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नहर की पटरी कटने से 300 बीघा धान एवं बाजरा की फसल जलमग्न
Updated Sun, 07 Oct 2018 11:36 PM IST
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न्यूज डेस्क अमर उजाला हाथरस
सहपऊ। क्षेत्र के गांव रसगवां में नहर की पटरी कटने से किसानों की धान एवं बाजरा की कटी और खड़ी करीब 300 बीघा फसल जलमग्न हो गई। रात करीब ढाई बजे ग्रामीणों को नहर की पटरी कटने का पता जब तक लगा, तब तक नहर का पानी गांव के पास आ चुका था। गांव के पूर्व प्रधान प्रतिनिधि जगवीर ने बताया कि जैसे ही ग्रामीणों ने उसे नहर की पटरी कटने जानकारी दी तो उसने नहर विभाग के सींचपाल और जेई को फोन किया।
उनका फोन नहीं मिलने पर उसने तहसील एवं जिले के अधिकारियों को सूचना देनी चाही, लेकिन रात में उनके फोन पर घंटी बजती रही, लेकिन किसी भी अधिकारी ने फोन उठाने की जरूरत नहीं समझी। सुबह ग्राम प्रधान विरमा सिंह ने क्षेत्र के लेखपाल को लगभग साढ़े छह बजे फोन किया। तब कहीं जाकर उसने फोन रिसीव किया और रसगवां ड्रेन पर जाकर नहर के पानी की रोकथाम कराई। रात में अधिकारियों द्वारा फोन रिसीव नहीं करने और प्रतिवर्ष उनके ही गांव पर नहर की पटरी कटने से लाखों की फसल को नुकसान होने पर ग्रामीणों में काफी आक्रोश है।
रसगवां के पास होकर हाथरस वाली नहर गुजरती है। इस नहर से क्षेत्र में अन्य रजवाह भी निकलते हैं, जिनसे हजारों एकड़ जमीन की सिंचाई की जाती है। नहर एवं रजवाहों के पास के खेतों पानी की उपलब्धता अधिक होने के कारण किसान खेतों में धान आदि की फसल करते हैं। इस गांव में पिछले तीन-चार वर्षों से इसी गांव के पास नहर की पटरी कट जाती है। नहर विभाग इसका दोष ग्रामीणों द्वारा नहर पर पशुओं को पानी पिलाने के देता देता है। उनका कहना है कि जो ग्रामीण नहर में पशुओं को पानी पिलाने लाते हैं, उनके खुरों से धीरे-धीरे पटरी कटती जाती है।
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जब नहर में पूरा पानी छोड़ा जाता है तो वह इस कटे स्थान से बाहर निकल जाता है जो कुछ देर बाद भीषण रूप ले लेता है, जिससे फसलों को नुकसान पहुंचता है। इधर, किसानों को कहना है कि नहर विभाग द्वारा नहर एवं रजवाहों की सफाई ठीक तरह से नहीं कराई जाती और न ही पटरी की ठीक से मरम्मत कराई जाती। इस लापरवाही का खमियाजा उन किसानों को भुगतना पड़ता है, जिनकी फसल जलमग्न है। वर्तमान में सोमवीर की धान की 35 बीघा, सचिन की 35 बीघा में से 16 बीघा धान की कटी हुई फसल खेतों में पड़ी है। गौरव की 30 बीघा, जसवंत की 10 बीघा, पूरन सिंह की सात बीघा, राजेंद्र की पांच बीघा, श्यामलाल की छह बीघा, जयपाल की आठ बीघा फसल खेतों में है।
गांव के इन किसानों सहित लगभग 60 किसानों की फसल जलमग्न हो चुकी है। गांव के पास बने बुर्जी-बिटौरे भी पानी भरने से पूरी तरह से नष्ट हो चुके हैं। रात में पानी का बहाव इतना तेज था कि गांव में पानी पीने के लिए लगाई गई टंकी के चारों ओर लगी बाउंड्रीवाल भी एक तरह से गिर पड़ी है। सुबह होने पर तहसील से तहसीलदार टीपी सिंह, क्षेत्रीय लेखपाल प्रवीन कुमार शर्मा, जेई राजेश शर्मा एवं सींचपाल उदयवीर सिंह मौके पर पहुंचे। पहले तो सिंचाई विभाग के जेई को लोगों के गुस्से का सामना करना पड़ा बाद तहसीलदार आदि ने जेसीबी एवं ट्रैक्टर मंगवाकर उस कटी नहर की पटरी को बंद कराया।
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नहर की कटी पटरी को बंद करा दिया गया है एवं जलमग्न फसल के नुकसान का आंकलन कराया जा रहा है। आंकलन करने के बाद उसे उच्चाधिकारियों को भेजा जाएगा। इसके बाद ही मुआवजा आदि की कार्रवाई की जाएगी।
