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शैक्षिक गुणवता पर नजर रखने के लिए अधिकारियों की जिम्मेदारी तय
Updated Sat, 18 Aug 2018 02:12 AM IST
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न्यूज डेस्क, अमर उजाला, अलीगढ़।
जनपद के बेसिक शिक्षा अधिकारी तथा खंड शिक्षा अधिकारी अब सिर्फ विद्यालयों की निगरानी के साथ-साथ शैक्षिक गुणवत्ता में सुधार पर भी नजर रखेंगे। अन्यथा की स्थिति में दोषी मानते हुए शासन द्वारा दंडात्मक कार्रवाई से इन्हें गुजरना पड़ेगा। इस संबंध में बेसिक शिक्षा निदेशक ने निर्देश जारी किए हैं। साथ ही कहा है अधिकारियों को हर महीने स्कूलों के निरीक्षण की संख्या भी तय की गई है।
बता दें कि हाल ही में प्रदेश के बेसिक शिक्षा परिषद के स्कूलों के अंदर छात्र संख्या में गिरावट आई है। इसका एक प्रमुख कारण विद्यालयों में गुणवत्ता परक पढ़ाई न होना भी माना जा रहा है। हालांकि विगत सालों से स्कूलों के निरीक्षण की जिम्मेदारी अधिकारियों को दी गई थी।
इसके बावजूद अभी तक कोई सुधार नहीं हुआ है। इस कारण जारी किए गए नए शासनादेश में निर्देश हैं कि हर शिक्षा अधिकारी जिले के प्राथमिक व उच्च प्राथमिक स्कूलों में कम से कम दो बार अनिवार्य रूप से निरीक्षण करें। निरीक्षण में शैक्षिक गुणवत्ता की स्थिति तथा छात्रों की संख्या का आंकलन मुख्य रहेगा।
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इसके अलावा संसाधनों के साथ-साथ मिड-डे-मील की भी निगरानी की जाएगी। निर्देश यह भी दिए गए हैं कि स्कूलों में वास्तविक छात्र संख्या से अधिक बच्चे दिखाकर ड्रेस, बैग, जूते-मोजे, किताबें, मिड-डे-मील का भुगतान तो नहीं लिया जा रहा है। निरीक्षण में छात्र कम पाए जाने पर प्रधानाध्यापक व अध्यापकों जिम्मेदार होंगे। यह बात भी निरीक्षण पंजिका में अंकित की जानी है।
इसके बाद अगले महीने फिर से निरीक्षण कर पुरानी स्थिति का मिलान किया जाएगा। साथ ही शिक्षकों के गैरहाजिर होने पर आवश्यक कार्रवाई की जानी होगी। कक्षा एक व दो के बच्चों को अक्षर व अंकों का ज्ञान कराने के लिए नियमित अभ्यास कराने के भी निर्देश हैं। ऐसे में यदि अधिकारी अपनी सूचनाएं आनलाइन समय से नहीं देंगे तो भी कार्रवाई कराने की चेतावनी जारी की गई है।
करेंगे निरीक्षण
बीएसए व सर्व शिक्षा अभियान के जिला समन्वयक प्रतिमाह 10 विद्यालय, खंड शिक्षा अधिकारी प्रतिमाह 20 विद्यालय, ब्लाक संसाधन केंद्र समन्वयक प्रतिमाह 10 विद्यालयों का निरीक्षण करेंगे।
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जनपद के बेसिक शिक्षा अधिकारी तथा खंड शिक्षा अधिकारी अब सिर्फ विद्यालयों की निगरानी के साथ-साथ शैक्षिक गुणवत्ता में सुधार पर भी नजर रखेंगे। अन्यथा की स्थिति में दोषी मानते हुए शासन द्वारा दंडात्मक कार्रवाई से इन्हें गुजरना पड़ेगा। इस संबंध में बेसिक शिक्षा निदेशक ने निर्देश जारी किए हैं। साथ ही कहा है अधिकारियों को हर महीने स्कूलों के निरीक्षण की संख्या भी तय की गई है।
बता दें कि हाल ही में प्रदेश के बेसिक शिक्षा परिषद के स्कूलों के अंदर छात्र संख्या में गिरावट आई है। इसका एक प्रमुख कारण विद्यालयों में गुणवत्ता परक पढ़ाई न होना भी माना जा रहा है। हालांकि विगत सालों से स्कूलों के निरीक्षण की जिम्मेदारी अधिकारियों को दी गई थी।
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इसके बावजूद अभी तक कोई सुधार नहीं हुआ है। इस कारण जारी किए गए नए शासनादेश में निर्देश हैं कि हर शिक्षा अधिकारी जिले के प्राथमिक व उच्च प्राथमिक स्कूलों में कम से कम दो बार अनिवार्य रूप से निरीक्षण करें। निरीक्षण में शैक्षिक गुणवत्ता की स्थिति तथा छात्रों की संख्या का आंकलन मुख्य रहेगा।
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इसके अलावा संसाधनों के साथ-साथ मिड-डे-मील की भी निगरानी की जाएगी। निर्देश यह भी दिए गए हैं कि स्कूलों में वास्तविक छात्र संख्या से अधिक बच्चे दिखाकर ड्रेस, बैग, जूते-मोजे, किताबें, मिड-डे-मील का भुगतान तो नहीं लिया जा रहा है। निरीक्षण में छात्र कम पाए जाने पर प्रधानाध्यापक व अध्यापकों जिम्मेदार होंगे। यह बात भी निरीक्षण पंजिका में अंकित की जानी है।
इसके बाद अगले महीने फिर से निरीक्षण कर पुरानी स्थिति का मिलान किया जाएगा। साथ ही शिक्षकों के गैरहाजिर होने पर आवश्यक कार्रवाई की जानी होगी। कक्षा एक व दो के बच्चों को अक्षर व अंकों का ज्ञान कराने के लिए नियमित अभ्यास कराने के भी निर्देश हैं। ऐसे में यदि अधिकारी अपनी सूचनाएं आनलाइन समय से नहीं देंगे तो भी कार्रवाई कराने की चेतावनी जारी की गई है।
करेंगे निरीक्षण
बीएसए व सर्व शिक्षा अभियान के जिला समन्वयक प्रतिमाह 10 विद्यालय, खंड शिक्षा अधिकारी प्रतिमाह 20 विद्यालय, ब्लाक संसाधन केंद्र समन्वयक प्रतिमाह 10 विद्यालयों का निरीक्षण करेंगे।