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जिला पंचायत अध्यक्ष के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव से सदस्यों का डिगा 'विश्वास'
Sat, 13 Jul 2019 12:47 AM IST
मुकेश कुमार
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा
Published by: मुकेश कुमार
Updated Sat, 13 Jul 2019 12:47 AM IST
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गाड़ी रोके जाने पर पुलिस से बहस करते चौधरी यशपाल सिंह व अन्य
- फोटो : अमर उजाला
आगरा में 21 जून को जिला पंचायत के जिन 28 सदस्यों ने अविश्वास प्रस्ताव दिया था, इनमें से सभी इस पर कायम नहीं रह सके। स्थिति यह थी कि अविश्वास प्रस्ताव को पास कराने के लिए 26 सदस्य तक नहीं जुट पाए। ऐसी स्थिति में विपक्ष ने हंगामे की पटकथा तैयार की। शुक्रवार को बैठक के लिए बमुश्किल 23 सदस्य ही पहुंचे।
अविश्वास प्रस्ताव पास कराने या गिराने के लिए जिला पंचायत बैठक में 26 सदस्यों का समर्थन साबित करना होता है। इस प्रस्ताव को लाने में तो 28 सदस्य थे लेकिन इसे पास कराने के समय कई सदस्य दगा दे गए। इससे विपक्ष को अविश्वास प्रस्ताव पास न करा पाने का अहसास हो गया।
इसके बाद से ही रणनीति में बदलाव किया गया। सभी सदस्यों को सुबह 10:30 बजे शुरू होने वाली बैठक में दोपहर पौने बारह बजे लाया गया। इसके बाद भी सदस्य अंदर नहीं गए। गेट पर हंगामा कर समय गुजारने की कोशिश की।
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जब अंदर गए तो बैठक में उपस्थिति पंजिका पर किसी ने न तो नाम लिखा और न ही हस्ताक्षर किए। पहली रणनीति फेल हो जाने के बाद विपक्ष दूसरी रणनीति में सफल रहा। हंगामे की वजह से बैठक स्थगित कर दी गई।
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अविश्वास प्रस्ताव पास कराने या गिराने के लिए जिला पंचायत बैठक में 26 सदस्यों का समर्थन साबित करना होता है। इस प्रस्ताव को लाने में तो 28 सदस्य थे लेकिन इसे पास कराने के समय कई सदस्य दगा दे गए। इससे विपक्ष को अविश्वास प्रस्ताव पास न करा पाने का अहसास हो गया।
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इसके बाद से ही रणनीति में बदलाव किया गया। सभी सदस्यों को सुबह 10:30 बजे शुरू होने वाली बैठक में दोपहर पौने बारह बजे लाया गया। इसके बाद भी सदस्य अंदर नहीं गए। गेट पर हंगामा कर समय गुजारने की कोशिश की।
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जब अंदर गए तो बैठक में उपस्थिति पंजिका पर किसी ने न तो नाम लिखा और न ही हस्ताक्षर किए। पहली रणनीति फेल हो जाने के बाद विपक्ष दूसरी रणनीति में सफल रहा। हंगामे की वजह से बैठक स्थगित कर दी गई।
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कठेरिया की रणनीति रही सफल
जिला पंचायत अध्यक्ष की कुर्सी पर आमने-सामने भले ही भाजपा के प्रबल प्रताप और चौधरी यशपाल हों, लेकिन इसे दो सांसदों के वर्चस्व की जंग के तौर भी देखा जा रहा था। बताया जा रहा है कि प्रबल प्रताप को इटावा के सांसद व एससी आयोग के अध्यक्ष डॉ. रामशंकर कठेरिया और चौधरी यशपाल को आगरा से सांसद प्रो. एसपी सिंह बघेल का समर्थन था। विपक्ष के सामने कठेरिया की रणनीति की सफलता ही बताई जा रही है।
अविश्वास प्रस्ताव पास न होने में पूर्व सांसद चौधरी बाबूलाल की भी अहम भूमिका रही। दरअसल, उनके पुत्र राकेश चौधरी जिला पंचायत सदस्य हैं। उन्होंने अपने पुत्र को बैठक से ही दूर रखा।
सपा ने किया भाजपा का ‘समर्थन’
लोकसभा चुनाव में बसपा के साथ गठबंधन कर भाजपा के खिलाफ मोर्चा खोलने वाली सपा ने जिला पंचायत अध्यक्ष के अविश्वास प्रस्ताव पर बैठक में भाजपा के पक्ष में दिखी। अविश्वास प्रस्ताव पर सपा की पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष कुशल यादव ने अपने कुछ समर्थक सदस्यों के साथ भाजपा के ही दूसरे खेमे का साथ दिया।
अविश्वास प्रस्ताव पास न होने में पूर्व सांसद चौधरी बाबूलाल की भी अहम भूमिका रही। दरअसल, उनके पुत्र राकेश चौधरी जिला पंचायत सदस्य हैं। उन्होंने अपने पुत्र को बैठक से ही दूर रखा।
सपा ने किया भाजपा का ‘समर्थन’
लोकसभा चुनाव में बसपा के साथ गठबंधन कर भाजपा के खिलाफ मोर्चा खोलने वाली सपा ने जिला पंचायत अध्यक्ष के अविश्वास प्रस्ताव पर बैठक में भाजपा के पक्ष में दिखी। अविश्वास प्रस्ताव पर सपा की पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष कुशल यादव ने अपने कुछ समर्थक सदस्यों के साथ भाजपा के ही दूसरे खेमे का साथ दिया।
भाजपा संगठन ने बनाई दूरी
संगठन ने इस पूरे मामले से दूरी बना ली है। ब्रजक्षेत्र संगठन महामंत्री भवानी सिंह का कहना है कि इस चुनाव से पार्टी का कोई लेनादेना नहीं। ये व्यक्तिगत प्रयास होंगे। वे दोनों भले ही भाजपा से जुड़े हों लेकिन पार्टी की नीति है कि वह ऐसे चुनाव में भाग नहीं लेती।
हमारे कई सदस्यों को पुलिस-प्रशासन ने बैठक में नहीं पहुंचने दिया। उन्हें काफी पहले रोक दिया गया। हम दूसरी बैठक बुलाने के लिए आवेदन करेंगे और इसमें अविश्वास प्रस्ताव पास कराएंगे। हमारे पास पर्याप्त सदस्यों का समर्थन है।- चौधरी यशपाल, जिला पंचायत सदस्य (अविश्वास प्रस्ताव के नेतृत्वकर्ता)