-टीपी सिंह, तहसीलदार सादाबाद
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सहपऊ। क्षेत्र के गांव रसगवां में नहर की पटरी कटने से किसानों की धान एवं बाजरा की कटी और खड़ी करीब 300 बीघा फसल जलमग्न हो गई। रात करीब ढाई बजे ग्रामीणों को नहर की पटरी कटने का पता जब तक लगा, तब तक नहर का पानी गांव के पास आ चुका था। गांव के पूर्व प्रधान प्रतिनिधि जगवीर ने बताया कि जैसे ही ग्रामीणों ने उसे नहर की पटरी कटने जानकारी दी तो उसने नहर विभाग के सींचपाल और जेई को फोन किया।
उनका फोन नहीं मिलने पर उसने तहसील एवं जिले के अधिकारियों को सूचना देनी चाही, लेकिन रात में उनके फोन पर घंटी बजती रही, लेकिन किसी भी अधिकारी ने फोन उठाने की जरूरत नहीं समझी। सुबह ग्राम प्रधान विरमा सिंह ने क्षेत्र के लेखपाल को लगभग साढ़े छह बजे फोन किया। तब कहीं जाकर उसने फोन रिसीव किया और रसगवां ड्रेन पर जाकर नहर के पानी की रोकथाम कराई। रात में अधिकारियों द्वारा फोन रिसीव नहीं करने और प्रतिवर्ष उनके ही गांव पर नहर की पटरी कटने से लाखों की फसल को नुकसान होने पर ग्रामीणों में काफी आक्रोश है।
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रसगवां के पास होकर हाथरस वाली नहर गुजरती है। इस नहर से क्षेत्र में अन्य रजवाह भी निकलते हैं, जिनसे हजारों एकड़ जमीन की सिंचाई की जाती है। नहर एवं रजवाहों के पास के खेतों पानी की उपलब्धता अधिक होने के कारण किसान खेतों में धान आदि की फसल करते हैं। इस गांव में पिछले तीन-चार वर्षों से इसी गांव के पास नहर की पटरी कट जाती है। नहर विभाग इसका दोष ग्रामीणों द्वारा नहर पर पशुओं को पानी पिलाने के देता देता है। उनका कहना है कि जो ग्रामीण नहर में पशुओं को पानी पिलाने लाते हैं, उनके खुरों से धीरे-धीरे पटरी कटती जाती है।
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जब नहर में पूरा पानी छोड़ा जाता है तो वह इस कटे स्थान से बाहर निकल जाता है जो कुछ देर बाद भीषण रूप ले लेता है, जिससे फसलों को नुकसान पहुंचता है। इधर, किसानों को कहना है कि नहर विभाग द्वारा नहर एवं रजवाहों की सफाई ठीक तरह से नहीं कराई जाती और न ही पटरी की ठीक से मरम्मत कराई जाती। इस लापरवाही का खमियाजा उन किसानों को भुगतना पड़ता है, जिनकी फसल जलमग्न है। वर्तमान में सोमवीर की धान की 35 बीघा, सचिन की 35 बीघा में से 16 बीघा धान की कटी हुई फसल खेतों में पड़ी है। गौरव की 30 बीघा, जसवंत की 10 बीघा, पूरन सिंह की सात बीघा, राजेंद्र की पांच बीघा, श्यामलाल की छह बीघा, जयपाल की आठ बीघा फसल खेतों में है।
गांव के इन किसानों सहित लगभग 60 किसानों की फसल जलमग्न हो चुकी है। गांव के पास बने बुर्जी-बिटौरे भी पानी भरने से पूरी तरह से नष्ट हो चुके हैं। रात में पानी का बहाव इतना तेज था कि गांव में पानी पीने के लिए लगाई गई टंकी के चारों ओर लगी बाउंड्रीवाल भी एक तरह से गिर पड़ी है। सुबह होने पर तहसील से तहसीलदार टीपी सिंह, क्षेत्रीय लेखपाल प्रवीन कुमार शर्मा, जेई राजेश शर्मा एवं सींचपाल उदयवीर सिंह मौके पर पहुंचे। पहले तो सिंचाई विभाग के जेई को लोगों के गुस्से का सामना करना पड़ा बाद तहसीलदार आदि ने जेसीबी एवं ट्रैक्टर मंगवाकर उस कटी नहर की पटरी को बंद कराया।
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नहर की कटी पटरी को बंद करा दिया गया है एवं जलमग्न फसल के नुकसान का आंकलन कराया जा रहा है। आंकलन करने के बाद उसे उच्चाधिकारियों को भेजा जाएगा। इसके बाद ही मुआवजा आदि की कार्रवाई की जाएगी।
-टीपी सिंह, तहसीलदार सादाबाद