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शेरवानी और सलाम की संस्कृति खत्म होने से चिंतित थे यूसुफी
Updated Tue, 04 Jul 2017 11:55 PM IST
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शेरवानी और सलाम की संस्कृति खत्म होने से चिंतित थे यूसुफी
ब्यूरो, अमर उजाला अलीगढ़।
1857 के बाद हिंदुस्तानी मुसलमानों का इतिहास और उनकी संस्कृति अलीगढ़ आंदोलन एवं एएमयू के प्रभाव का उल्लेख किये बिना अधूरी है। यह कहना है कि एएमयू यूजीसी एचआरडी सेंटर के निदेशक प्रो. एआर किदवई का। इस बात का जिक्र उन्होंने अपने लेख ‘द क्रिस्टल ग्लोब’ में किया है। इस लेख को सिंगापुर स्थित पुस्तक प्रकाशन ने अंतरराष्ट्रीय ख्याति की पुस्तक ‘लिटरेरी सेल्फीज’ में शामिल किया है।
प्रो. एआर किदवई ने इस लेख में उर्दू के दो महान लेखकों मुश्ताक अहमद यूसुफी और कुर्रतुलऐन हैदर की रचनाओं में अलीगढ़ के वर्णन को रेखांकित किया है। उन्होंने बताया है कि मुश्ताक अहमद यूसुफी भारत के बेहतरीन व्यंगकार थे। जिनके लेखन की शुरुआत एएमयू में हुई थी। ज्ञानपीठ अवार्ड हासिल करने वाली उर्दू उपन्यासकार कुर्रतुलऐन हैदर की परवरिश अलीगढ़ में हुई। उनके पिता एएमयू के पहले रजिस्ट्रार थे। प्रोफेसर किदवई ने इन महान लेखकों के समय में अलीगढ़ के जीवन के रोचक पहलुओं पर प्रकाश डाला है। उन्होंने बताया कि यूसुफी ने अपने लेख में तेजी से गायब होती जा रही अलीगढ़ की शेरवानी और सलाम की संस्कृति के प्रति चिंता जताई। साथ ही अलीगढ़ के पटल से लुप्त होते जा रहे ऐतिहासिक स्थलों के लिए कुर्रतुलऐन हैदर की भावनाओं को भी लिखा गया है।
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ब्यूरो, अमर उजाला अलीगढ़।
1857 के बाद हिंदुस्तानी मुसलमानों का इतिहास और उनकी संस्कृति अलीगढ़ आंदोलन एवं एएमयू के प्रभाव का उल्लेख किये बिना अधूरी है। यह कहना है कि एएमयू यूजीसी एचआरडी सेंटर के निदेशक प्रो. एआर किदवई का। इस बात का जिक्र उन्होंने अपने लेख ‘द क्रिस्टल ग्लोब’ में किया है। इस लेख को सिंगापुर स्थित पुस्तक प्रकाशन ने अंतरराष्ट्रीय ख्याति की पुस्तक ‘लिटरेरी सेल्फीज’ में शामिल किया है।
प्रो. एआर किदवई ने इस लेख में उर्दू के दो महान लेखकों मुश्ताक अहमद यूसुफी और कुर्रतुलऐन हैदर की रचनाओं में अलीगढ़ के वर्णन को रेखांकित किया है। उन्होंने बताया है कि मुश्ताक अहमद यूसुफी भारत के बेहतरीन व्यंगकार थे। जिनके लेखन की शुरुआत एएमयू में हुई थी। ज्ञानपीठ अवार्ड हासिल करने वाली उर्दू उपन्यासकार कुर्रतुलऐन हैदर की परवरिश अलीगढ़ में हुई। उनके पिता एएमयू के पहले रजिस्ट्रार थे। प्रोफेसर किदवई ने इन महान लेखकों के समय में अलीगढ़ के जीवन के रोचक पहलुओं पर प्रकाश डाला है। उन्होंने बताया कि यूसुफी ने अपने लेख में तेजी से गायब होती जा रही अलीगढ़ की शेरवानी और सलाम की संस्कृति के प्रति चिंता जताई। साथ ही अलीगढ़ के पटल से लुप्त होते जा रहे ऐतिहासिक स्थलों के लिए कुर्रतुलऐन हैदर की भावनाओं को भी लिखा गया है।
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