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जनपद में सड़ गया 1.42 लाख मीट्रिक टन आलू
Updated Sun, 07 Jan 2018 01:57 AM IST
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आशीष श्रीवास्तव, अमर उजाला, अलीगढ़।
आलू की दुर्दशा से परेशान किसानों द्वारा शनिवार को विधानसभा के बाहर सड़कों पर आलू फेंके जाने की घटना ने अन्नदाता की दुर्दशा सबके सामने ला दी है। जनपद में ही 1.42 लाख मीट्रिक टन आलू सड़ गया है।
किसानों की दुर्दशा का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि कोल्ड स्टोर स्वामियों द्वारा मेंटेनेंस के लिए 30 अक्तूबर तक आलू निकालने के अल्टीमेटम के बाद किसान क्वारसी से अतरौली तक ट्रैक्टर में माइक लगाकर 100 रुपये बोरी के हिसाब से आलू बेचने पर मजबूर हुए।
बताते चलें कि कोल्ड स्टोर में एक बोरी आलू रखने के एवज में किसान को 125 से 130 रुपये प्रति बोरी के हिसाब से भाड़ा देना होता है। खेत से कोल्ड तक आलू ले जाने का भाड़ा अलग से है। उद्यान विभाग के प्रभारी आलू सत्यप्रकाश ने स्वीकार किया कि जिले में पिछले सीजन में 27 हजार हेक्टेयर एरिया में 712000 मीट्रिक टन आलू का उत्पादन हुआ था।
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इसमें से करीब 20 फीसदी आलू कोल्ड स्टोरों में ही सड़ गया। यानी कि 1 लाख 42 हजार 400 मीट्रिक टन आलू बर्बाद हो गया। लागत निकालने के लिए किसानों ने बीज के लिए उपयोगी आलू को तो दोबारा से बुवाई के उपयोग में ले लिया और गुल्ला किस्म का आलू फेंक दिया।
नहीं काम आई योगी सरकार की प्रोत्साहन नीति
आलू किसानों के लिए योगी सरकार ने आलू प्रोत्साहन नीति लागू की थी। इसमें किसानों को 300 किमी से दूर आलू बेचने ले जाने पर रेट के हिसाब से भाड़े में सब्सिडी का प्रावधान था, लेकिन इस योजना की जटिलताओं के चक्कर में जनपद के एक भी किसान ने इसके लिए आवेदन नहीं किया।
क्या कहते हैं किसान
आलू के रेट पूरे साल कम रहे। रेट बढ़ने की आस में हमने आलू कोल्ड स्टोर से नहीं निकाला। अक्तूबर माह में कोल्ड स्टोर संचालकों ने मेंटेनेंस की बात कहते हुए किसानों को 30 अक्तूबर तक आलू निकालने का नोटिस थमा दिया। मरता क्या न करता की कहावत को चरित्रार्थ करते हुए हमने आलू को वहां से निकाला। वहां रखने पर हमें 125 से 130 रुपये बोरी के हिसाब से भाड़ा देना पड़ता। साख खराब होती वह अलग। मजबूरन आलू फेंकना पड़ा।
पृथ्वी सिंह चौहान, किसान निवासी हरदुआ
कोल्ड से आलू निकलने के बाद उसकी लागत तक नहीं निकली। हमने ट्रैक्टर में आलू की बोरियां भरकर रास्तों में खड़े रहकर माइक से उद्घोषणा कर आलू बेचने की कोशिश की, लेकिन कोई 100 रुपये बोरी के हिसाब से भी आलू लेने को तैयार नहीं हुआ।
ओमप्रकाश सिंह राघव, किसान निवासी नया बांस नरेंद्र गढ़ी
आलू की दुर्दशा से परेशान किसानों द्वारा शनिवार को विधानसभा के बाहर सड़कों पर आलू फेंके जाने की घटना ने अन्नदाता की दुर्दशा सबके सामने ला दी है। जनपद में ही 1.42 लाख मीट्रिक टन आलू सड़ गया है।
किसानों की दुर्दशा का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि कोल्ड स्टोर स्वामियों द्वारा मेंटेनेंस के लिए 30 अक्तूबर तक आलू निकालने के अल्टीमेटम के बाद किसान क्वारसी से अतरौली तक ट्रैक्टर में माइक लगाकर 100 रुपये बोरी के हिसाब से आलू बेचने पर मजबूर हुए।
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बताते चलें कि कोल्ड स्टोर में एक बोरी आलू रखने के एवज में किसान को 125 से 130 रुपये प्रति बोरी के हिसाब से भाड़ा देना होता है। खेत से कोल्ड तक आलू ले जाने का भाड़ा अलग से है। उद्यान विभाग के प्रभारी आलू सत्यप्रकाश ने स्वीकार किया कि जिले में पिछले सीजन में 27 हजार हेक्टेयर एरिया में 712000 मीट्रिक टन आलू का उत्पादन हुआ था।
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इसमें से करीब 20 फीसदी आलू कोल्ड स्टोरों में ही सड़ गया। यानी कि 1 लाख 42 हजार 400 मीट्रिक टन आलू बर्बाद हो गया। लागत निकालने के लिए किसानों ने बीज के लिए उपयोगी आलू को तो दोबारा से बुवाई के उपयोग में ले लिया और गुल्ला किस्म का आलू फेंक दिया।
नहीं काम आई योगी सरकार की प्रोत्साहन नीति
आलू किसानों के लिए योगी सरकार ने आलू प्रोत्साहन नीति लागू की थी। इसमें किसानों को 300 किमी से दूर आलू बेचने ले जाने पर रेट के हिसाब से भाड़े में सब्सिडी का प्रावधान था, लेकिन इस योजना की जटिलताओं के चक्कर में जनपद के एक भी किसान ने इसके लिए आवेदन नहीं किया।
क्या कहते हैं किसान
आलू के रेट पूरे साल कम रहे। रेट बढ़ने की आस में हमने आलू कोल्ड स्टोर से नहीं निकाला। अक्तूबर माह में कोल्ड स्टोर संचालकों ने मेंटेनेंस की बात कहते हुए किसानों को 30 अक्तूबर तक आलू निकालने का नोटिस थमा दिया। मरता क्या न करता की कहावत को चरित्रार्थ करते हुए हमने आलू को वहां से निकाला। वहां रखने पर हमें 125 से 130 रुपये बोरी के हिसाब से भाड़ा देना पड़ता। साख खराब होती वह अलग। मजबूरन आलू फेंकना पड़ा।
पृथ्वी सिंह चौहान, किसान निवासी हरदुआ
कोल्ड से आलू निकलने के बाद उसकी लागत तक नहीं निकली। हमने ट्रैक्टर में आलू की बोरियां भरकर रास्तों में खड़े रहकर माइक से उद्घोषणा कर आलू बेचने की कोशिश की, लेकिन कोई 100 रुपये बोरी के हिसाब से भी आलू लेने को तैयार नहीं हुआ।
ओमप्रकाश सिंह राघव, किसान निवासी नया बांस नरेंद्र गढ़ी