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अलीगढ़ में खुले बूचड़खानों के ताले, माल निकाला गया
Updated Sat, 15 Jul 2017 12:59 AM IST
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खुले बूचड़खानों के ताले, माल निकाला गया
ब्यूरो, अमर उजाला, अलीगढ़।
योगी सरकार के सत्ता में आने के बाद बूचड़खानों पर हुई कार्रवाई के बाद अब तक वहां वाहनों के फंसे होने की समस्या दूर हो गई है। उस वक्त बूचड़खानों के अंदर ही सील किए गए वाहनों को अदालत के आदेशों पर छोड़ा गया है।
इस बीच कुछ लोगों ने ये अफवाह भी उड़ा दी है कि बूचड़खानों को खोला जा रहा है, लेकिन प्रशासन ने स्पष्ट किया कि अदालत के आदेश पर ही आगे की कार्रवाई हो रही है।
सिटी मजिस्ट्रेट सचिन कुमार ने बताया कि सीजेएम अदालत के निर्देश पर कुछ बूचड़खानों की सील खुलवा कर वहां बंद माल को रीलीज किया गया है ताकि वहां रखीं हड्डियों और चमड़े से कोई संक्रामक बीमारियां न फैले।
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वहां हो रहे वायरस और दुर्गंध से लोगों को राहत मिल सके। वहां के आसपास के लोगों को भी राहत मिले और वाहनों को भी मुक्त किया जा सके। इसके अलावा कोई कार्रवाई नहीं हुई है। बूचड़खानों को खोले जाने का कोई सवाल ही नहीं उठता है। क्योंकि ये कार्रवाई नियम विरुद्ध कट्टी करने वालों के खिलाफ हुई है।
इधर, अल कुरैश वेलफेयर सोसायटी के अध्यक्ष सोहराब कुरैशी और सचिव एसएम यामीन ने कहा कि बूचड़खानों पर अवैध कार्रवाई होने के बाद से मरे हुए मवेशियों को लेकर अब तक नगर निगम की ओर से कोई स्पष्ट कार्रवाई नहीं हो रही है।
कई जगहों पर पशु कई कई दिन तक मृत पड़े रहते हैं जिसकी दुर्गंध से लोग परेशान हैं। नगर निगम का स्लाटर हाउस अब तक चालू नहीं हुआ है, जिससे लोग परेशान हैं। पशुओं के कटान की समस्या जस की तस है।
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ब्यूरो, अमर उजाला, अलीगढ़।
योगी सरकार के सत्ता में आने के बाद बूचड़खानों पर हुई कार्रवाई के बाद अब तक वहां वाहनों के फंसे होने की समस्या दूर हो गई है। उस वक्त बूचड़खानों के अंदर ही सील किए गए वाहनों को अदालत के आदेशों पर छोड़ा गया है।
इस बीच कुछ लोगों ने ये अफवाह भी उड़ा दी है कि बूचड़खानों को खोला जा रहा है, लेकिन प्रशासन ने स्पष्ट किया कि अदालत के आदेश पर ही आगे की कार्रवाई हो रही है।
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सिटी मजिस्ट्रेट सचिन कुमार ने बताया कि सीजेएम अदालत के निर्देश पर कुछ बूचड़खानों की सील खुलवा कर वहां बंद माल को रीलीज किया गया है ताकि वहां रखीं हड्डियों और चमड़े से कोई संक्रामक बीमारियां न फैले।
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वहां हो रहे वायरस और दुर्गंध से लोगों को राहत मिल सके। वहां के आसपास के लोगों को भी राहत मिले और वाहनों को भी मुक्त किया जा सके। इसके अलावा कोई कार्रवाई नहीं हुई है। बूचड़खानों को खोले जाने का कोई सवाल ही नहीं उठता है। क्योंकि ये कार्रवाई नियम विरुद्ध कट्टी करने वालों के खिलाफ हुई है।
इधर, अल कुरैश वेलफेयर सोसायटी के अध्यक्ष सोहराब कुरैशी और सचिव एसएम यामीन ने कहा कि बूचड़खानों पर अवैध कार्रवाई होने के बाद से मरे हुए मवेशियों को लेकर अब तक नगर निगम की ओर से कोई स्पष्ट कार्रवाई नहीं हो रही है।
कई जगहों पर पशु कई कई दिन तक मृत पड़े रहते हैं जिसकी दुर्गंध से लोग परेशान हैं। नगर निगम का स्लाटर हाउस अब तक चालू नहीं हुआ है, जिससे लोग परेशान हैं। पशुओं के कटान की समस्या जस की तस है।