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तीसरे दिन भी नहीं मिला अकरम, परिवार में नहीं जल चूल्हे
Updated Fri, 16 Feb 2018 02:28 AM IST
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क्राइम डेस्क, अमर उजाला, अलीगढ़।
बाडी बनाने के पाउडर से किडनी फेल होने का शिकार होने वाले युवक अकरम का तीसरे दिन भी कुछ अता पता नहीं चला है। बदायूं के गुन्नौर में अकरम की लोकेशन मिलने के बाद परिजन वहीं पहुंच गए हैं और अकरम की तलाश कर रहे हैं।
दूसरी ओर जो परिजन यहीं रह गए हैं उनका रो रोकर बुरा हाल है। परिवार में चूल्हे भी नहीं जले हैं। अकरम के संबंध में रिपोर्ट दर्ज करा दी गई है।
अकरम की तलाश में गए उसके परिजनों में से एक सलमान ने बताया कि गुरुवार को अकरम की तलाश नरौरा में की गई। यहां से गंगा के तट पर वह लोग कासगंज तक पहुंचे, लेकिन अकरम का कहीं पता नहीं लगा।
नरौरा में एक शव मिला जिसके संबंध में थाना प्रभारी नरौरा को सूचित कर दिया गया। वह शव 10 दिन पुराना था जो किसी और का था। इसके बाद कासगंज तक तलाश में कुछ हाथ नहीं आया। सभी लोग लौट आए हैं। शुक्रवार को एक झील पर उसकी तलाश की जाएगी। सलमान ने बताया कि परिवार में सभी का रो रोकर बुरा हाल है। खाना पीना भी मुश्किल हो गया है। सभी अकरम की राह देख रहे हैं।
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गौरतलब है कि किडनी फेल होने और उसके बाद अपनों की ही उपेक्षा मिलने से निराश होकर अकरम मंगलवार को घर छोड़कर चला गया और फोन पर सभी से विदा लेने की मुद्रा में कहा था कि उसका इंतजार नहीं किया जाए। इसके बाद उसका फोन बंद हो गया। उसकी लोकेशन गुन्नौर में मिली।
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....साथ के लिए....
धीमा जहर है जिम में मौत का पाउडर
अलीगढ़। बॉडी बनाने के लिए जिम्नेजियम में जो डिब्बाबंद पाउडर इस्तेमाल किया जा रहा है वह धीमा जहर है। अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय के जिमनेजियम में कोच और हेल्थ गुरु मजहर उल कमर कहते हैं कि इस समय शहर में करीब 130 से अधिक जिमनेजियम खुले हुए हैं। 95 फीसदी डिब्बे यानी पाउडर के धंधे से चल रहे हैं। यह डिब्बा पाउडर न हो तो इन जिमों का डिब्बा बंद हो जाए।
वह कहते हैं कि इनमें न तो प्रशिक्षित ट्रेनर हैं और न ही मानकों का पालन हो रहा है। नर्सिंग होम और कारखानों के बेसमेंटों तक में जिम चल रहे हैं जहां पर आक्सीजन का फ्लो बेहद कम रहता है। मजहर उल कमर कहते हैं कि आजकल देश के दुश्मन खुली लड़ाई नहीं लड़ते। इस मुल्क को आतंकवाद, पाकिस्तान, चीन, अमेरिका आदि देशों से ज्यादा खतरा इस धीमे जहर यानी बाडी बनाने के पाउडर से है। इन देशों ने अपने यहां पर इसको प्रतिबंधित कर दिया है और भारत में इसे भेज रहे हैं जिससे यहां की युवा पीढ़ी खोखली हो जाए।
सेहत के धंधे का काला सच (जैसा मजहर बताते हैं)
- शहर में अधिकांश जिम बेसमेंटों में चल रहे हैं, जिनमें आक्सीजन का फ्लो कम रहता है
- कुछ जिमों का मकसद विवादित जमीनों पर कब्जा और डिब्बा पाउडर को बेचना रह गया है
- डिब्बा पाउडर गाजियाबाद और नोएडा में बाहर से बल्कि में कौड़ियों के भाव आता है
- हेल्थ सप्लीमेंट के नाम पर इसकी पैकिंग की जाती है और महंगे दामों पर बेचा जाता है
ट्रीड मिल से हो रहे घुटने बेकार
अलीगढ़। मजहर उल कमर कहते हैं कि टहलने के लिए इस्तेमाल होने वाला ट्रीडमिल भी लोकल ही आ रहे हैं। इनसे घुटने बेकार हो रहे हैं, क्योंकि इस पर चलते समय शरीर का गुरुत्व कहीं और होता है और पैर का मूवमेंट कहीं और होता है। जिससे घुटने बेकार होते हैं। शहर के एक नामी परिवार के व्यक्ति के घुटने इसी तरह बेकार हो गए। जमीन पर सामान्य रूप से टहलना सबसे बेस्ट है।
