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साथा चीनी मिल चल भी गई तो भी घाटे में ही रहेगा किसान
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आशीष श्रीवास्तव, अमर उजाला, अलीगढ़।
अलीगढ़। सरकार प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि से छह हजार रुपये किसानों को देकर अपनी पीठ खुद थपथपा रही है। किसान हितैषी की छवि बनने का प्रयास कर रही है, लेकिन गन्ना किसानों के हालात पर नजर डालें तो तीन किश्तों में मिलने वाली यह राशि ऊंट के मुंह में जीरे के समान है। साथा चीनी मिल सुचारु रूप से न चलने और अब तक पेराई पूर्ण न होने से गन्ना किसान पहले से ही करीब 50 फीसदी के घाटे में हैं। यदि मिल नहीं चली या फिर वायदे के अनुसार दस हजार क्विंटल प्रति दिन की खरीद हुई तो शेष नौ लाख क्विंटल गन्ने की पेराई में कम से कम एक माह का समय लगना लाजमी है। ऐसे में गन्ना सूखने की स्थिति में उसका वजन कम होने पर किसानों को कम दाम मिलने के चलते घाटा बढ़ना तय है।
अक्तूबर से कटना शुरू हो जाता है गन्ना
अलीगढ़। गन्ने की बुवाई अप्रैल मई से आरंभ हो जाती है और अक्तूबर से इसका कटान शुरू हो जाता है। तभी से गन्ने की आवाजाही साथा चीनी मिल में शुरू हो जाती है और पेराई फरवरी के अंत तक चलती है, लेकिन इस बार मिल में आई तकनीकी दिक्कतों के चलते तीन लाख क्विंटल गन्ना ही अब तक पेरा जा सका है। अभी भी करीब नौ लाख क्विंटल गन्ने की पेराई होनी बाकी है। मिल ने गन्ने की खरीद शुरू कर दी है।
वजन कम होने से किसानों का घाटा होना तय
अलीगढ़। गन्ना सर्दी के समय में तो रस से भरपूर रहता है, लेकिन जैसे जैसे गर्मी बढ़ती है तो उसका रस सूखता चला जाता है। ऐसे में गन्ने का वजन कम होना लाजमी ही है। वजन कम होने पर किसानों का घाटा भी तय है।
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यह हैं हालात
-मिल न चलने से परेशान किसानों ने खेत खाली करने को चारे के रूप में बेचा गन्ना
-मिल से मिलते हैं प्रति क्विंटल 325 रुपये के रेट, चारे में मात्र 150 रुपये में बिका
-चारे के रूप में बिक्री करने पर प्रति बीघे के हिसाब से होता है गन्ने का सौदा
-औसतन एक बीघा में 60 से 90 क्विंटल तक होता है गन्ने का उत्पादन
-अब तक कुल उत्पादन का करीब 50 फीसदी गन्ना चारे के रूप में बिका
- गन्ना सूखने की स्थिति में एक क्विंटल गन्ने में करीब दस किलो वजन कम हो जाएगा। इससे किसानों को गन्ने का मूल्य कम मिलेगा और उसे घाटा उठाना होगा।
एसके सिंह राना, मंडल महासचिव भाकियू भानु गुट
- पेराई न होने से किसानों को चारे के रूप में गन्ना बेचना पड़ा है। करीब 50 फीसदी गन्ना चारे के रूप में कौड़ियों के भाव बेचा जा चुका है। यह स्थिति किसानों के लिए भयावह है। चारे के रूप में उन्हें मात्र 150 से 200 रुपये क्विंटल के दाम ही मिले हैं।
-ठा. शैलेंद्रपाल सिंह, किसान नेता
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अलीगढ़। सरकार प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि से छह हजार रुपये किसानों को देकर अपनी पीठ खुद थपथपा रही है। किसान हितैषी की छवि बनने का प्रयास कर रही है, लेकिन गन्ना किसानों के हालात पर नजर डालें तो तीन किश्तों में मिलने वाली यह राशि ऊंट के मुंह में जीरे के समान है। साथा चीनी मिल सुचारु रूप से न चलने और अब तक पेराई पूर्ण न होने से गन्ना किसान पहले से ही करीब 50 फीसदी के घाटे में हैं। यदि मिल नहीं चली या फिर वायदे के अनुसार दस हजार क्विंटल प्रति दिन की खरीद हुई तो शेष नौ लाख क्विंटल गन्ने की पेराई में कम से कम एक माह का समय लगना लाजमी है। ऐसे में गन्ना सूखने की स्थिति में उसका वजन कम होने पर किसानों को कम दाम मिलने के चलते घाटा बढ़ना तय है।
अक्तूबर से कटना शुरू हो जाता है गन्ना
अलीगढ़। गन्ने की बुवाई अप्रैल मई से आरंभ हो जाती है और अक्तूबर से इसका कटान शुरू हो जाता है। तभी से गन्ने की आवाजाही साथा चीनी मिल में शुरू हो जाती है और पेराई फरवरी के अंत तक चलती है, लेकिन इस बार मिल में आई तकनीकी दिक्कतों के चलते तीन लाख क्विंटल गन्ना ही अब तक पेरा जा सका है। अभी भी करीब नौ लाख क्विंटल गन्ने की पेराई होनी बाकी है। मिल ने गन्ने की खरीद शुरू कर दी है।
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वजन कम होने से किसानों का घाटा होना तय
अलीगढ़। गन्ना सर्दी के समय में तो रस से भरपूर रहता है, लेकिन जैसे जैसे गर्मी बढ़ती है तो उसका रस सूखता चला जाता है। ऐसे में गन्ने का वजन कम होना लाजमी ही है। वजन कम होने पर किसानों का घाटा भी तय है।
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यह हैं हालात
-मिल न चलने से परेशान किसानों ने खेत खाली करने को चारे के रूप में बेचा गन्ना
-मिल से मिलते हैं प्रति क्विंटल 325 रुपये के रेट, चारे में मात्र 150 रुपये में बिका
-चारे के रूप में बिक्री करने पर प्रति बीघे के हिसाब से होता है गन्ने का सौदा
-औसतन एक बीघा में 60 से 90 क्विंटल तक होता है गन्ने का उत्पादन
-अब तक कुल उत्पादन का करीब 50 फीसदी गन्ना चारे के रूप में बिका
- गन्ना सूखने की स्थिति में एक क्विंटल गन्ने में करीब दस किलो वजन कम हो जाएगा। इससे किसानों को गन्ने का मूल्य कम मिलेगा और उसे घाटा उठाना होगा।
एसके सिंह राना, मंडल महासचिव भाकियू भानु गुट
- पेराई न होने से किसानों को चारे के रूप में गन्ना बेचना पड़ा है। करीब 50 फीसदी गन्ना चारे के रूप में कौड़ियों के भाव बेचा जा चुका है। यह स्थिति किसानों के लिए भयावह है। चारे के रूप में उन्हें मात्र 150 से 200 रुपये क्विंटल के दाम ही मिले हैं।
-ठा. शैलेंद्रपाल सिंह, किसान नेता