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सेहत के हिसाब से फन डे नहीं
Updated Thu, 22 Jun 2017 11:24 PM IST
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सेहत के लिहाज से संडे नहीं फन डे
ब्यूरो, अमर उजाला, अलीगढ़।
वीक एंड पर मौज मस्ती के बाद होटल में पसंदीदा खाना खाना और बाद में आइसक्रीम लेना। यह आपके लिए फन डे हो सकता है, लेकिन आपकी सेहत के लिए नहीं।
सामाजिक संस्था उड़ान ने स्थानीय संदर्भ में किए गए सर्वे में पाया है कि वीकेंड पर बाहर घूमने और खाना खाने जाने वाले लोगों की डाइट में फाइबर की बहुत कम मात्रा पाई गई है। साथ ही जंक फूड का प्रयोग बहुत ही ज्यादा मात्रा में पाया गया है।
सर्वे में पाया गया है कि संडे को जो डाइट लोगों ने ली है, उसमें सबसे कम मात्रा फाइबर (रेशेदार पदार्थ) तथा शुगर की मात्रा सबसे ज्यादा रही। यह सर्वे 16 हफ्तों की अवधि में पूरा किया गया।
उड़ान सोसायटी के अध्यक्ष और वरिष्ठ समाज शास्त्री डॉ. ज्ञानेंद्र मिश्रा कहते हैं कि सर्वे में यह भी पाया गया कि वीकेंड पर बाहर जाने वाली स्थिति रखने वाले परिवारों के लोग बैठे रहना चाहते हैं और रविवार को बाहर खाना उनके लिए एक सेलीब्रेशन की तरह होता है।
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मोहन लाल गौतम महिला चिकित्सालय की सीएमएस डॉ. गीता प्रधान कहती हैं कि यह सही है कि इस समय खानपान की आदतें बेहद अनियमित हो रही हैं, जो कि सेहत के लिए सही नहीं है।
‘ संडे को बाहर का खाना अन्य दिनों की अपेक्षा ज्यादा कैलोरी और ज्यादा फैट युक्त होता है। इसकी अपेक्षा शारीरिक श्रम कम होता है। सर्वे का समूह वही वर्ग रहा जो मध्यम और उच्च मध्यम वर्ग से है। इसको सामाजिक चाल चलन से भी जोड़कर देखा जा सकता है’
डॉ. ज्ञानेंद्र मिश्रा, अध्यक्ष, उड़ान सोसायटी
ब्यूरो, अमर उजाला, अलीगढ़।
वीक एंड पर मौज मस्ती के बाद होटल में पसंदीदा खाना खाना और बाद में आइसक्रीम लेना। यह आपके लिए फन डे हो सकता है, लेकिन आपकी सेहत के लिए नहीं।
सामाजिक संस्था उड़ान ने स्थानीय संदर्भ में किए गए सर्वे में पाया है कि वीकेंड पर बाहर घूमने और खाना खाने जाने वाले लोगों की डाइट में फाइबर की बहुत कम मात्रा पाई गई है। साथ ही जंक फूड का प्रयोग बहुत ही ज्यादा मात्रा में पाया गया है।
सर्वे में पाया गया है कि संडे को जो डाइट लोगों ने ली है, उसमें सबसे कम मात्रा फाइबर (रेशेदार पदार्थ) तथा शुगर की मात्रा सबसे ज्यादा रही। यह सर्वे 16 हफ्तों की अवधि में पूरा किया गया।
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उड़ान सोसायटी के अध्यक्ष और वरिष्ठ समाज शास्त्री डॉ. ज्ञानेंद्र मिश्रा कहते हैं कि सर्वे में यह भी पाया गया कि वीकेंड पर बाहर जाने वाली स्थिति रखने वाले परिवारों के लोग बैठे रहना चाहते हैं और रविवार को बाहर खाना उनके लिए एक सेलीब्रेशन की तरह होता है।
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मोहन लाल गौतम महिला चिकित्सालय की सीएमएस डॉ. गीता प्रधान कहती हैं कि यह सही है कि इस समय खानपान की आदतें बेहद अनियमित हो रही हैं, जो कि सेहत के लिए सही नहीं है।
‘ संडे को बाहर का खाना अन्य दिनों की अपेक्षा ज्यादा कैलोरी और ज्यादा फैट युक्त होता है। इसकी अपेक्षा शारीरिक श्रम कम होता है। सर्वे का समूह वही वर्ग रहा जो मध्यम और उच्च मध्यम वर्ग से है। इसको सामाजिक चाल चलन से भी जोड़कर देखा जा सकता है’
डॉ. ज्ञानेंद्र मिश्रा, अध्यक्ष, उड़ान सोसायटी