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ब्राह्मण भोज से एक तो तर्पण से सभी पितृ होते हैं संतुष्ट
Updated Mon, 24 Sep 2018 02:28 AM IST
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ब्राह्मण भोज से एक तो तर्पण से सभी पितृ होते हैं संतुष्ट
आज से शुरू हो जाएंगे पितृपक्ष
अमर उजाला ब्यूरो
अलीगढ़। हिंदू धर्म की मान्यताओं के अनुसार ब्राह्मण भोज से एक पितृ तो तर्पण से सभी पितृ संतुष्ट होते हैं। इसलिए श्राद्ध पक्ष में तर्पण का विशेष महत्व है। इस बार पितृ पक्ष आज (सोमवार) से आठ अक्तूबर तक है।
बताया जाता है कि गया की फल्गु नदी में स्नान और तर्वण करने से पितरों को देवयोनि मिलती है। हिंदू समाज में यह भी माना जाता है गया में पिंडदान करने से सात पीढ़ियों के पितरों को मुक्ति मिल जाती है। श्री गुरू ज्योतिष शोध संस्थान के अध्यक्ष पं. हृदय रंजन शर्मा ने बताया कि इस बार तर्पण की प्रमुख तिथियां 29 सितंबर पंचमी, तीन अक्तूबर नवमी व आठ अक्तूबर अमावस्या सर्वोत्तम तिथियों में हैं।
किस दिन करें किस पितृ का श्राद्ध
पं. हृदय रंजन शर्मा ने बताया कि कई लोगों को अपने परिजनों की मृत्यु की तिथि ज्ञात नहीं होती है। इसलिए पितृ पक्ष में कुछ विशेष तिथियां निर्धारित हैं। जिस दिन उक्त लोग अपने पितरों का श्राद्ध कर सकते हैं।
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प्रतिपदा :- अश्विनी कृष्ण पक्ष की प्रतिपदा की तिथि में नाना नानी का श्राद्ध किया जा सकता है।
पंचमी :- जिनकी मृत्यु अविवाहित स्थिति में हुई हो, इस तिथि में उनका श्राद्ध किया जा सकता है।
नवमी :- सुहागिन स्त्रियों का श्राद्ध नवमी को किया जाता है। वहीं इस तिथि में माता का श्राद्ध भी कर सकते हैं।
एकादशीृ-द्वादशी :- सन्यासियों का श्राद्ध इस तिथि में करना अति शुभ होता है।
त्रयोदशी :- छोटे बच्चों, कुवारों का श्राद्ध इस तिथि में उत्तम माना गया है।
चतुदर्शी :- इस तिथि में शस्त्र आत्महत्या, विष, दुर्घना यानी अकाल मृत्यु वाले लोगों का श्राद्ध करना उत्तम रहता है।
अमावस्या :- किसी कारण से पितृ पक्ष की अन्य तिथियों पर पितरों का श्राद्ध करने से चूकने वाले लोग, या पितरों की तिथि याद न हो तो इस तिथि में श्राद्ध किया जा सकता है।
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आज से शुरू हो जाएंगे पितृपक्ष
अमर उजाला ब्यूरो
अलीगढ़। हिंदू धर्म की मान्यताओं के अनुसार ब्राह्मण भोज से एक पितृ तो तर्पण से सभी पितृ संतुष्ट होते हैं। इसलिए श्राद्ध पक्ष में तर्पण का विशेष महत्व है। इस बार पितृ पक्ष आज (सोमवार) से आठ अक्तूबर तक है।
बताया जाता है कि गया की फल्गु नदी में स्नान और तर्वण करने से पितरों को देवयोनि मिलती है। हिंदू समाज में यह भी माना जाता है गया में पिंडदान करने से सात पीढ़ियों के पितरों को मुक्ति मिल जाती है। श्री गुरू ज्योतिष शोध संस्थान के अध्यक्ष पं. हृदय रंजन शर्मा ने बताया कि इस बार तर्पण की प्रमुख तिथियां 29 सितंबर पंचमी, तीन अक्तूबर नवमी व आठ अक्तूबर अमावस्या सर्वोत्तम तिथियों में हैं।
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किस दिन करें किस पितृ का श्राद्ध
पं. हृदय रंजन शर्मा ने बताया कि कई लोगों को अपने परिजनों की मृत्यु की तिथि ज्ञात नहीं होती है। इसलिए पितृ पक्ष में कुछ विशेष तिथियां निर्धारित हैं। जिस दिन उक्त लोग अपने पितरों का श्राद्ध कर सकते हैं।
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प्रतिपदा :- अश्विनी कृष्ण पक्ष की प्रतिपदा की तिथि में नाना नानी का श्राद्ध किया जा सकता है।
पंचमी :- जिनकी मृत्यु अविवाहित स्थिति में हुई हो, इस तिथि में उनका श्राद्ध किया जा सकता है।
नवमी :- सुहागिन स्त्रियों का श्राद्ध नवमी को किया जाता है। वहीं इस तिथि में माता का श्राद्ध भी कर सकते हैं।
एकादशीृ-द्वादशी :- सन्यासियों का श्राद्ध इस तिथि में करना अति शुभ होता है।
त्रयोदशी :- छोटे बच्चों, कुवारों का श्राद्ध इस तिथि में उत्तम माना गया है।
चतुदर्शी :- इस तिथि में शस्त्र आत्महत्या, विष, दुर्घना यानी अकाल मृत्यु वाले लोगों का श्राद्ध करना उत्तम रहता है।
अमावस्या :- किसी कारण से पितृ पक्ष की अन्य तिथियों पर पितरों का श्राद्ध करने से चूकने वाले लोग, या पितरों की तिथि याद न हो तो इस तिथि में श्राद्ध किया जा सकता है।