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Mainpuri News: प्राचीन कला से जुड़ आत्मनिर्भर बन रहे युवा, तराश रहे किस्मत
Mon, 08 Aug 2022 11:30 AM IST
धीरेन्द्र सिंह
नीलेश शर्मा, मैनपुरी
नीलेश शर्मा, मैनपुरी
Published by: धीरेन्द्र सिंह
Updated Mon, 08 Aug 2022 11:30 AM IST
सार
शीशम की लकड़ी पर तांबे के तारों से किसी भी व्यक्ति, इमारत आदि का सजीव चित्र उकेरा जाता है। तारकशी देश और विदेश में पहचान रखती है। इसका इतिहास सैकड़ों साल पुराना है।
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प्रशिक्षण प्राप्त करते लोग
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
मैनपुरी में हस्तशिल्प से जुड़ी कला तारकशी यूं तो काफी प्राचीन है लेकिन एक जनपद एक उत्पाद योजना में शामिल होने के बाद से तारकशी में भविष्य तलाश रहे युवाओं को नया रास्ता मिला है। मैनपुरी का एक परिवार युवाओं की किस्मत को तारकशी के हुनर से तराश रहा है। प्रदेश के साथ ही देशभर के चार सौ युवा इस हुनर को सीखकर आत्मनिर्भर बन चुके हैं।
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तारकशी को प्रदेश सरकार ने एक जनपद एक उत्पाद योजना में शामिल किया है। इस हस्तशिल्प कला को पहले मोहल्ला देवपुरा निवासी रामस्वरूप शाक्य ने आगे बढ़ाया। वर्ष 2007 में रामस्वरूप शाक्य के निधन के बाद उनके पुत्र विनोद कुमार शाक्य, राजकुमार शाक्य और नेमीचंद्र शाक्य इस कला को आगे बढ़ा रहे हैं। तीनों भाई अब तक चार सौ से अधिक लोगों को तारकशी का प्रशिक्षण दे चुके हैं। प्रशिक्षण लेने वालों में प्रदेश के साथ ही देश के कई अन्य युवा भी शामिल हैं। आज ये सभी तारकशी की दम पर आत्मनिर्भर बन चुके हैं। एक जनपद एक उत्पाद में शामिल होने के बाद से अब जिला उद्योग केंद्र और हस्तशिल्प कला केंद्र की ओर से भी तारकशी का प्रशिक्षण युवाओं को दिलाया जा रहा है।
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- फोटो : अमर उजाला