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सड़कों की धूल कर रही आंखों की रोशनी धुंधली
Updated Mon, 27 Aug 2018 01:04 AM IST
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न्यूज डेस्क, अमर उजाला, अलीगढ़।
शहर में विभिन्न स्थानों पर सड़कों और डिवाइडरों के किनारे पड़ी रहने वाली धूल उड़ उड़ कर लोगों की आंखों में जा रही है। इससे आंखों की रोशनी धुंधली हो रही है। मलखान सिंह जिला अस्पताल के नेत्र रोग विभाग में आने वाले मामले और उन केसों को लेकर उड़ान सोसायटी की गई एक स्टडी से यह बात निकल कर आई।
शहर का 90 फीसदी हिस्सा ऐसा है जहां पर कभी भी नगर निगम की स्वीपिंग मशीन से सफाई नहीं हुई है। यह मशीन सड़कों से डस्ट खत्म करने का काम करती है।
इस मशीन के कागजों पर चलने को लेकर अक्सर सवाल भी उठते रहे हैं। शहर में रामघाट रोड पर तालसपुर से क्वार्सी चौराहे के बीच, रामघाड रोड पर डिवाइडरों के सहारे, गांधी पार्क बस स्टैंड से सारसौल चौराहे तक डिवाइडरों के सहारे, गांधी पार्क बस स्टैंड से एटा चुंगी की ओर धनीपुर तक डिवाइडर और सड़क पर, जेल रोड, अनूप शहर रोड आदि इलाकों की सड़कों और डिवाइडरों के सहारे माइक्रोफाइन डस्ट रहती है।
अध्ययन में पाया गया कि यह बेहद बारीक डस्ट आंखों के रेटिना पर लगातार जमती रहती है। इसके चलते वह लोग जो दोपहिया वाहनों का इस्तेमाल करते हैं और इन जगहों से गुजरते हैं, यह डस्ट उन्हें प्रभावित करती है। जिला अस्पताल में इसी प्रवृत्ति के लगातार आ रहे केसों की तरफ संस्था का ध्यान गया और अध्ययन में पाया गया कि यह सभी एक ही प्रकार की स्थितियों के शिकार थे।
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ऐसे कर सकते हैं बचाव
- बाहर से आने के बाद चेहरे और आंखों को सादा पानी से धोएं
- वाहन चलाते समय आंखों पर चश्मा लगाएं, या हेलमेट लगाएं
- रेटिना को साफ करने के लिए निर्धारित ड्राप चिकित्सक की सलाह के अनुसार डालें
1 दिन सड़क पर 30 दिन कागजों पर
नगर निगम कार्यकारिणी के पूर्व उपसभापति कुलदीप पांडेय ने इस संबंध में तत्कालीन नगर आयुक्त संतोष कुमार शर्मा के समक्ष सवाल उठाया था कि शहर की सड़कों की स्वीपिंग मशीन 30 दिन कागजों पर और एक दिन सड़कों पर चलती है। यह मुद्दा कई बार नगर निगम बोर्ड की बैठक में भी उठा है।
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शहर में विभिन्न स्थानों पर सड़कों और डिवाइडरों के किनारे पड़ी रहने वाली धूल उड़ उड़ कर लोगों की आंखों में जा रही है। इससे आंखों की रोशनी धुंधली हो रही है। मलखान सिंह जिला अस्पताल के नेत्र रोग विभाग में आने वाले मामले और उन केसों को लेकर उड़ान सोसायटी की गई एक स्टडी से यह बात निकल कर आई।
शहर का 90 फीसदी हिस्सा ऐसा है जहां पर कभी भी नगर निगम की स्वीपिंग मशीन से सफाई नहीं हुई है। यह मशीन सड़कों से डस्ट खत्म करने का काम करती है।
इस मशीन के कागजों पर चलने को लेकर अक्सर सवाल भी उठते रहे हैं। शहर में रामघाट रोड पर तालसपुर से क्वार्सी चौराहे के बीच, रामघाड रोड पर डिवाइडरों के सहारे, गांधी पार्क बस स्टैंड से सारसौल चौराहे तक डिवाइडरों के सहारे, गांधी पार्क बस स्टैंड से एटा चुंगी की ओर धनीपुर तक डिवाइडर और सड़क पर, जेल रोड, अनूप शहर रोड आदि इलाकों की सड़कों और डिवाइडरों के सहारे माइक्रोफाइन डस्ट रहती है।
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अध्ययन में पाया गया कि यह बेहद बारीक डस्ट आंखों के रेटिना पर लगातार जमती रहती है। इसके चलते वह लोग जो दोपहिया वाहनों का इस्तेमाल करते हैं और इन जगहों से गुजरते हैं, यह डस्ट उन्हें प्रभावित करती है। जिला अस्पताल में इसी प्रवृत्ति के लगातार आ रहे केसों की तरफ संस्था का ध्यान गया और अध्ययन में पाया गया कि यह सभी एक ही प्रकार की स्थितियों के शिकार थे।
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ऐसे कर सकते हैं बचाव
- बाहर से आने के बाद चेहरे और आंखों को सादा पानी से धोएं
- वाहन चलाते समय आंखों पर चश्मा लगाएं, या हेलमेट लगाएं
- रेटिना को साफ करने के लिए निर्धारित ड्राप चिकित्सक की सलाह के अनुसार डालें
1 दिन सड़क पर 30 दिन कागजों पर
नगर निगम कार्यकारिणी के पूर्व उपसभापति कुलदीप पांडेय ने इस संबंध में तत्कालीन नगर आयुक्त संतोष कुमार शर्मा के समक्ष सवाल उठाया था कि शहर की सड़कों की स्वीपिंग मशीन 30 दिन कागजों पर और एक दिन सड़कों पर चलती है। यह मुद्दा कई बार नगर निगम बोर्ड की बैठक में भी उठा है।