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अलीगढ़... सर सैयद ने कौम की बदहाली दूर करने का प्रयास किया
Updated Tue, 24 Oct 2017 01:42 AM IST
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सर सैयद ने कौम की बदहाली दूर करने का किया प्रयास
ब्यूरो, अमर उजाला, अलीगढ़।
अमेरिका से आए एएमयू के पूर्व छात्र डॉ. अफजाल उस्मानी ने कहा कि एएमयू के संस्थापक सर सैयद अहमद खां ने अलीगढ़ आंदोलन द्वारा कौम की बदहाली को दूर करने का प्रयास किया जिससे राह पाकर शेख अब्दुल्ला और पापा मियां ने महिलाओं के लिए शिक्षा का प्रबंध करने की तरफ कदम बढ़ाये।
डॉ. उस्मानी एएमयू के वीमेंस कॉलेज आडिटोरियम में सर सैयद तथा अलीगढ़ आंदोलन विषय पर व्याख्यान दे रहे थे। उन्होंने कहा कि सर सैयद ने ब्रिटिश सरकार का सदस्य बनना इसलिए स्वीकार कर लिया कि वह अपनी कौम को विकास के पथ पर अग्रसर करना चाहते थे।
उन्होंने मात्र 30 वर्ष की आयु में ‘आसर-उस-सनादीद’ पुस्तक लिखी जो उनकी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान कायम होने का कारण बनी। उन्होंने कहा कि सर सैयद ने गदर के हालात को अपनी आंखों से देखा तथा उन्होंने असबाब-बगतावत-ए-हिन्द एवं सरकशी जिला बिजनोर पुस्तकें लिखीं तथा अंग्रेज सरकार को यह बताने का प्रयास किया कि बगावत का कारण वो नहीं जो सरकार समझ रही है। बल्कि वह हैं जिन्हें वे समझ ही न सके।
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ब्यूरो, अमर उजाला, अलीगढ़।
अमेरिका से आए एएमयू के पूर्व छात्र डॉ. अफजाल उस्मानी ने कहा कि एएमयू के संस्थापक सर सैयद अहमद खां ने अलीगढ़ आंदोलन द्वारा कौम की बदहाली को दूर करने का प्रयास किया जिससे राह पाकर शेख अब्दुल्ला और पापा मियां ने महिलाओं के लिए शिक्षा का प्रबंध करने की तरफ कदम बढ़ाये।
डॉ. उस्मानी एएमयू के वीमेंस कॉलेज आडिटोरियम में सर सैयद तथा अलीगढ़ आंदोलन विषय पर व्याख्यान दे रहे थे। उन्होंने कहा कि सर सैयद ने ब्रिटिश सरकार का सदस्य बनना इसलिए स्वीकार कर लिया कि वह अपनी कौम को विकास के पथ पर अग्रसर करना चाहते थे।
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उन्होंने मात्र 30 वर्ष की आयु में ‘आसर-उस-सनादीद’ पुस्तक लिखी जो उनकी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान कायम होने का कारण बनी। उन्होंने कहा कि सर सैयद ने गदर के हालात को अपनी आंखों से देखा तथा उन्होंने असबाब-बगतावत-ए-हिन्द एवं सरकशी जिला बिजनोर पुस्तकें लिखीं तथा अंग्रेज सरकार को यह बताने का प्रयास किया कि बगावत का कारण वो नहीं जो सरकार समझ रही है। बल्कि वह हैं जिन्हें वे समझ ही न सके।
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