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यमुना की गोद में कुदरत का खजाना: 200 से ज्यादा प्रजातियां मिलीं, घड़ियाल-डॉल्फिन समेत दुर्लभ जीवों का बसेरा
Tue, 06 Oct 2026 12:37 PM IST
Dhirendra Singh
धर्मेंद्र त्यागी, अमर उजाला न्यूज नेटवर्क, आगरा
धर्मेंद्र त्यागी, अमर उजाला न्यूज नेटवर्क, आगरा
Published by: Dhirendra Singh
Updated Tue, 06 Oct 2026 12:37 PM IST
सार
सूर सरोवर से पचनदा तक यमुना और उसके किनारों के सर्वे में 200 से अधिक प्रजातियों की मौजूदगी सामने आई है। इनमें घड़ियाल, इटावा क्षेत्र में डॉल्फिन, प्रवासी पक्षी, तितलियां, कछुए और कई संकटग्रस्त प्रजातियां शामिल हैं।
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यमुना की गोद में कुदरत का खजाना
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
यमुना और इसकी वादियों में प्राकृतिक खजाना मिला है। यहां संकटग्रस्त 200 से अधिक प्रजातियां मिली हैं। वन विभाग इससे उत्साहित है और इनको संरक्षित करेगा। इसके लिए मास्टर प्लान बनाया जा रहा है। इसकी रिपोर्ट पर्यावरण एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय को भेजी गई है।
वन विभाग की टीम ने बीते महीने सूर सरोवर से पचनदा तक जीव-जंतु, वनस्पति, पक्षियों का सर्वे किया। इसमें टीम को बेहद चौंकाने वाले परिणाम मिले। यहां ऐसी कई प्रजाति पाई गईं जो संकट से जूझ रही हैं। इसमें सात तरह की प्रवासी पक्षी, 65 तरह की स्थानीय चिड़ियां, 12 तरह की तितली, 48 प्रजाति की वनस्पति, पांच तरह के कछुआ, तीन तरह की छिपकली समेत अन्य कई तरह के जीव-जंतु और वनस्पति मिली हैं। घड़ियाल और इटावा क्षेत्र में डॉल्फिन की संख्या भी बढ़ी हुई पाई गई। इन सभी की सूची बनाकर रिपोर्ट मंत्रालय को भेजी गई है।
प्राकृतिक खजाना
चिड़िया : रेड नेप्ड, ग्रेहेरॉन, मिस्र गिद्ध, इंडियन पोंड हेरॉन, सारस, ऑरिएंटल डार्टर, ब्लैक नैक्ड स्टॉर्क, स्पॉट बिल्ड डक।
तितली : व्हाइट ऑरेंज टिप, लेमन पैंसी, पीकॉक पेंसी, डार्क ग्रास ब्लू, स्ट्रिप्ड टाइगर, प्लेन टाइगर, राइस स्विफ्ट।
सांप : इंडियन रॉक पाइथन, चेकर्ड कीलबैक।
छिपकली : बंगाल मॉनिटर।
स्तनधारी : स्पॉटेड हिरण, ब्लू बुल, गोल्डन जैकाल, वाइल्ड बोअर, रीसस बंदर।
मछली : रोहू, तिलापिया, मांगुर, चितला, गूंच, गंगटा, इंडियन गंगटा, वॉलगो, सिंघारा।
वनस्पति : कॉमन कॉकलेबर, वाइल्ड जूट, बरमूडा घास, सहजन, कॉफ फ्लोवर, गोल्डिलॉक्स एस्टर, कॉर्नफ्लावर, आंधीझाड़ा, खसखस।
वाइल्डलाइफ सर्वाइवल एलाइंस के मुख्य कार्यकारी अधिकारी डॉ. अरुणिमा सिंह ने कहा कि सर्वे में आगरा, फिरोजाबाद, इटावा जिले के 20 से अधिक विशेषज्ञों की टीम शामिल रही। उम्मीद से ज्यादा जीव-जंतु और वनस्पति मिले हैं। इनके संरक्षण से पर्यावरण में सुधार होने के साथ इकोसिस्टम भी बेहतर होगा।
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डीएफओ राजेश कुमार का कहना है कि यमुना और इसके किनारों पर विशेषज्ञों की टीम में वनस्पति, जीव-जंतु और पक्षी मिले हैं। इनकी सूची बनाई गई है। इनको संरक्षित किया जाएगा। इसकी मंत्रालय में भी जानकारी दी है। इसके लिए योजना बनाई जा रही है।
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वन विभाग की टीम ने बीते महीने सूर सरोवर से पचनदा तक जीव-जंतु, वनस्पति, पक्षियों का सर्वे किया। इसमें टीम को बेहद चौंकाने वाले परिणाम मिले। यहां ऐसी कई प्रजाति पाई गईं जो संकट से जूझ रही हैं। इसमें सात तरह की प्रवासी पक्षी, 65 तरह की स्थानीय चिड़ियां, 12 तरह की तितली, 48 प्रजाति की वनस्पति, पांच तरह के कछुआ, तीन तरह की छिपकली समेत अन्य कई तरह के जीव-जंतु और वनस्पति मिली हैं। घड़ियाल और इटावा क्षेत्र में डॉल्फिन की संख्या भी बढ़ी हुई पाई गई। इन सभी की सूची बनाकर रिपोर्ट मंत्रालय को भेजी गई है।
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प्राकृतिक खजाना
चिड़िया : रेड नेप्ड, ग्रेहेरॉन, मिस्र गिद्ध, इंडियन पोंड हेरॉन, सारस, ऑरिएंटल डार्टर, ब्लैक नैक्ड स्टॉर्क, स्पॉट बिल्ड डक।
तितली : व्हाइट ऑरेंज टिप, लेमन पैंसी, पीकॉक पेंसी, डार्क ग्रास ब्लू, स्ट्रिप्ड टाइगर, प्लेन टाइगर, राइस स्विफ्ट।
सांप : इंडियन रॉक पाइथन, चेकर्ड कीलबैक।
छिपकली : बंगाल मॉनिटर।
स्तनधारी : स्पॉटेड हिरण, ब्लू बुल, गोल्डन जैकाल, वाइल्ड बोअर, रीसस बंदर।
मछली : रोहू, तिलापिया, मांगुर, चितला, गूंच, गंगटा, इंडियन गंगटा, वॉलगो, सिंघारा।
वनस्पति : कॉमन कॉकलेबर, वाइल्ड जूट, बरमूडा घास, सहजन, कॉफ फ्लोवर, गोल्डिलॉक्स एस्टर, कॉर्नफ्लावर, आंधीझाड़ा, खसखस।
वाइल्डलाइफ सर्वाइवल एलाइंस के मुख्य कार्यकारी अधिकारी डॉ. अरुणिमा सिंह ने कहा कि सर्वे में आगरा, फिरोजाबाद, इटावा जिले के 20 से अधिक विशेषज्ञों की टीम शामिल रही। उम्मीद से ज्यादा जीव-जंतु और वनस्पति मिले हैं। इनके संरक्षण से पर्यावरण में सुधार होने के साथ इकोसिस्टम भी बेहतर होगा।
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डीएफओ राजेश कुमार का कहना है कि यमुना और इसके किनारों पर विशेषज्ञों की टीम में वनस्पति, जीव-जंतु और पक्षी मिले हैं। इनकी सूची बनाई गई है। इनको संरक्षित किया जाएगा। इसकी मंत्रालय में भी जानकारी दी है। इसके लिए योजना बनाई जा रही है।