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बाडी बनाने के पाउडर से किडनी फेल होने का शिकार होने वाले युवक अकरम का तीसरे दिन भी कुछ अता पता नहीं चला है। बदायूं के गुन्नौर में अकरम की लोकेशन मिलने के बाद परिजन वहीं पहुंच गए हैं और अकरम की तलाश कर रहे हैं।
दूसरी ओर जो परिजन यहीं रह गए हैं उनका रो रोकर बुरा हाल है। परिवार में चूल्हे भी नहीं जले हैं। अकरम के संबंध में रिपोर्ट दर्ज करा दी गई है।
अकरम की तलाश में गए उसके परिजनों में से एक सलमान ने बताया कि गुरुवार को अकरम की तलाश नरौरा में की गई। यहां से गंगा के तट पर वह लोग कासगंज तक पहुंचे, लेकिन अकरम का कहीं पता नहीं लगा।
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नरौरा में एक शव मिला जिसके संबंध में थाना प्रभारी नरौरा को सूचित कर दिया गया। वह शव 10 दिन पुराना था जो किसी और का था। इसके बाद कासगंज तक तलाश में कुछ हाथ नहीं आया। सभी लोग लौट आए हैं। शुक्रवार को एक झील पर उसकी तलाश की जाएगी। सलमान ने बताया कि परिवार में सभी का रो रोकर बुरा हाल है। खाना पीना भी मुश्किल हो गया है। सभी अकरम की राह देख रहे हैं।
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गौरतलब है कि किडनी फेल होने और उसके बाद अपनों की ही उपेक्षा मिलने से निराश होकर अकरम मंगलवार को घर छोड़कर चला गया और फोन पर सभी से विदा लेने की मुद्रा में कहा था कि उसका इंतजार नहीं किया जाए। इसके बाद उसका फोन बंद हो गया। उसकी लोकेशन गुन्नौर में मिली।
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....साथ के लिए....
धीमा जहर है जिम में मौत का पाउडर
अलीगढ़। बॉडी बनाने के लिए जिम्नेजियम में जो डिब्बाबंद पाउडर इस्तेमाल किया जा रहा है वह धीमा जहर है। अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय के जिमनेजियम में कोच और हेल्थ गुरु मजहर उल कमर कहते हैं कि इस समय शहर में करीब 130 से अधिक जिमनेजियम खुले हुए हैं। 95 फीसदी डिब्बे यानी पाउडर के धंधे से चल रहे हैं। यह डिब्बा पाउडर न हो तो इन जिमों का डिब्बा बंद हो जाए।
वह कहते हैं कि इनमें न तो प्रशिक्षित ट्रेनर हैं और न ही मानकों का पालन हो रहा है। नर्सिंग होम और कारखानों के बेसमेंटों तक में जिम चल रहे हैं जहां पर आक्सीजन का फ्लो बेहद कम रहता है। मजहर उल कमर कहते हैं कि आजकल देश के दुश्मन खुली लड़ाई नहीं लड़ते। इस मुल्क को आतंकवाद, पाकिस्तान, चीन, अमेरिका आदि देशों से ज्यादा खतरा इस धीमे जहर यानी बाडी बनाने के पाउडर से है। इन देशों ने अपने यहां पर इसको प्रतिबंधित कर दिया है और भारत में इसे भेज रहे हैं जिससे यहां की युवा पीढ़ी खोखली हो जाए।
सेहत के धंधे का काला सच (जैसा मजहर बताते हैं)
- शहर में अधिकांश जिम बेसमेंटों में चल रहे हैं, जिनमें आक्सीजन का फ्लो कम रहता है
- कुछ जिमों का मकसद विवादित जमीनों पर कब्जा और डिब्बा पाउडर को बेचना रह गया है
- डिब्बा पाउडर गाजियाबाद और नोएडा में बाहर से बल्कि में कौड़ियों के भाव आता है
- हेल्थ सप्लीमेंट के नाम पर इसकी पैकिंग की जाती है और महंगे दामों पर बेचा जाता है
ट्रीड मिल से हो रहे घुटने बेकार
अलीगढ़। मजहर उल कमर कहते हैं कि टहलने के लिए इस्तेमाल होने वाला ट्रीडमिल भी लोकल ही आ रहे हैं। इनसे घुटने बेकार हो रहे हैं, क्योंकि इस पर चलते समय शरीर का गुरुत्व कहीं और होता है और पैर का मूवमेंट कहीं और होता है। जिससे घुटने बेकार होते हैं। शहर के एक नामी परिवार के व्यक्ति के घुटने इसी तरह बेकार हो गए। जमीन पर सामान्य रूप से टहलना सबसे बेस्ट है।