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यूपी विधानसभा चुनाव 2022: योगी सरकार से मुकाबले के लिए नई तैयारी में सपा, जाति, धर्म और छोटे दलों पर फोकस

Fri, 24 Sep 2021 09:49 PM IST
Shashidhar Pathak शशिधर पाठक
Updated Fri, 24 Sep 2021 09:49 PM IST
सार

  • नवरात्र के बाद नए जोश में होगा पूरे प्रदेश की हर विधानसभा का दौरा
  • बिहार की तरह उत्तर प्रदेश में ओवैसी नहीं कर पाएंगे बड़ा कारनामा

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Akhilesh Yadav Samajwadi Party in new preparation to compete with Yogi government Before Uttar Pradesh Assembly Election 2022
अखिलेश यादव - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने 2022 के लिए नारा गढ़वाया है- नई हवा है, नई सपा है। अखिलेश यादव के करीबी संजय लाठर के अनुसार उनकी पार्टी का मुकाबला योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में विधानसभा चुनाव लड़ने वाली भाजपा से होना है। सपा के रणनीतिकार को भरोसा है कि "नई हवा है, नई सपा है' के आगे 'अबकी बार फिर योगी सरकार' के दावों की पूरी हवा निकल जाएगी। सपा के एक अन्य रणनीतिकार अभिषेक मिश्रा भी भाजपा और बसपा को राजनीतिक रूप से कमजोर करने के लिए तैयारी में जुटे हैं। जबकि अखिलेश यादव की योजना नवरात्र के बाद पूरे प्रदेश के हर विधानसभा क्षेत्र में जाने और रथयात्रा करने की है।

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छोटे-छोटे दल हैं साथ, अगले महीने तक कई और के आने का दावा
समाजवादी पार्टी ने महान दल, राष्ट्रीय लोकदल को अपने खेमे में शामिल कर रखा है। बसपा के नेता लालजी वर्मा और राम अचल राजभर भी अब सपाई हो गए हैं। पार्टी के रणनीतिकारों ने अपना दल की नेताओं से भी चुनाव पूर्व गठबंधन की कोशिशें तेज कर दी है। राष्ट्रीय लोकदल के नेता जयंत चौधरी ने भी नवरात्र के बाद पश्चिम उ.प्र. समेत अन्य हिस्सों में यात्रा की योजना बनाई है। 
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जनवादी पार्टी के संजय चौहान, महान दल के मौर्या, समाजवादी पार्टी के पिछड़ा वर्ग प्रकोष्ठ के अध्यक्ष, पासी समाज से जुड़े सपा के नेता इंद्रजीत सरोज समेत 17 नेता टीम बनाकर पूरे प्रदेश में जनाधार बढ़ाने में लगे हैं। अभिषेक मिश्रा सपा के 10-12 विधायकों के साथ ब्राह्मणों को साधने की कोशिश कर रहे हैं। समाजवादी पार्टी की नजर कल्याण सिंह के न रहने के बाद अब लोध समाज पर भी टिक गई है। इसके अलावा कुर्मी, पटेल, निषाद, मल्लाह, केवट, कोइरी, कुशवाहा, नोनिया, धोनिया और अन्य पर पकड़ बनाने का अभियान चल रहा है।
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बसपा के पूर्व नेता और मायावती सरकार में मंत्री सुधीर गोयल भी मानते हैं कि भाजपा के खिलाफ अभी मुकाबले में सपा ही है। देखना है कि अखिलेश यादव इस अवसर का कैसे फायदा उठा पाते हैं। हालांकि सुधीर गोयल का कहना है कि अखिलेश यादव में मुलायम सिंह यादव वाली बात नहीं है।  

क्या ओवैसी बिगाड़ेंगे सपा का खेल?
समाजवादी पार्टी के नेताओं का कहना है कि ओवैसी को उ.प्र. में यह सपना नहीं देखना चाहिए। संजय लाठर कहते हैं कि उ.प्र. बिहार नहीं है। समाजवादी पार्टी को न तो ओवैसी की पार्टी से कोई खतरा है, न ही बसपा और कांग्रेस से। जहां तक सवाल कांग्रेस से गठबंधन का है तो इसकी किसी तरह की कोई संभावना भी नहीं लग रही है। 

लाठर के मुताबिक 2017 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस से गठबंधन करके पार्टी ने अपनी दुर्गति देख ली थी। अब इस अध्याय को नहीं दोहराना है। लाठर कहते हैं कि इस बार तो कांग्रेस काफी कमजोर हालत में है। प्रियंका गांधी भले लखनऊ में समय दे रही हैं, लेकिन चुनाव के बाद कांग्रेस के दहाई तक सिमट जाने की ही तस्वीर दिखाई दे रही है। 


टीम अखिलेश के लिए नारा गढऩे, गाने और प्रचार सामग्री में लगे सूत्र का कहना है कि हमें तो नवंबर-दिसंबर महीने का इंतजार है। क्योंकि अभी पत्ते खोल देने से भाजपा और उसके रणनीतिकार सतर्क हो जाएंगे। सूत्र का कहना है कि उ.प्र. विधानसभा का आगामी चुनाव काफी दिलचस्प होने जा रहा है। चुनाव की तारीख नजदीक आने दीजिए और आप देखेंगे कि धीरे धीरे भाजपा का भ्रम दूर हो रहा है।

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