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शहरी लोग ज्यादा आ रहे प्रोस्टेट कैंसर की चपेट में
Updated Tue, 26 Jun 2018 01:36 AM IST
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न्यूज डेस्क, अमर उजाला, अलीगढ़।
शहरी क्षेत्र के अधिकांश लोग प्रोस्टेट कैंसर की चपेट में ज्यादा आ रहे हैं। यह कहना है कि अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय के जंतु विज्ञान विभाग के जेनेटिक्स सेक्शन के असिस्टेंट प्रो. डॉ. हिफजुर रहमान सिद्दीकी का। विभाग में स्थापित मॉलिक्यूलर कैंसर जेनेटिक्स एंड ट्रांसलेशनल रिसर्च लैब में वह कैंसर पर रिसर्च कर रहे हैं।
डॉ. हिफजुर रहमान का कहना है कि भारत में प्रोस्टेट एवं लीवर कैंसर के मरीजों की संख्या बढ़ रही है। भारत में हर साल 15 लाख कैंसर के मामले सामने आते हैं। शहरी क्षेत्रों में मरीजों की संख्या ज्यादा है। 2020 में कैंसर रोगियों की संख्या 18 लाख तक पहुंचने की आशंका है। हर साल आठ लाख लोग कैंसर से मर जाते है। उनका कहना है कि वेस्टर्न कल्चर का अंधानुकरण कैंसर का प्रमुख कारण है। खासकर पश्चिमी खान-पान हैबिट सबसे ज्यादा नुकसान कर रहा है।
मांसाहारी भोजन के साथ शराब का सेवन करने वाले लोगों को कैंसर का खतरा दोगुना हो जाता है। इसके अतिरिक्त पानी एवं प्रदूषण भी कैंसर के लिए जिम्मेदार है। उल्लेखनीय है कि डॉ. हिफजुर अमेरिकन एसोसिएशन फॉर कैंसर रिसर्च के सदस्य हैं और अमेरिका में करीब आठ वर्ष कैंसर पर कार्य करने के बाद एएमयू में आए हैं। भारत सरकार के विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्रालय द्वारा कैंसर स्टेम सेल पर रिसर्च के लिए हाल ही में 60 लाख रुपये की राशि प्रदान की गई है। उनके साथ जंतु विज्ञान विभाग के डॉ. जीजीएचए शादाब भी कार्य कर रहे हैं।
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कैंसर स्टेम सेल
कैंसर स्टेम सेल ऐसे सेल होते हैं। जो ट्यूमर में पाए जाते हैं। जो कैंसर के बार-बार होने के लिए उत्तरदायी होते हैं। कैंसर की प्रारंभिक थेरेपी में कीमियों थेरेपिक दवाओं या थेरेपी के द्वारा अधिकतर कैंसर के सेल्स को मार दिया जाता है। हालांकि कुछ सेल शेष रह जाते हैं और इनसे ट्यूमर बन जाता है। जिससे कैंसर के दोबारा होने का खतरा पैदा हो जाता है। इन सेल्स को मारने के लिये वर्तमान समय में कोई दवा उपलब्ध नहीं है।
डॉ. हिफजुर रहमान सिद्दीकी गत एक दशक से इन सेल पर शोध कार्य कर रहे हैं और हाल ही में उन्होंने एएमयू में कैंसर स्टेम सेल पर शोध के लिए एक विशेष प्रयोगशाला की स्थापना की है। उन्होंने कहा है कि कीमियो थेरेपी में वर्तमान समय में विभिन्न रसायनों का प्रयोग किया जाता है। जिसके अनेक विपरीत प्रभाव होते हैं। उन्होंने बताया कि वह अपने शोध में ऐसे रसायनों की भी खोज करेंगे, जिनके प्रयोग से मानव के शरीर पर अधिक विपरीत प्रभाव न हों।
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शहरी क्षेत्र के अधिकांश लोग प्रोस्टेट कैंसर की चपेट में ज्यादा आ रहे हैं। यह कहना है कि अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय के जंतु विज्ञान विभाग के जेनेटिक्स सेक्शन के असिस्टेंट प्रो. डॉ. हिफजुर रहमान सिद्दीकी का। विभाग में स्थापित मॉलिक्यूलर कैंसर जेनेटिक्स एंड ट्रांसलेशनल रिसर्च लैब में वह कैंसर पर रिसर्च कर रहे हैं।
डॉ. हिफजुर रहमान का कहना है कि भारत में प्रोस्टेट एवं लीवर कैंसर के मरीजों की संख्या बढ़ रही है। भारत में हर साल 15 लाख कैंसर के मामले सामने आते हैं। शहरी क्षेत्रों में मरीजों की संख्या ज्यादा है। 2020 में कैंसर रोगियों की संख्या 18 लाख तक पहुंचने की आशंका है। हर साल आठ लाख लोग कैंसर से मर जाते है। उनका कहना है कि वेस्टर्न कल्चर का अंधानुकरण कैंसर का प्रमुख कारण है। खासकर पश्चिमी खान-पान हैबिट सबसे ज्यादा नुकसान कर रहा है।
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मांसाहारी भोजन के साथ शराब का सेवन करने वाले लोगों को कैंसर का खतरा दोगुना हो जाता है। इसके अतिरिक्त पानी एवं प्रदूषण भी कैंसर के लिए जिम्मेदार है। उल्लेखनीय है कि डॉ. हिफजुर अमेरिकन एसोसिएशन फॉर कैंसर रिसर्च के सदस्य हैं और अमेरिका में करीब आठ वर्ष कैंसर पर कार्य करने के बाद एएमयू में आए हैं। भारत सरकार के विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्रालय द्वारा कैंसर स्टेम सेल पर रिसर्च के लिए हाल ही में 60 लाख रुपये की राशि प्रदान की गई है। उनके साथ जंतु विज्ञान विभाग के डॉ. जीजीएचए शादाब भी कार्य कर रहे हैं।
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कैंसर स्टेम सेल
कैंसर स्टेम सेल ऐसे सेल होते हैं। जो ट्यूमर में पाए जाते हैं। जो कैंसर के बार-बार होने के लिए उत्तरदायी होते हैं। कैंसर की प्रारंभिक थेरेपी में कीमियों थेरेपिक दवाओं या थेरेपी के द्वारा अधिकतर कैंसर के सेल्स को मार दिया जाता है। हालांकि कुछ सेल शेष रह जाते हैं और इनसे ट्यूमर बन जाता है। जिससे कैंसर के दोबारा होने का खतरा पैदा हो जाता है। इन सेल्स को मारने के लिये वर्तमान समय में कोई दवा उपलब्ध नहीं है।
डॉ. हिफजुर रहमान सिद्दीकी गत एक दशक से इन सेल पर शोध कार्य कर रहे हैं और हाल ही में उन्होंने एएमयू में कैंसर स्टेम सेल पर शोध के लिए एक विशेष प्रयोगशाला की स्थापना की है। उन्होंने कहा है कि कीमियो थेरेपी में वर्तमान समय में विभिन्न रसायनों का प्रयोग किया जाता है। जिसके अनेक विपरीत प्रभाव होते हैं। उन्होंने बताया कि वह अपने शोध में ऐसे रसायनों की भी खोज करेंगे, जिनके प्रयोग से मानव के शरीर पर अधिक विपरीत प्रभाव न हों।