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प्रदर्शन
Updated Tue, 19 Jun 2018 02:16 AM IST
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न्यूज डेस्क, अमर उजाला, अलीगढ़।
सांसद आदर्श गांव बहरावद में सोमवार को चौपाल लगाने पहुंचे अधिकारियों का ग्रामीणों ने जबर्दस्त विरोध किया। गांव में अधिकारियों के पहुंचते ही बल्ली आदि लगाकर रास्ता रोक दिया और अधिकारियों की गाड़ियों को गांव के अंदर नहीं घुसने दिया। इस पर अधिकारी पैदल ही सरकारी स्कूल पहुंचे लेकिन वहां एक भी ग्रामीण अपनी समस्या लेकर नहीं पहुंचा।
ग्रामीणों का आरोप है कि चार साल से अधिकारी ऐसे ही चौपाल लगाने आ जाते हैं। गांव वालों से झूठ बोलकर चले जाते हैं। गांव में कोई विकास कार्य नहीं होता। इस दौरान बहरावद के निवासियों ने सांसद सतीश गौतम के खिलाफ भी जमकर नारेबाजी की।
सांसद सतीश गौतम ने 2014 में सबसे पहले बहरावद को गोद लिया था, हालांकि गांव में एक भी इंच पक्की सड़क नहीं बनी। चार साल से महज मिल रहे आश्वासन से ग्रामीण गुस्से में थे। सांसद आदर्श गांव का सच ‘अमर उजाला’ में प्रकाशित होने के बाद सांसद ने अधिकारियों के साथ बैठक की और गांव में विकास कार्य कराने के आदेश दिए थे।
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डीएम के आदेश पर सोमवार को ब्लाक कर्मचारी, शिक्षा विभाग, पशु चिकित्सा विभाग, आंगनबाड़ी, स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी गांव पहुंचे थे तो उन्हें ग्रामीणों के गुस्से का सामना करना पड़ा। ग्रामीणों का कहना था कि गांव के ऊबड़ खाबड़ रास्ते में कड़ी धूप के बीच अधिकारी पैदल ही स्कूल तक चलकर जाएं। अधिकारियों ने स्कूल में चौपाल लगाकर ग्रामीणों से शिकायत और समस्याओं से अवगत कराने के लिए कहा तो ग्रामीणों ने बहिष्कार किया। स्कूल के गेट पर खड़े होकर सांसद के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। सूचना पर पुलिस पहुंच गई। समझाकर ग्रामीणों को शांत कराया। अधिकारी गांव से बैरंग हो गए।
- बहरावद के लोग अपनी बात रखें। जो भी समस्याएं हैं, बताएं। उन्हें दूर कराया जाएगा। तेजी से विकास कार्य कराए जाएंगे। -केपी सिंह राघव, बीडीओ।
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सांसद आदर्श गांव बहरावद में सोमवार को चौपाल लगाने पहुंचे अधिकारियों का ग्रामीणों ने जबर्दस्त विरोध किया। गांव में अधिकारियों के पहुंचते ही बल्ली आदि लगाकर रास्ता रोक दिया और अधिकारियों की गाड़ियों को गांव के अंदर नहीं घुसने दिया। इस पर अधिकारी पैदल ही सरकारी स्कूल पहुंचे लेकिन वहां एक भी ग्रामीण अपनी समस्या लेकर नहीं पहुंचा।
ग्रामीणों का आरोप है कि चार साल से अधिकारी ऐसे ही चौपाल लगाने आ जाते हैं। गांव वालों से झूठ बोलकर चले जाते हैं। गांव में कोई विकास कार्य नहीं होता। इस दौरान बहरावद के निवासियों ने सांसद सतीश गौतम के खिलाफ भी जमकर नारेबाजी की।
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सांसद सतीश गौतम ने 2014 में सबसे पहले बहरावद को गोद लिया था, हालांकि गांव में एक भी इंच पक्की सड़क नहीं बनी। चार साल से महज मिल रहे आश्वासन से ग्रामीण गुस्से में थे। सांसद आदर्श गांव का सच ‘अमर उजाला’ में प्रकाशित होने के बाद सांसद ने अधिकारियों के साथ बैठक की और गांव में विकास कार्य कराने के आदेश दिए थे।
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डीएम के आदेश पर सोमवार को ब्लाक कर्मचारी, शिक्षा विभाग, पशु चिकित्सा विभाग, आंगनबाड़ी, स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी गांव पहुंचे थे तो उन्हें ग्रामीणों के गुस्से का सामना करना पड़ा। ग्रामीणों का कहना था कि गांव के ऊबड़ खाबड़ रास्ते में कड़ी धूप के बीच अधिकारी पैदल ही स्कूल तक चलकर जाएं। अधिकारियों ने स्कूल में चौपाल लगाकर ग्रामीणों से शिकायत और समस्याओं से अवगत कराने के लिए कहा तो ग्रामीणों ने बहिष्कार किया। स्कूल के गेट पर खड़े होकर सांसद के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। सूचना पर पुलिस पहुंच गई। समझाकर ग्रामीणों को शांत कराया। अधिकारी गांव से बैरंग हो गए।
- बहरावद के लोग अपनी बात रखें। जो भी समस्याएं हैं, बताएं। उन्हें दूर कराया जाएगा। तेजी से विकास कार्य कराए जाएंगे। -केपी सिंह राघव, बीडीओ।