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खुद भी चलें हिफाजत से, और रहें सलामत से
Updated Mon, 19 Feb 2018 02:36 AM IST
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खुद भी चलें हिफाजत से, और रहें सलामत से
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, अलीगढ़।
सड़क पर लोगों को सुरक्षित तरीके से वाहन चलाना चाहिए। यह भी ध्यान रखना चाहिए कि सड़क पर चल रहे दूसरे वाहनों से कैसे बचाव किया जा सके? यदि खुद के वाहन के साथ दूसरों के वाहन चलाने पर भी नजर रहेगी तो सड़क पर होने वाले हादसे कम होंगे।
मोबाइल के प्रयोग से रहें दूर
वाहन चलाते समय और खास तौर से दो पहिया वाहन चलाते समय मोबाइल के प्रयोग से बचें। यह दुर्घटना होने का सबसे अहम कारण सामने आया है। मोबाइल कॉल को रिसीव करते समय वाहन पर या सड़क पर दूसरे वाहनों से बचने के लिए अपनी बाइक पर नियंत्रण सबसे कम हो जाता है। जिला अस्पताल के सीएमएस डॉ. रामकिशन कहते हैं कि वाहन चलाते समय मोबाइल के प्रयोग से हादसों में बढ़ोतरी हो रही है। उनके पास इमरजेंसी में आने वाले ऐसे मामलों की संख्या ज्यादा है।
सुरक्षित वाहन चलाने के कुुछ और टिप्स
- सबसे ज्यादा जरूरी है कि वाहन को नियंत्रित या कम गति से चलाना चाहिए।
- दो पहिया वाहन पर हेलमेट और कार में सीट बेल्ट का प्रयोग जरूर करें।
- वाहन के इंडीकेटर हमेशा सही स्थिति में रखें। यह पीछे चल रहे वाहन चालक के लिए जरूरी है।
- वाहन का बेक्रिंग सिस्टम दुरुस्त होना चाहिए, साथ ही अगले ब्रेक भी सही हों।
क्या हैं बीमा कंपनी के नियम
बीमा बचत अभिकर्ता शरद बंसल कहते हैं कि अगर किसी दो पहिया या चार पहिया वाहन को कोई नाबालिग चला रहा है और कोई हादसा होता है तो न तो वह व्यक्ति जो हादसे का शिकार हुआ है, उसे कोई क्लेम मिलेगा और न नाबालिग को ही क्लेम मिलेगा। यहां तक कि गाड़ी में जो नुकसान हुआ है, उसका भी कोई क्लेम नहीं मिलेगा। इस तरह नाबालिग के गाड़ी चलाने पर नुकसान ही नुकसान हैं।
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क्या कहता है कानून
वरिष्ठ अधिवक्ता राम कृष्ण तिवारी कहते हैं कि नाबालिग के वाहन चलाने और हादसा होने के मामले में गाड़ी का रजिस्ट्रेशन जिस व्यक्ति के नाम है उसके खिलाफ कार्रवाई होगी। अदालत उससे पूछेगी कि उसने अपना वाहन नाबालिग के हाथ में क्यों थमाया? ऐसे में नाबालिग के खिलाफ तो जो संगत धाराओं में कार्रवाई होगी ही, वाहन स्वामी भी कार्रवाई के दायरे में होगा।
बिना हेलमेट और सीटबेल्ट पर 1000 ई-चालान कटे
परिवहन विभाग ने बिना हेलमेट और सीट बेल्ट न लगाकर चलने वाले दोपहिया व चौपहिया वाहन चालकों के खिलाफ अभियान चलाया। इस दौरान विभाग ने करीब 1000 लोगों के चालान किए। एआरटीओ प्रवर्तन व प्रशासन अमिताभ चतुर्वेदी ने बताया कि अभियान लोगों को हेलमेट और सीट बेल्ट लगाने के लिए जागरूक किया गया। इस दौरान के ई-चालान काटे गए और 50 हजार रुपये का शमन शुल्क वसूल किया गया।
वाहन चालकों को बिना लाइसेंस और बीमा के गाड़ी नहीं चलानी चाहिए। दुर्घटना होने पर सबसे पहले पुलिस बीमा और लाइसेंस ही मांगती है। ड्राइविंग के समय यदि चालक की या उसकी गाड़ी से टकराकर किसी और की मौत हो जाती है तो ऐसे केस में बीमा कंपनी को काफी फायदा हो जाता है और क्लेम की राशि चालक या गाड़ी मालिक से वसूली जाती है। प्रत्येक बुधवार को अभियान चलाया जा रहा है।
-राधेश्याम, आरटीओ अलीगढ़।
‘अभिभावकों से अपील है कि वह वह अपने बच्चों को समझाएं कि वह दोपहिया या चार पहिया वाहन का प्रयोग न करें। जब वह बालिग हो जाएं और ड्राइविंग लाइसेंस बनवाने के बाद ही वाहन सुरक्षित तरीके से चलाएं। बच्चों को बालिग होने के बाद ही वाहन खरीदवाएं। वाहन का बीमा जरूर कराएं। साथ ही मान्य ड्राइविंग लाइसेंस साथ रखें।’
