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योगी राज में जिले में 1060 ब्राह्मणों को मिले शस्त्र लाइसेंस
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राहुल दक्ष
कानपुर के विकास दुबे एनकाउंटर के बाद सूबे में शुरू हुई ब्राह्मणों पर सियासत में एक तस्वीर यह भी सामने आई है कि योगी राज में जिले में ब्राह्मणों को सुरक्षा के लिहाज से प्रशासन ने दिल खोल कर शस्त्र लाइसेंस जारी किए हैं। भाजपा सरकार का गठन होने के बाद बीते चार साल में 1060 ब्राह्मणों को शस्त्र लाइसेंस जारी हुए हैं। इनमें सर्वाधिक संख्या 2019 में रही, तब 394 लाइसेंस जारी हुए। इस वर्ष की बात की जाए तो अब तक 194 शस्त्र लाइसेंस जारी हो चुके हैं। जिला प्रशासन ने चार साल की रिपोर्ट तैयार करके शासन को भेजी है।
सुल्तानपुर जिले की लंभुआ सीट से भाजपा विधायक देवमणि द्विवेदी ने विकास दुबे एनकाउंटर के बाद अपनी ही सरकार के खिलाफ एक प्रकार से मोर्चा खोलने का काम किया था। उन्होंने अपनी ही सरकार से सवाल कर डाला कि भाजपा काल में ब्राह्मणों के खिलाफ हो रहे अपराधों को रोकने की पुलिस ने क्या नीति अपनाई। इसके साथ ही कितने ब्राह्मणों ने शस्त्र लाइसेंस के लिए आवेदन किया और कितनों को जारी किए गए। इन सवालों की सूची उन्होंने गृह विभाग को भेजी और मांग की कि योगी आदित्यनाथ स्वयं विधानसभा के आगामी सत्र में इन सवालों के जवाब दें। इसके बाद शासन ने सूबे के सभी जिलों के साथ ही अलीगढ़ से भी ब्राह्मणों द्वारा किए शस्त्र लाइसेंस के आवेदन और उनकी रिपोर्ट मांगी थी। इसके जवाब में जिला प्रशासन ने रिपोर्ट तैयार करके भेजी है। डीएम चंद्रभूषण सिंह के मुताबिक शासन द्वारा मांगी गई रिपोर्ट को जिले से भेज दिया गया है।
ब्राह्मणों पर टिकी सियासत, सपा-बसपा भी मैदान में
प्रदेश की कुल आबादी में 10 फीसदी आबादी ब्राह्मणों की है। सभी पार्टियां आगामी विधानसभा चुनावों में ब्राह्मणों को अपने पाले में कर वोट की निगाह से देख रही हैं। अपराधी विकास दुबे एनकाउंटर के बाद से यह मामला और गर्मा गया। बसपा ने जहां भगवान परशुराम के नाम पर अस्पताल बनवाने की वादा किया है। वहीं, सपा 108 फुट की मूर्ति बनवाने का एलान कर चुकी है।
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वर्ष आवेदन लाइसेंस जारी
2017 1100 158
2018 5205 314
2019 1019 394
2020 362 194
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कानपुर के विकास दुबे एनकाउंटर के बाद सूबे में शुरू हुई ब्राह्मणों पर सियासत में एक तस्वीर यह भी सामने आई है कि योगी राज में जिले में ब्राह्मणों को सुरक्षा के लिहाज से प्रशासन ने दिल खोल कर शस्त्र लाइसेंस जारी किए हैं। भाजपा सरकार का गठन होने के बाद बीते चार साल में 1060 ब्राह्मणों को शस्त्र लाइसेंस जारी हुए हैं। इनमें सर्वाधिक संख्या 2019 में रही, तब 394 लाइसेंस जारी हुए। इस वर्ष की बात की जाए तो अब तक 194 शस्त्र लाइसेंस जारी हो चुके हैं। जिला प्रशासन ने चार साल की रिपोर्ट तैयार करके शासन को भेजी है।
सुल्तानपुर जिले की लंभुआ सीट से भाजपा विधायक देवमणि द्विवेदी ने विकास दुबे एनकाउंटर के बाद अपनी ही सरकार के खिलाफ एक प्रकार से मोर्चा खोलने का काम किया था। उन्होंने अपनी ही सरकार से सवाल कर डाला कि भाजपा काल में ब्राह्मणों के खिलाफ हो रहे अपराधों को रोकने की पुलिस ने क्या नीति अपनाई। इसके साथ ही कितने ब्राह्मणों ने शस्त्र लाइसेंस के लिए आवेदन किया और कितनों को जारी किए गए। इन सवालों की सूची उन्होंने गृह विभाग को भेजी और मांग की कि योगी आदित्यनाथ स्वयं विधानसभा के आगामी सत्र में इन सवालों के जवाब दें। इसके बाद शासन ने सूबे के सभी जिलों के साथ ही अलीगढ़ से भी ब्राह्मणों द्वारा किए शस्त्र लाइसेंस के आवेदन और उनकी रिपोर्ट मांगी थी। इसके जवाब में जिला प्रशासन ने रिपोर्ट तैयार करके भेजी है। डीएम चंद्रभूषण सिंह के मुताबिक शासन द्वारा मांगी गई रिपोर्ट को जिले से भेज दिया गया है।
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ब्राह्मणों पर टिकी सियासत, सपा-बसपा भी मैदान में
प्रदेश की कुल आबादी में 10 फीसदी आबादी ब्राह्मणों की है। सभी पार्टियां आगामी विधानसभा चुनावों में ब्राह्मणों को अपने पाले में कर वोट की निगाह से देख रही हैं। अपराधी विकास दुबे एनकाउंटर के बाद से यह मामला और गर्मा गया। बसपा ने जहां भगवान परशुराम के नाम पर अस्पताल बनवाने की वादा किया है। वहीं, सपा 108 फुट की मूर्ति बनवाने का एलान कर चुकी है।
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वर्ष आवेदन लाइसेंस जारी
2017 1100 158
2018 5205 314
2019 1019 394
2020 362 194