विश्व ओजोन संरक्षण दिवस : 'पृथ्वी की छतरी' को कमजोर कर रहीं हैं ग्रीन हाउस गैसें

Agra Bureau आगरा ब्यूरो
Updated Wed, 15 Sep 2021 11:42 PM IST
World Ozone Protection Day: Greenhouse gases are weakening the 'umbrella of the earth'
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कासगंज। पृथ्वी की छतरी मानी जाने वाली ओजोन की परत पर्यावरण के लिए सुरक्षा का काम करती है। धरती पर जीवन के प्रमुख कारकों में हवा-पानी की तरह सूरज की किरणें भी शामिल हैं, लेकिन अगर सूरज की ये किरणें उसी रूप में धरती पर आएं जिस रूप में सूरज से निकलती हैं तो वरदान की जगह अभिशाप बन सकती हैं। क्योंकि इनमें शामिल पराबैंगनी किरणे काफी घातक होती हैं। कार्बन के अत्यधिक उत्सर्जन के कारण ओजोन परत का दिन प्रतिदिन क्षय हो रहा है। लोगों को पर्यावरण संरक्षण के लिए जागरूकता दिखानी होगी।
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कासगंज जिले में पर्यावरण संरक्षण के लिए काफी कार्य हुए हैं। इससे आने वाले समय में फायदा होगा। धरती से कार्बन डाईऑक्साइड और कार्बन मोनो ऑक्साइड गैस वातावरण में अधिक जाती है। जिससे ओजोन की परत को क्षति हो रही है। लोग को जागरूक होकर पर्यावरण का संरक्षण करें तो सुधार हो सकेगा। - दिवाकर वशिष्ठ, पर्यावरण विशेषज्ञ

आसमान छूने की दौड़ में लोग प्रकृति को भूल रहे हैं। वातावरण में ग्रीन हाऊस गैसें अधिक बढ़ते जा रही हैं। फ्रिज, एसी आदि से ग्रीन हाऊस गैस निकलती है। लोगों को प्रकृति की ओर वापस लौटना होगा। वातावरण का संतुलन कायम रखने के लिए पौधों और पेड़ों का संरक्षण जरूरी है। वहीं आधुनिक उपकरणों का इस्तेमाल भी सीमित करना होगा। - एचपीएन दुबे, जीव विज्ञान शिक्षक।
वाहनों एवं चिमनियों से निकलने वाले धुएं से प्रदूषण बढ़ रहा है। कार्बन उत्सर्जन वातावरण के लिए घातक बन रहा है। ओजोन की परत लगातार प्रभावित हो रही है। विद्यार्थियों को समय समय पर प्रयोगात्मक रूप से यह बताया जाता है कि किस तरह पर ओजोन की परत को मजबूत बना सकते हैं। हर हाल में हमें जागरूकता दिखानी होगी- दीपराज माहेश्वरी, रसायन विज्ञान शिक्षक।
पर्यावरण को संरक्षित रखकर हम ओजोन परत को संरक्षित कर सकते हैं। सूरज से आने वाली हानिकारक किरणों को रोक सकते हैं। किसी भी हाल में हमें अनदेखी नहीं करनी चाहिए। लोग अधिक से अधिक जागरूक होकर पौधरोपण पर ध्यान दें। विश्व ओजोन दिवस पर हमें संकल्प लेना होगा कि अधिक से अधिक पर्यावरण संरक्षण करेंगे और ऐसे कारक जो नुकसान दायक गैस उत्सर्जन करते हैं उन पर संतुलन की कोशिश करेंगे। - डॉ. मनोज शर्मा, संस्थापक दुलार सेव द प्लांट संस्था।

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