-राजेश कुमार पांडेय, एसएसपी।
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न्यूज डेस्क, अमर उजाला, अलीगढ़।
सड़क पर लोगों को सुरक्षित तरीके से वाहन चलाना चाहिए। यह भी ध्यान रखना चाहिए कि सड़क पर चल रहे दूसरे वाहनों से कैसे बचाव किया जा सके? यदि खुद के वाहन के साथ दूसरों के वाहन चलाने पर भी नजर रहेगी तो सड़क पर होने वाले हादसे कम होंगे।
मोबाइल के प्रयोग से रहें दूर
वाहन चलाते समय और खास तौर से दो पहिया वाहन चलाते समय मोबाइल के प्रयोग से बचें। यह दुर्घटना होने का सबसे अहम कारण सामने आया है। मोबाइल कॉल को रिसीव करते समय वाहन पर या सड़क पर दूसरे वाहनों से बचने के लिए अपनी बाइक पर नियंत्रण सबसे कम हो जाता है। जिला अस्पताल के सीएमएस डॉ. रामकिशन कहते हैं कि वाहन चलाते समय मोबाइल के प्रयोग से हादसों में बढ़ोतरी हो रही है। उनके पास इमरजेंसी में आने वाले ऐसे मामलों की संख्या ज्यादा है।
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सुरक्षित वाहन चलाने के कुुछ और टिप्स
- सबसे ज्यादा जरूरी है कि वाहन को नियंत्रित या कम गति से चलाना चाहिए।
- दो पहिया वाहन पर हेलमेट और कार में सीट बेल्ट का प्रयोग जरूर करें।
- वाहन के इंडीकेटर हमेशा सही स्थिति में रखें। यह पीछे चल रहे वाहन चालक के लिए जरूरी है।
- वाहन का बेक्रिंग सिस्टम दुरुस्त होना चाहिए, साथ ही अगले ब्रेक भी सही हों।
क्या हैं बीमा कंपनी के नियम
बीमा बचत अभिकर्ता शरद बंसल कहते हैं कि अगर किसी दो पहिया या चार पहिया वाहन को कोई नाबालिग चला रहा है और कोई हादसा होता है तो न तो वह व्यक्ति जो हादसे का शिकार हुआ है, उसे कोई क्लेम मिलेगा और न नाबालिग को ही क्लेम मिलेगा। यहां तक कि गाड़ी में जो नुकसान हुआ है, उसका भी कोई क्लेम नहीं मिलेगा। इस तरह नाबालिग के गाड़ी चलाने पर नुकसान ही नुकसान हैं।
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क्या कहता है कानून
वरिष्ठ अधिवक्ता राम कृष्ण तिवारी कहते हैं कि नाबालिग के वाहन चलाने और हादसा होने के मामले में गाड़ी का रजिस्ट्रेशन जिस व्यक्ति के नाम है उसके खिलाफ कार्रवाई होगी। अदालत उससे पूछेगी कि उसने अपना वाहन नाबालिग के हाथ में क्यों थमाया? ऐसे में नाबालिग के खिलाफ तो जो संगत धाराओं में कार्रवाई होगी ही, वाहन स्वामी भी कार्रवाई के दायरे में होगा।
बिना हेलमेट और सीटबेल्ट पर 1000 ई-चालान कटे
परिवहन विभाग ने बिना हेलमेट और सीट बेल्ट न लगाकर चलने वाले दोपहिया व चौपहिया वाहन चालकों के खिलाफ अभियान चलाया। इस दौरान विभाग ने करीब 1000 लोगों के चालान किए। एआरटीओ प्रवर्तन व प्रशासन अमिताभ चतुर्वेदी ने बताया कि अभियान लोगों को हेलमेट और सीट बेल्ट लगाने के लिए जागरूक किया गया। इस दौरान के ई-चालान काटे गए और 50 हजार रुपये का शमन शुल्क वसूल किया गया।
वाहन चालकों को बिना लाइसेंस और बीमा के गाड़ी नहीं चलानी चाहिए। दुर्घटना होने पर सबसे पहले पुलिस बीमा और लाइसेंस ही मांगती है। ड्राइविंग के समय यदि चालक की या उसकी गाड़ी से टकराकर किसी और की मौत हो जाती है तो ऐसे केस में बीमा कंपनी को काफी फायदा हो जाता है और क्लेम की राशि चालक या गाड़ी मालिक से वसूली जाती है। प्रत्येक बुधवार को अभियान चलाया जा रहा है।
-राधेश्याम, आरटीओ अलीगढ़।
‘अभिभावकों से अपील है कि वह वह अपने बच्चों को समझाएं कि वह दोपहिया या चार पहिया वाहन का प्रयोग न करें। जब वह बालिग हो जाएं और ड्राइविंग लाइसेंस बनवाने के बाद ही वाहन सुरक्षित तरीके से चलाएं। बच्चों को बालिग होने के बाद ही वाहन खरीदवाएं। वाहन का बीमा जरूर कराएं। साथ ही मान्य ड्राइविंग लाइसेंस साथ रखें।’
-राजेश कुमार पांडेय, एसएसपी।