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21 शौचालयों की कोडिंग न करना पड़ा भारी
Updated Sun, 22 Apr 2018 01:12 AM IST
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क्राइम डेस्क, अमर उजाल, अलीगढ़।
स्वच्छ भारत अभियान के दौरान चल रहे शौचालय निर्माण के दौरान जियो टैगिंग के लिए किए जाने वाले फोटोग्राफ के साथ कोडिंग न करना पंचायत राज विभाग की टीम को भारी पड़ गया। निरीक्षण के लिए गए सीडीओ ने कर्मचारियों को उनकी लापरवाही पर कड़ी फटकार लगाई और साथ ही साथ कोडिंग करने के निर्देश दिए।
सीडीओ दिनेश चंद्र शनिवार को दोपहर औचक निरीक्षण के लिए जिला पंचायत राज विभाग के कार्यालय पहुंचे थे। इस दौरान उन्होंने कंप्यूटर पर जियो टैगिंग का हाल जाना।
पता चला कि अप्रैल माह में 28392 शौचालयों के लक्ष्य के सापेक्ष सत्याग्रह से स्वच्छ गृह अभियान के तहत 28410 शौचालयों का निर्माण हो चुका है।
जियो टैगिंग के इस माह के 80 फीसदी लक्ष्य के सापेक्ष 76 प्रतिशत शौचालयों की जियो टैगिंग हो चुकी है। इस दौरान कुछ शौचालयों के फोटो अनएप्रूव्ड देखकर उनका पारा चढ़ गया।
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इन शौचालयों के फोटो के साथ कोडिंग भी नहीं थी। सीडीओ ने तत्काल फोटोग्राफ के साथ कोडिंग करके इसकी जियो टैगिंग के आदेश दिए। कर्मचारियों ने सफाई दी कि निजी तौर पर शौचालय बनवाने वाले ग्रामीण कोडिंग नहीं करने दे रहे हैं।
जिला पंचायत राज अधिकारी पारुल सिसौदिया ने बताया कि शौचालय निर्माण के बाद कोड डालने की व्यवस्था है और शौचालय के साथ लाभार्थी का फोटो भी होना अनिवार्य है।
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स्वच्छ भारत अभियान के दौरान चल रहे शौचालय निर्माण के दौरान जियो टैगिंग के लिए किए जाने वाले फोटोग्राफ के साथ कोडिंग न करना पंचायत राज विभाग की टीम को भारी पड़ गया। निरीक्षण के लिए गए सीडीओ ने कर्मचारियों को उनकी लापरवाही पर कड़ी फटकार लगाई और साथ ही साथ कोडिंग करने के निर्देश दिए।
सीडीओ दिनेश चंद्र शनिवार को दोपहर औचक निरीक्षण के लिए जिला पंचायत राज विभाग के कार्यालय पहुंचे थे। इस दौरान उन्होंने कंप्यूटर पर जियो टैगिंग का हाल जाना।
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पता चला कि अप्रैल माह में 28392 शौचालयों के लक्ष्य के सापेक्ष सत्याग्रह से स्वच्छ गृह अभियान के तहत 28410 शौचालयों का निर्माण हो चुका है।
जियो टैगिंग के इस माह के 80 फीसदी लक्ष्य के सापेक्ष 76 प्रतिशत शौचालयों की जियो टैगिंग हो चुकी है। इस दौरान कुछ शौचालयों के फोटो अनएप्रूव्ड देखकर उनका पारा चढ़ गया।
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इन शौचालयों के फोटो के साथ कोडिंग भी नहीं थी। सीडीओ ने तत्काल फोटोग्राफ के साथ कोडिंग करके इसकी जियो टैगिंग के आदेश दिए। कर्मचारियों ने सफाई दी कि निजी तौर पर शौचालय बनवाने वाले ग्रामीण कोडिंग नहीं करने दे रहे हैं।
जिला पंचायत राज अधिकारी पारुल सिसौदिया ने बताया कि शौचालय निर्माण के बाद कोड डालने की व्यवस्था है और शौचालय के साथ लाभार्थी का फोटो भी होना अनिवार्य है।