प्रमुख कारण है। एएमयू में आरक्षण, जिन्ना का मुद्दा उठाने का असर राष्ट्रीय स्तर पर हुआ। राष्ट्रीय राजमार्ग पास कराना, सड़कों की स्थिति बेहतर बनाने, उद्यमियों, व्यापारियों एवं किसानों की समस्याओं को गंभीरता से लेकर उसे संबंधित मंत्रालय तक पहुंचाने व उसका समाधान करने के लिए हमेशा लगे रहे।
अलीगढ़ को डिफेंस कॉरिडोर में शामिल कराने तथा रक्षा मंत्री निर्मला सीतारमण एवं मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को बुलाने से सांसद की लोकप्रियता में इजाफा हुआ और जनता का उनके प्रति विश्वास बढ़ा। डॉ. निशित का कहना है कि यह चुनाव राष्ट्रवाद बनाम राष्ट्र विरोध के मुद्दे पर लड़ा गया और मतदाताओं ने इस मुद्दे को अहमियत दी।
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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नाम के सहारे सतीश गौतम दोबारा संसद में पहुंच गए हैं। इस शानदार जीत में उनका सरल स्वभाव एवं करीब 12 हजार लोगों को संसद भ्रमण कराना मददगार साबित हुआ है। अलीगढ़ में डिफेंस कॉरिडोर मीट का आयोजन कराकर क्षेत्रीय जनता के दिलोदिमाग पर अच्छा प्रभाव छोड़ा था, जिसका लाभ उन्हें मिला। एएमयू में आरक्षण एवं जिन्ना का मुद्दा उठाने का असर राष्ट्रीय स्तर पर हुआ।
सतीश गौतम की राह में कम कांटे नहीं थे। 2014 में टिकट मिलने के बाद उनका जमकर विरोध हुआ था। यह अलग बात है कि उस समय उनके सिर पर उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री कल्याण सिंह का हाथ था। 2019 में स्थितियां बदल गई थीं।
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राज पैलेस उन्हें प्रत्याशी बनाए जाने के विरोध में था। इसके अतिरिक्त टिकट के दूसरे दावेदार भी उनकी राह में रोड़े अटका रहे थे। कल्याण सिंह से राजनीतिक ककहरा सीखने वाले सतीश गौतम का देखते-देखते राजनीतिक कद बढ़ गया और मतदाताओं के बीच संदेश गया कि सतीश गौतम अब राजनीति के मंजे हुए खिलाड़ी हो गए हैं। चुनाव प्रचार के दौरान सतीश गौतम ने बिना लाग लपेट मोदी को प्रधानमंत्री बनाने के लिए वोट मांगे।
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केंद्रीय मंत्रियों एवं पार्टी के नेताओं से अपनी निकटता का अहसास कराकर मतदाताओं को आकर्षित किया। लोकसभा क्षेत्र के करीब 12 हजार लोगों को उन्होंने अपने व्यक्तिगत प्रयास से संसद भ्रमण कराया। चुनाव के दौरान इसका व्यापक असर देखा गया। सांसद निधि की पाई-पाई खर्च कर जनता के बीच लोकप्रियता हासिल की। वह प्रदेश के चंद सांसदों में शुमार हैं, जिन्होंने अपनी निधि के पैसे को समय से खर्च कर दिया।
सपा-बसपा गठबंधन के बाद लोकसभा चुनाव बेहद दिलचस्प हो गया था। गठबंधन द्वारा अजीत बालियान को प्रत्याशी बनाए जाने के बाद भाजपा का जाट वोट खिसकने की अटकलेें लोग लगा रहे थे। सतीश को भितरघातियों से भी खतरा था, लेकिन मोदी करंट के कारण भाजपा प्रत्याशी को लाभ मिला और वोट बिखरने से बच गया। लोकसभा क्षेत्र में वोटों का प्रतिशत बढ़ने का लाभ भी भाजपा प्रत्याशी को मिला।
भाजपा के प्रदेश कार्यकारिणी सदस्य एवं उनके मुख्य चुनाव अभिकर्ता संदीप चाणक्य कहते हैं कि दोबारा सांसद बनाने में सतीश गौतम का सरल स्वभाव एवं बेदाग छवि सबसे अधिक मददगार साबित हुई। पार्टी नेता एवं कार्यकर्ता उनके बेड रूम तक आसानी से चले जाते हैं। उन्होंने सांसद रहते हुए क्षेत्र की समस्याओं को उचित स्थान तक (केंद्र एवं प्रदेश सरकार) पहुंचाया और उसमें से कई का निराकरण कराया।
अलीगढ़ जंक्शन पर कानपुर शताब्दी एवं हमसफर का ठहराव, ईएमयू का संचालन, स्टेशन का सौंदर्यीकरण, नए प्लेटफार्म का निर्माण, दिव्यांग एवं बुजुर्गों के लिए स्टेशन पर लिफ्ट आदि कुछ ऐसे जनकल्याणकारी कार्य हैं, जिसे लोग सालों याद रखेंगे।
भाजपा के जिला प्रवक्ता डॉ. निशित शर्मा कहते हैं कि सतीश गौतम लोकप्रिय नेता हैं। मोदी फैक्टर इनकी जीत का प्रमुख कारण है। एएमयू में आरक्षण, जिन्ना का मुद्दा उठाने का असर राष्ट्रीय स्तर पर हुआ। राष्ट्रीय राजमार्ग पास कराना, सड़कों की स्थिति बेहतर बनाने, उद्यमियों, व्यापारियों एवं किसानों की समस्याओं को गंभीरता से लेकर उसे संबंधित मंत्रालय तक पहुंचाने व उसका समाधान करने के लिए हमेशा लगे रहे।
अलीगढ़ को डिफेंस कॉरिडोर में शामिल कराने तथा रक्षा मंत्री निर्मला सीतारमण एवं मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को बुलाने से सांसद की लोकप्रियता में इजाफा हुआ और जनता का उनके प्रति विश्वास बढ़ा। डॉ. निशित का कहना है कि यह चुनाव राष्ट्रवाद बनाम राष्ट्र विरोध के मुद्दे पर लड़ा गया और मतदाताओं ने इस मुद्दे को अहमियत दी।