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मासूम मरीजों के जीवन के लिए हम जवाबदेह नहीं

Wed, 11 Apr 2018 02:07 AM IST
Updated Wed, 11 Apr 2018 02:07 AM IST
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मासूम मरीजों के जीवन के लिए हम जवाबदेह नहीं
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, अलीगढ़।
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एएमयू प्रशासन द्वारा असंवैधानिक घोषित की गई हड़ताल को जेएन मेडिकल कॉलेज के जूनियर डॉक्टरों ने हड़ताल मानने से ही इंकार कर दिया है। उनका कहना है कि उन्होंने हड़ताल नहीं, बल्कि कार्य बहिष्कार किया था। यहीं नहीं आरडीए पदाधिकारियों का यह भी कहना है कि 11 दिन के कार्य बहिष्कार के दौरान मासूम गंभीर मरीजों के जीवन के लिए वे लोग जवाबदेह नहीं है, क्योंकि उस समय जेएन मेडिकल कॉलेज के कंसलटेंट, सीनियर रेजीडेंट, इंटर्न एवं नर्सिंग स्टाफ आदि ड्यूटी पर थे।

एएमयू कैबिनेट सदस्य जैद शेरवानी पर एक महिला डॉक्टर के साथ बदसलूकी का आरोप लगा था। जैद के खिलाफ कार्रवाई करने की मांग को लेकर 29 मार्च से लेकर आठ अप्रैल की शाम तक यानी 11 दिन तक जूनियर डॉक्टर कार्य से दूर रहे। इसकी वजह से इमरजेंसी सेवाएं पूरी तरह बाधित रही। आठ अप्रैल को जैद शेरवानी को निलंबित किए जाने के बाद करीब 400 से अधिक जूनियर डॉक्टर काम पर लौटे।
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एएमयू प्रशासन द्वारा रेजीडेेंट डॉक्टर्स एसोसिएशन (आरडीए) के अध्यक्ष डॉ. अब्दुल्ला आजमी, उपाध्यक्ष डॉ. दीपक अग्रवाल एवं सचिव डॉ. मेहताब आलम को कारण बताओ नोटिस जारी कर असंवैधानिक हड़ताल में शामिल होने, निर्दोष गंभीर मरीजों की मौत आदि के बारे में पूछा गया था।
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आरडीए नेताओं ने एएमयू प्रॉक्टर के पास कारण बताओ नोटिस का जवाब भेज दिया है। डॉ. अब्दुल्ला ने अपने जवाब में यह भी कहा है कि उन्होंने किसी को काम से दूर रहने के लिए भड़काया नहीं। बल्कि वह आरडीए अध्यक्ष के रूप में रेजीडेंट डॉक्टर एवं एएमयू प्रशासन के बीच मध्यस्थ का काम कर रहे थे। डॉक्टरों के कार्य बहिष्कार से संबंधित तमाम फैसले जनरल बॉडी मीटिंग (जीबीएम) में लिए जाते थे।


वह जीबीएम और एएमयू प्रशासन के फैसले से एक-दूसरे को अवगत कराने का काम कर रहे थे। डॉ. दीपक एवं डॉ. मेहताब आलम ने भी कुछ ऐेसे ही जवाब दिया है। डॉ. आलम ने छुट्टी पर रहने का जिक्र किया है। एएमयू के डिप्टी प्रॉक्टर का कहना है कि आरडीए नेताओं ने कारण बताओ नोटिस का जवाब भेज दिया है। 13 अप्रैल को अनुशासन समिति में विचार किया जाएगा। इसमें आरडीए पदाधिकारी को आकर अपना जवाब दर्ज कराना होगा।
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