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कान्हा की 'कालिंदी' में गिर रहे 'कालिया नाग' रूपी गंदे नाले, आचमन योग्य नहीं रहा जल

Wed, 16 Oct 2019 12:01 AM IST
मुकेश कुमार न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मथुरा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मथुरा Published by: मुकेश कुमार Updated Wed, 16 Oct 2019 12:01 AM IST
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Yamuna river water contaminated due to dirty drains in mathura
यमुना नदी - फोटो : अमर उजाला
भगवान श्रीकृष्ण की लीलाओं की साक्षी यमुना को भले ही ब्रजवासी महारानी, कालिंदी आदि नामों से पुकारते हों, लेकिन प्रदूषण रूपी कालिया आज भी उसके गले की फांस बना हुआ है। गंदे नालों का पानी यमुना में गिरने से लाख दावों के बाद रोका नहीं जा सका है। प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड यमुना जल को स्नान और आचमन योग्य नहीं मानता है।
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हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट तक ने यमुना को प्रदूषण से बचाने के लिए कई दफा आदेश निर्देश जारी किए। अधिकारियों की क्लास तक लगाई लेकिन पूरे शहर की गंदगी को ढोने वाले नाले सीधे यमुना में गिरने से नहीं रोके जा सके। वर्तमान में भी नालों का गंदा पानी यमुना में जा रहा है। 
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कई बार हो चुकी है जलचर की मौत 

इसके चलते केवल बारिश के दिनों को छोड़ कर यमुना जल में बीओडी की मात्रा 14 मिली ग्राम प्रति लीटर तक पहुंच जाती है। डीओ की मात्रा दो से तीन मिलीग्राम प्रति लीटर ही रह जाती है। कई दफा मछली तथा अन्य जलचर भी मर चुके हैं।  
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इसी प्रकार से गोवर्धन में मानसी गंगा और राधाकुंड आदि में भी प्रदूषण का आलम है। यह प्रदूषण इस सीमा तक पहुंच जाता है कि परिक्रमार्थी आचमन तक नहीं ले पाते हैं। इसे लेकर भी सरकार तथा न्यायालय ने कई  दफा आपत्ति की है। 

उधर, केवल बारिश को छोड़कर अन्य दिनों में यमुना में पर्याप्त मात्रा में यमुना जल नहीं रहता है। जिसके चलते यमुना में नालों आदि का गंदा पानी ही रह जाता है। इस दौरान यमुना का पानी आचमन योग्य भी नहीं रह जाता है।

औद्योगिक इकाइयों पर नहीं लग सका प्रतिबंध

जिन औद्योगिक इकाईयों द्वारा खुलकर एनजीटी तथा न्यायालय के आदेश की अवहेलना की जा रही है उन औद्योगिक इकाइयों पर प्रशासन द्वारा कोई कार्रवाई तक नहीं की गई है। इन इकाईयों में साड़ी की फैक्ट्री, टोटी फैक्ट्री के अलावा चांदी तथा सोने का काम करने वाले बड़े कारखाने भी शामिल हैं।

500 करोड़ का प्रोजेक्ट बना मुसीबत

जल निगम के माध्यम से केंद्र तथा प्रदेश सरकार द्वारा सीवर लाइन तथा एसटीपी तैयार करने की करीब 500 करोड़ की योजना जब तक पूर्ण नहीं हो जाती यमुना में गंदगी बढ़ रही है। अधिकारियों द्वारा बताया जाता है कि इस दौरान वे एसटीपी तथा सीवर ट्रीटमेंट प्लांट पर भी नियंत्रण नहीं कर पा रहे हैं। इसके चलते वर्तमान में यमुना में जाने वाली नालों  की गंदगी और बढ़ गई है।
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