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कीमती सरकारी जमीन पर कब्जा कराने के मामले में फंसे पूर्व एसडीएम पांडेय
Updated Tue, 10 Jul 2018 01:44 AM IST
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क्राइम न्यूज, अमर उजाला, अलीगढ़।
अपने करीब दो साल के कार्यकाल में विवादों में रहे इगलास के निवर्तमान एसडीएम एवं पूर्व एसीएम प्रथम रामसूरत पांडेय एक और विवाद में फंसते नजर आ रहे हैं। इस बार उन पर एसीएम प्रथम रहने के दौरान ग्राम जिरौली डोर की ग्राम समाज की भूमि पर अनधिकृत रूप से कब्जा किये बैठे व्यक्ति के पक्ष में निर्णय सुनाकर सरकारी भूमि को खुर्द बुर्द किये जाने का आरोप लगा है।
डीएम ने एडीएम प्रशासन के नेतृत्व में टीम गठित कर जांच के आदेश कर दिये हैं तो एसीएम प्रथम न्यायालय के आदेश पर सोमवार को तहसील कोल की टीम ने एसडीएम कोल के नेतृत्व में मौके पर जाकर अनधिकृत कब्जा हटवा दिया।
एसीएम प्रथम न्यायालय में लंबे समय से उत्तर प्रदेश जेडएएलआर एक्ट के अंतर्गत धारा 229 बी के तहत ग्राम जिरौली डोर तहसील कोल निवासी रवेंद्र पाल सिंह पुत्र बाबू सिंह बनाम सरकार मुकदमा चल रहा था।
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ग्राम सभा का आरोप था कि उक्त व्यक्ति ने ग्राम समाज की 15 बीघा जमीन पर अनधिकृत रूप से कब्जा कर रखा है। वादी ने अपना पक्ष रखते हुए बताया कि वह इस विवादित भूमि पर 30 वर्षों से अनधिकृत रूप से काबिज है। उसे संक्रमणीय भूमिधर के अधिकार प्राप्त हो गए हैं।
उसने कई बार सरकारी अभिलेखों में जमीन का इंद्राज उसके नाम से करने का अनुरोध किया है, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई। उसने न्यायालय से अपने आपको विवादित भूमि का संक्रमणीय भूमिधर घोषित कर सरकारी रिकार्ड में अमल दरामद कराने की मांग की थी। इस मामले में तत्कालीन एसीएम प्रथम रामसूरत पांडेय ने वादी के पक्ष में निर्णय दिया।
इसकी शिकायत होने पर डीएम चंद्रभूषण सिंह ने एडीएम प्रशासन आरएन शर्मा, एडीएम वित्त एवं राजस्व उदय सिंह एवं डीजीसी के नेतृत्व में कमेटी बनाते हुए जांच के आदेश किये हैँ।
इधर एसीएम प्रथम न्यायालय से इस करीब 15 बीघा भूमि को नवीन परती से पुन: ग्राम सभा के खाते में दर्ज कराने के आदेश हुए। एसडीएम कोल जोगिंदर सिंह ने बताया कि उक्त भूमि से अतिक्रमण हटाकर इसे खाली करा लिया गया है।
जांच अधिकारी एवं एडीएम प्रशासन आरएन शर्मा ने स्वीकार किया कि इस प्रकरण की जांच शुरू हो गई है। एक दो दिनों में नतीजा आने की संभावना है।
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अपने करीब दो साल के कार्यकाल में विवादों में रहे इगलास के निवर्तमान एसडीएम एवं पूर्व एसीएम प्रथम रामसूरत पांडेय एक और विवाद में फंसते नजर आ रहे हैं। इस बार उन पर एसीएम प्रथम रहने के दौरान ग्राम जिरौली डोर की ग्राम समाज की भूमि पर अनधिकृत रूप से कब्जा किये बैठे व्यक्ति के पक्ष में निर्णय सुनाकर सरकारी भूमि को खुर्द बुर्द किये जाने का आरोप लगा है।
डीएम ने एडीएम प्रशासन के नेतृत्व में टीम गठित कर जांच के आदेश कर दिये हैं तो एसीएम प्रथम न्यायालय के आदेश पर सोमवार को तहसील कोल की टीम ने एसडीएम कोल के नेतृत्व में मौके पर जाकर अनधिकृत कब्जा हटवा दिया।
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एसीएम प्रथम न्यायालय में लंबे समय से उत्तर प्रदेश जेडएएलआर एक्ट के अंतर्गत धारा 229 बी के तहत ग्राम जिरौली डोर तहसील कोल निवासी रवेंद्र पाल सिंह पुत्र बाबू सिंह बनाम सरकार मुकदमा चल रहा था।
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ग्राम सभा का आरोप था कि उक्त व्यक्ति ने ग्राम समाज की 15 बीघा जमीन पर अनधिकृत रूप से कब्जा कर रखा है। वादी ने अपना पक्ष रखते हुए बताया कि वह इस विवादित भूमि पर 30 वर्षों से अनधिकृत रूप से काबिज है। उसे संक्रमणीय भूमिधर के अधिकार प्राप्त हो गए हैं।
उसने कई बार सरकारी अभिलेखों में जमीन का इंद्राज उसके नाम से करने का अनुरोध किया है, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई। उसने न्यायालय से अपने आपको विवादित भूमि का संक्रमणीय भूमिधर घोषित कर सरकारी रिकार्ड में अमल दरामद कराने की मांग की थी। इस मामले में तत्कालीन एसीएम प्रथम रामसूरत पांडेय ने वादी के पक्ष में निर्णय दिया।
इसकी शिकायत होने पर डीएम चंद्रभूषण सिंह ने एडीएम प्रशासन आरएन शर्मा, एडीएम वित्त एवं राजस्व उदय सिंह एवं डीजीसी के नेतृत्व में कमेटी बनाते हुए जांच के आदेश किये हैँ।
इधर एसीएम प्रथम न्यायालय से इस करीब 15 बीघा भूमि को नवीन परती से पुन: ग्राम सभा के खाते में दर्ज कराने के आदेश हुए। एसडीएम कोल जोगिंदर सिंह ने बताया कि उक्त भूमि से अतिक्रमण हटाकर इसे खाली करा लिया गया है।
जांच अधिकारी एवं एडीएम प्रशासन आरएन शर्मा ने स्वीकार किया कि इस प्रकरण की जांच शुरू हो गई है। एक दो दिनों में नतीजा आने की संभावना है।