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‘अंडर टेबल’ एनओसी ने बिगाड़ी यमुना की हालत

Wed, 03 Jun 2015 02:06 AM IST
ब्यूरो, अमर उजाला आगरा
ब्यूरो, अमर उजाला आगरा Updated Wed, 03 Jun 2015 02:06 AM IST
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Yammuna flood Zone inThe illegal construction in  agra
यमुना के डूब क्षेत्र में बिल्डरों की आवासीय योजनाओं के लिए सरकारी नियमों और आदेशों को दरकिनार किया गया। प्रमुख विभागों ने बिना भौतिक निरीक्षण किए ले-देकर अंडर टेबल एनओसी जारी कर दी। यही वजह रही कि महीनों तक निर्माण कार्य चलते रहे और आगरा विकास प्राधिकरण (एडीए), सिंचाई विभाग आंख मूंद कर बैठे रहे। यदि नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) का खौफ न होता तो शायद ही किसी अवैध निर्माण पर कार्रवाई होती।
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एक आवासीय योजना के लिए फायर, प्रदूषण, पर्यावरण, सिंचाई, एडीए, तहसील, नगर निगम, जलसंस्थान आदि विभागों से अनापत्ति प्रमाण पत्र लेने पड़ते हैं। सिंचाई विभाग यमुना के डूब क्षेत्र की सीमा तय न होने को अपनी ढाल बनाकर बिल्डरों की योजनाओं के लिए अनापत्ति प्रमाण जारी करता रहा। दरअसल, 1953 के बाद से डूब क्षेत्र का निर्धारण ही नहीं हुआ। जबकि इस बीच यमुना कई बार अपनी राहें बदल चुकी है। ऐसे में डूब क्षेत्र में निर्माण पर प्रतिबंध का नियम होते भी इसका तोड़ सिंचाई विभाग के पास है। डूब क्षेत्र का पता न होने पर तहसील में बहुत सारी जमीनों का रिकॉर्ड नहीं है। ऐसे में तहसील की एनओसी भी लेने में भी कोई दिक्कत नहीं आती। बाकी काम लेखपाल अपने स्तर से ही निपटा देते हैं। जलसंस्थान कर्मी भी बिना जांच-पड़ताल किए एनओसी दे रहे हैं। यही वजह है कि अवैध इमारतों का सीवर सीधे यमुना में मिल रहा है। एडीए की लीला सबसे निराली है। क्योंकि किसी भी निर्माण के लिए एडीए से नक्शा पास कराना जरूरी होता है। वसूली के वक्त एडीए कर्मियों को यह भी याद नहीं रहता है कि उनके विभाग का ही आदेश है कि यमुना के दो सौ मीटर दायरे निर्माण नहीं हो सकता। इसके बावजूद वह नक्शा पास करते रहे हैं।
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यमुनापार भी यही हालत
एनजीटी के सख्त रुख के बाद अब एडीए अवैध निर्माणों को ढहाने निकला है, लेकिन अपने ही बुने जाल में फंसे होने के कारण वह अब तक एक भी ऐसे निर्माण पर बुल्डोजर नहीं चला पाया, जिससे हकीकत में यमुना और पर्यावरण को खतरा पहुंच रहा है। यमुनापार क्षेत्र में भी यही हालत है, लेकिन एडीए ने इमारतों को छुआ तक नहीं है।
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वर्जन
यमुना के डूब क्षेत्र में निर्माण के लिए दी गईं सभी एनओसी गलत हैं। इनको एनजीटी में चैलेंज किया जाएगा। नियम और आदेशों का मखौल बनाया जा रहा है। मगर, अब यह सब नहीं चलेगा।
- डीके जोशी, सदस्य, सुप्रीम कोर्ट अनुश्रवण समिति
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