{"_id":"805d0c39e8faf71caa80beb707a2c57e","slug":"young-boys-working-for-acid-attack-victim-hindi-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"शीरोज का आधार बने ‘हीरोज’","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
शीरोज का आधार बने ‘हीरोज’
ब्यूरो, अमर उजाला
Updated Mon, 12 Jan 2015 01:40 AM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
एसिड अटैक की शिकार दर्जनभर लड़कियों को शीरोज बनाने के पीछे युवा लड़कों यानी हीरोज की पूरी टीम है। स्टॉप एसिड अटैक अभियान को ऊंचाईयों तक ले जाने वाले इन युवाओं की उम्र 20 से 27 साल के बीच है। ज्यादातर ने अभियान को चलाने के लिए अपनी नौकरी तक छोड़ दी है। एक-दो को तो घर से दूर रहना पड़ रहा है।
टीम के मुखिया आलोक दीक्षित हैं जो कि पत्रकार थे। उनके नेतृत्व में अनुज परमार (20), अंबुज द्विवेदी (22), केतन दीक्षित (22), जय सिंह (26), ललित वार्ष्णेय (22), असीम त्रिवेदी (26) जैसे कई मेहनती युवा एसिड अटैक की शिकार लड़कियों को उनका हक दिलाने में जुटे हैं। युवाओं की इस पूरी टीम ने न केवल महिलाओं को उनकी पहचान लौटाई है, बल्कि सुप्रीम कोर्ट में रिट फाइल करने से लेकर वित्तीय और विधिक मदद तक उपलब्ध करा रहे हैं।
युवाओं ने खोला शीरोज केलिए कैफे
एसिड अटैक की शिकार लड़कियों को फिर से समाज की मुख्य धारा में लाने, हौसला बढ़ाने और आत्मनिर्भर बनाने के लिए युवाआें की इस टीम ने आगरा में फतेहाबाद रोड पर हैंगआउट नामक कैफे खोला। यह कैफे एसिड अटैक की शिकार महिलाएं ही संचालित करती हैं। इसका नाम हीरोज की तर्ज पर शीरोज रखा गया है। यह कैफे अब एक्टिविज्म का नया अड्डा है। देश और दुनिया की कई बड़ी शख्सियत इस कैफे के माध्यम से पीड़ित लड़कियों की मदद, उपचार और प्रशिक्षण के लिए आगे आ रही हैं। यहां काम करने वाली लड़कियां कभी चेहरे को नहीं ढकती। स्टॉप एसिड अटैक अभियान के तहत दिल्ली के रामलीला मैदान में एसिड अटैक के शिकार लोगों को उनका हक दिलाने और तेजाब की खुली बिक्री पर सख्ती से पाबंदी लगाने की मांग पर दस दिनों तक भूख हड़ताल की गई। आमिर खान, महेंद्र सिंह धोनी, जॉन अब्राहम जैसी कई बड़ी शख्सियत इस अभियान को सपोर्ट कर रही हैं। आगरा इस अभियान का गढ़ बन चुका है।
विज्ञापन
ये आग यूं ही जलती रहे
अभियान से जुड़ी डा. शिवानी चतुर्वेदी इस युवा फ ौज से बहुत प्रभावित हैं। कहती हैं, यकीन नहीं होता, आज के दौर में युवा जब भौतिकवादी चीजों के पीछे पडे़ हैं, ऐसे में ये लड़के घर-बार छोड़कर एक महान उद्देश्य के लिए लड़ रहे हैं। इनमें आग है, जोश है, यह आग यूं ही जलती रहे..।
विज्ञापन
टीम के मुखिया आलोक दीक्षित हैं जो कि पत्रकार थे। उनके नेतृत्व में अनुज परमार (20), अंबुज द्विवेदी (22), केतन दीक्षित (22), जय सिंह (26), ललित वार्ष्णेय (22), असीम त्रिवेदी (26) जैसे कई मेहनती युवा एसिड अटैक की शिकार लड़कियों को उनका हक दिलाने में जुटे हैं। युवाओं की इस पूरी टीम ने न केवल महिलाओं को उनकी पहचान लौटाई है, बल्कि सुप्रीम कोर्ट में रिट फाइल करने से लेकर वित्तीय और विधिक मदद तक उपलब्ध करा रहे हैं।
विज्ञापन
युवाओं ने खोला शीरोज केलिए कैफे
एसिड अटैक की शिकार लड़कियों को फिर से समाज की मुख्य धारा में लाने, हौसला बढ़ाने और आत्मनिर्भर बनाने के लिए युवाआें की इस टीम ने आगरा में फतेहाबाद रोड पर हैंगआउट नामक कैफे खोला। यह कैफे एसिड अटैक की शिकार महिलाएं ही संचालित करती हैं। इसका नाम हीरोज की तर्ज पर शीरोज रखा गया है। यह कैफे अब एक्टिविज्म का नया अड्डा है। देश और दुनिया की कई बड़ी शख्सियत इस कैफे के माध्यम से पीड़ित लड़कियों की मदद, उपचार और प्रशिक्षण के लिए आगे आ रही हैं। यहां काम करने वाली लड़कियां कभी चेहरे को नहीं ढकती। स्टॉप एसिड अटैक अभियान के तहत दिल्ली के रामलीला मैदान में एसिड अटैक के शिकार लोगों को उनका हक दिलाने और तेजाब की खुली बिक्री पर सख्ती से पाबंदी लगाने की मांग पर दस दिनों तक भूख हड़ताल की गई। आमिर खान, महेंद्र सिंह धोनी, जॉन अब्राहम जैसी कई बड़ी शख्सियत इस अभियान को सपोर्ट कर रही हैं। आगरा इस अभियान का गढ़ बन चुका है।
विज्ञापन
ये आग यूं ही जलती रहे
अभियान से जुड़ी डा. शिवानी चतुर्वेदी इस युवा फ ौज से बहुत प्रभावित हैं। कहती हैं, यकीन नहीं होता, आज के दौर में युवा जब भौतिकवादी चीजों के पीछे पडे़ हैं, ऐसे में ये लड़के घर-बार छोड़कर एक महान उद्देश्य के लिए लड़ रहे हैं। इनमें आग है, जोश है, यह आग यूं ही जलती रहे..।