जूता फैक्ट्री मालिक ने वेतन के नाम पर दिए 10 रुपये, आपरेटर ने उठाया खौफनाक कदम
आगरा के सिकंदरा में अरतौनी स्थित जूता फैक्ट्री के मशीन ऑपरेटर ने वेतन में 10 रुपये मिलने पर फैक्ट्री में फांसी लगा ली। गनीमत रही कि समय रहते कर्मचारियों ने उसे उतार लिया। सूचना पर पहुंची पुलिस ने उसे निजी अस्पताल में भर्ती कराया है।
मूलरूप से एटा निवासी शेखर सिकंदरा के अरतौनी स्थित लांबा फैक्ट्री में मशीन ऑपरेटर के पद पर दो साल से काम कर रहा है। वह रुनकता में किराये पर रहता है। शेखर ने पुलिस को बताया कि वेतन से ईएसआई की कटौती होती है, उसे 15 दिन पहले फैक्ट्री के काम से दूसरी फैक्ट्री में भेजा गया था। रात में लौटते समय बाइक फिसल गई। इससे रीढ़ की हड्डी में चोट आई।
फैक्ट्री मालिक ने पास के निजी अस्पताल में भर्ती कराया। सुबह अस्पताल से छुट्टी के बाद वह घर चला गया। ठीक होने के बाद फैक्ट्री आया। 15 अगस्त को शेखर को वेतन का लिफाफा मिला। आरोप है कि लिफाफा खोला तो 10 रुपये निकले। जब इस बारे में मैनेजर से पूछा तो उसने कहा कि इलाज में काफी खर्च हुआ था। बचे हुए रुपये दिए गए हैं। कर्मचारी ने मालिक तक अपनी बात पहुंचाई, लेकिन सुनवाई नहीं हुई।
बुधवार सुबह वह फैक्ट्री आया और कमरे में बंद हो गया। बाद में फंदे पर लटक गया। साथी मजदूरों को पता चल गया। उन्होंने कमरे का गेट तोड़ा। इसके बाद शेखर को बचा लिया। सूचना पर पुलिस आ गई, उसे निजी अस्पताल में ले गई। परिजन भी आ गए।
परिजनों का कहना था कि 9500 रुपये सैलरी मिलती है। उसकी पूरी पगार कैसे कट गई? जबकि इलाज में दो इंजेक्शन और ड्रिप लगी थी। एक बेल्ट भी दी गई थी। इलाज ईएसआई कार्ड से क्यों नहीं कराया गया?
वहीं मैनेजर ने कहा कि ऑपरेटर की तबीयत खराब हो गई थी। उसका हिसाब कर दिया गया है। इंस्पेक्टर थाना सिकंदरा ने बताया कि वेतन में 10 रुपये देने पर उसने आत्महत्या का प्रयास किया था। अब हालत में सुधार है। इस मामले में किसी तरह की शिकायत नहीं की गई है।