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अशुद्ध रक्त पर जिंदा है मासूम, दिल में छेद भी है

Mon, 17 Sep 2018 02:24 AM IST
Updated Mon, 17 Sep 2018 02:24 AM IST
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अशुद्ध रक्त पर जिंदा है मासूम, दिल में छेद भी है
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, अलीगढ़।
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मासूम शोएब के दिल में न सिर्फ छेद है, बल्कि और भी डिफेक्ट हैं। जिनके चलते दिल का ब्लड प्योरीफाई सिस्टम भी नाकाम है। इस कारण बच्चे के हर अंग को अशुद्ध रक्त की सप्लाई हो रही है। सिर्फ इतना ही नहीं जांच में शोएब का दिल बायीं ओर मिला ही नहीं। उसका दिल दायीं तरफ है। डीईआईसी ने अब तक दिल मे छेद के सैकड़ों बच्चे जांचे और सर्जरी की हैं, लेकिन इतना गंभीर मामला पहली बार सामने आया है। शनिवार को उपचार के लिए अमर उजाला की मदद से डिस्ट्रिक्ट अर्ली इंटरवेंशन सेंटर में इस बच्चे का पंजीकरण कराया गया है। जांचें अभी जारी हैं। सोमवार को कुछ और डिफेक्ट क्लियर हो सकते हैं।

महाधमनी भी अशुद्ध रक्त से जुड़ी है
शरीर को शुद्ध रक्त की सप्लाई देना दिल का ही काम है। दिल का दायां निचला भाग रक्त को शुद्ध करने के लिए फेफड़ों में भेजता है। रक्त को शुद्ध करके फेफड़े उसे दिल के बायें निचले भाग को देते हैं। महाधमनी बायें भाग से ही शुद्ध रक्त प्राप्त करती है और बाकी धमनियों के रास्ते शरीर के शेष हिस्सों तक शुद्ध रक्त पहुंचाती है। लेकिन शोएब के दिल का सिस्टम एकदम उल्टा है। दिल के दायें भाग को फेफड़ों से जोड़ने वाली ट्यूब ही करीब करीब बंद है। न के बराबर फेफड़ों को ब्लड मिलता है। इसके अलावा महाधमनी बायें भाग की जगह दायें भाग से कनेक्ट है। इस कारण शुद्ध हुए बिना ही अशुद्ध रक्त सीधे महाधमनी में चला जाता है। यानी शोएब की हार्ट सर्जरी के दौरान दिल का छेद तो बंद करना ही होगा साथ में दिल के दायें भाग को फेफड़े से जोड़ने वाली ट्यूब को भी खोलना होगा और इसी के साथ शुद्ध रक्त के लिए महाधमनी को बायें भाग से भी जोड़ना होगा।
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जन्म के समय धड़कनों में थी कमी
आईटीआई रोड मुश्ताक नगर की गली नंबर 2 निवासी जलालुद्दीन का बेटा है शोएब। पास ही के निजी अस्पताल में 14 अगस्त 2017 को मां नगीना ने शोएब को जन्म दिया था। जन्म के समय बताया था कि बच्चे की धड़कनें कम चल रही हैं। घर आने के 10 दिन में ही मासूम को फेफड़ों के इंफेक्शन ने जकड़ लिया। सभी ने इन्फेक्शन को सर्दी बताया। एक हफ्ते मेडिकल में भी भर्ती रखा। सर्दी की दवा चलती रही। धीरे धीरे नगीना ने नोटिस किया कि शोएब नीला दिखता है। जुबान और नाखून ज्यादा नीले हैं। सांस भी फूलती है। पेट भी अक्सर फूल जाता है। ऐसी तमाम समस्याओं से बाहर नहीं आ सका तो 4 माह के बच्चे को बस स्टैंड पर निजी हकीम को दिखाया। हकीम ने देखते ही बता दिया कि दिल मे छेद है। इसके बाद जेएन मेडिकल कालेज की ओपीडी से पीड़ित परिवार ने इसकी पुष्टि भी करा ली। जब ये देखा कि अमर उजाला ऐसे बच्चों की मदद में लगातार अभियान छेड़े हुए है तो समाजसेवी जिज्ञासा गोस्वामी की मदद लेकर पीड़ित ने अमर उजाला से संपर्क किया। तब जाकर अमर उजाला की सहयोगी संस्था स्मार्ट विलेज फाउंडेशन की देखरेख में बच्चे को डीईआईसी पहुंचाया गया है।
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आर्थिक तंगी से जूझ रहा शोएब का परिवार
शोएब के पिता जलालुद्दीन को भी 4 महीने पहले ही पता लगा है कि उसे भी गले का कैंसर है। शोएब से बड़े भी 2 बच्चे निदा 17 वर्ष और ज़ोया 5वर्ष हैं। जलालुद्दीन 300 रुपये किराये पर बैटरी टिर्री चलाकर परिवार की रोटी कमाते हैं। पत्नी नगीना भी घरों में काम करके जलालुद्दीन की मदद करती हैं। परिवार इस हालत में नहीं कि शोएब की हार्ट सर्जरी करा सके।

डीईआईसी से है बड़ी आस
राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम के अंतर्गत संचालित डिस्ट्रिक्ट अर्ली इंरवेंशन सेंटर ने शनिवार को इस बच्चे को उपचार हेतु पंजीकृत संख्या 17522018 कर लिया है। यदि डीईआईसी की हार्ट सर्जरी यूनिट इस हार्ट सर्जरी को करने में सफल रही तो सर्जरी का पूरा खर्च राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के अंतर्गत वहन हो जाएगा और पीड़ित पर कोई खर्च भार नहीं पड़ेगा। डीईआईसी की हार्ट सर्जरी यूनिट भी शोएब की पूरी मदद करना चाहती है। ये सूबे का एक्सीलेंस एक्सपर्ट सेंटर है। जो अभी तक कुछ ही माह में दिल मे छेद वाले 100 बच्चों की जान बचा चुके हैं।

ये डेस्ट्रो कार्डिया और वीएसडी का संयुक्त केस है। बच्चे का इलाज पूर्णत: यहीं कराया जाएगा। पीड़ित परिवार को किसी भी स्तर पर कमजोर पड़ने की जरूरत नहीं है। हम हर स्तर पर पीड़ित परिवार की मदद करेंगे।

डॉ एमएल अग्रवालए सीएमओ

14 वर्षीय मजदूर के बेटे अरविंद की दोनों किडनी डैमेज
खैर रोड लक्षिमपुर पीपल वाली गली निवासी श्रमिक बनी सिंह के 14 वर्षीय बेटे अरविंद की दोनों किडनी फेल हो गई हैं। उसे स्टोन की समस्या थी। उसे किडनी ट्रांसप्लांट की दरकार है। बनी सिंह ने बताया कि उसके बेटे का इलाज अपोलो अस्पताल में चल रहा है। डाक्टरों ने किडनी ट्रांसप्लांट के लिए किडनी मांगी है। उसकी मां राजवती देवी किडनी देना चाहती है। इसके लिए शनिवार को वह डीएम से अनुमति लेने व आर्थिक सहायता के लिए गया था। लेकिन डीएम के मौजूद न होने पर वहां मौजूद अफसरों ने उसे सोमवार को आने की सलाह दी है।
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