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अलीगढ़ में डीएम ने निरस्त किया चेयरमैन का जाति प्रमाण पत्र
Updated Wed, 28 Jun 2017 01:19 AM IST
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खैर चेयरमैन का अनसूचित जाति का प्रमाण पत्र निरस्त
ब्यूरो, अमर उजाला, खैर (अलीगढ़)।
जिलाधिकारी ने खैर नगर पालिका के चेयरमैन पंकज पवार का अनुसूचित जाति का प्रमाण पत्र निरस्त कर दिया है। यह कार्रवाई जांच समिति की रिपोर्ट पर की गई है।
बता दें कि नगर पालिका से बर्खास्त सफाई कर्मचारी राजेश चौधरी व कस्बा निवासी केएल पंडित ने नौ मार्च को जिलाधिकारी को पत्र भेजकर खैर चेयरमैन पंकज पवार के प्रमाण पत्र को लेकर शिकायत की थी।
चेयरमैन पर अधिकारियों को गुमराह कर अनुसूचित जाति का प्रमाण पत्र बनवाने का आरोप लगाया था। डीएम ने इस पर जांच समिति गठित की थी। एडीएम वित्त एवं समाज कल्याण अधिकारी ने जांच की।
23 जून को जांच रिपोर्ट डीएम को सौंपी गई। इस पर जिलाधिकारी ऋषिकेश भास्कर याशोद ने कार्रवाई करते हुए तहसीलदार से जारी अनुसूचित जाति अगरिया के प्रमाण पत्र को अनुचित मानते हुए राजेश की अपील को निस्तारित किया गया है।
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चेयरमैन पंकज पवार का कहना है कि जिलाधिकारी ने तहसीलदार खैर कार्यालय से तीन दिसंबर 2008 को निर्गत जाति प्रमाण पत्र को अनुचित माना है, जबकि वह तो तहसीलदार ने पहले ही निरस्त कर दिया था।
इससे पहले पांच नवंबर 2008 को जारी जाति प्रमाण पत्र को तत्कालीनतहसीलदार ने सही मानते हुए चार जनवरी 2010 को बहाल कर दिया था। जिलाधिकारी ने एक पक्षीय कार्रवाई की है। उन्हें नहीं सुना गया है। वह न्याय के लिए मंडलायुक्त की अदालत की शरण लेंगे।
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ब्यूरो, अमर उजाला, खैर (अलीगढ़)।
जिलाधिकारी ने खैर नगर पालिका के चेयरमैन पंकज पवार का अनुसूचित जाति का प्रमाण पत्र निरस्त कर दिया है। यह कार्रवाई जांच समिति की रिपोर्ट पर की गई है।
बता दें कि नगर पालिका से बर्खास्त सफाई कर्मचारी राजेश चौधरी व कस्बा निवासी केएल पंडित ने नौ मार्च को जिलाधिकारी को पत्र भेजकर खैर चेयरमैन पंकज पवार के प्रमाण पत्र को लेकर शिकायत की थी।
चेयरमैन पर अधिकारियों को गुमराह कर अनुसूचित जाति का प्रमाण पत्र बनवाने का आरोप लगाया था। डीएम ने इस पर जांच समिति गठित की थी। एडीएम वित्त एवं समाज कल्याण अधिकारी ने जांच की।
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23 जून को जांच रिपोर्ट डीएम को सौंपी गई। इस पर जिलाधिकारी ऋषिकेश भास्कर याशोद ने कार्रवाई करते हुए तहसीलदार से जारी अनुसूचित जाति अगरिया के प्रमाण पत्र को अनुचित मानते हुए राजेश की अपील को निस्तारित किया गया है।
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चेयरमैन पंकज पवार का कहना है कि जिलाधिकारी ने तहसीलदार खैर कार्यालय से तीन दिसंबर 2008 को निर्गत जाति प्रमाण पत्र को अनुचित माना है, जबकि वह तो तहसीलदार ने पहले ही निरस्त कर दिया था।
इससे पहले पांच नवंबर 2008 को जारी जाति प्रमाण पत्र को तत्कालीनतहसीलदार ने सही मानते हुए चार जनवरी 2010 को बहाल कर दिया था। जिलाधिकारी ने एक पक्षीय कार्रवाई की है। उन्हें नहीं सुना गया है। वह न्याय के लिए मंडलायुक्त की अदालत की शरण लेंगे।